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Mandi News: शिकारी देवी मंदिर जाने पर प्रतिबंध जारी
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सोशल मीडिया के भ्रामक प्रचार से बचें श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
थुनाग (मंडी)। जिले की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित प्रसिद्ध माता शिकारी देवी मंदिर में चैत्र नवरात्र के दौरान भारी बर्फबारी का दौर जारी है। समुद्र तल से लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर विराजमान इस छत-रहित प्राचीन मंदिर में एक फुट से अधिक बर्फ जमा हो चुकी है। आसपास का इलाका और भी गहरी बर्फ से ढका हुआ है। मौसम खराब होने के कारण यात्रा पूरी तरह जोखिम भरी बनी हुई है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आगमन पर प्रतिबंध लगा रखा है। पूजा-अर्चना केवल पुजारी और मंदिर कारदारों की ओर से परंपरा के अनुसार किया जा रहा है। मंदिर परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है। यह संभवतः पिछले कुछ वर्षों में पहली बार हो रहा है कि नवरात्र के दौरान मंदिर इतना सूना रहा।
हाल ही में कुछ श्रद्धालु बर्फ में फंस गए थे, जिन्हें लोक निर्माण विभाग की जेसीबी की मदद से सुरक्षित निकाला गया। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से बार-बार अपील की है कि अनावश्यक जोखिम न उठाया जाए। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर बर्फ हटा दी गई है या श्रद्धालु बर्फ के बीच नवरात्र का आनंद लेंगे जैसी भ्रामक और अतिरंजित खबरें प्रसारित की गईं, जिनका प्रशासन ने स्पष्ट खंडन किया है। ये सूचनाएं पूरी तरह गलत हैं और लोगों को भ्रमित कर रही हैं।
एसडीएम थुनाग संजीत शर्मा ने आम जनमानस और श्रद्धालुओं से विनम्र अपील की है कि उप मंडल थुनाग के अंतर्गत शिकारी माता एवं अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार बर्फबारी हो रही है। ऐसी स्थिति में कोई भी व्यक्ति इन स्थानों पर जाने से पूर्णतया परहेज करें। प्रशासन की ओर से आगामी सूचना तक शिकारी माता एवं अन्य ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने का जोखिम न लें।
उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में दूरभाष नंबर 9317207038 पर संपर्क करें। प्रशासन, मंदिर समिति और लोक निर्माण विभाग ने सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यात्रा पर पूरी रोक लगाई है। सर्दियों (नवंबर से मार्च तक) में मंदिर आमतौर पर बंद रहता है और इस वर्ष भी भारी बर्फबारी के कारण यही स्थिति बनी हुई है। एसडीएम ने कहा कि भ्रामक खबरें श्रद्धालुओं की जान को खतरे में डाल सकती हैं। श्रद्धालु अपनी और दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। फिलहाल शिकारी देवी की यात्रा टालें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
थुनाग (मंडी)। जिले की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित प्रसिद्ध माता शिकारी देवी मंदिर में चैत्र नवरात्र के दौरान भारी बर्फबारी का दौर जारी है। समुद्र तल से लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर विराजमान इस छत-रहित प्राचीन मंदिर में एक फुट से अधिक बर्फ जमा हो चुकी है। आसपास का इलाका और भी गहरी बर्फ से ढका हुआ है। मौसम खराब होने के कारण यात्रा पूरी तरह जोखिम भरी बनी हुई है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आगमन पर प्रतिबंध लगा रखा है। पूजा-अर्चना केवल पुजारी और मंदिर कारदारों की ओर से परंपरा के अनुसार किया जा रहा है। मंदिर परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है। यह संभवतः पिछले कुछ वर्षों में पहली बार हो रहा है कि नवरात्र के दौरान मंदिर इतना सूना रहा।
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हाल ही में कुछ श्रद्धालु बर्फ में फंस गए थे, जिन्हें लोक निर्माण विभाग की जेसीबी की मदद से सुरक्षित निकाला गया। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से बार-बार अपील की है कि अनावश्यक जोखिम न उठाया जाए। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर बर्फ हटा दी गई है या श्रद्धालु बर्फ के बीच नवरात्र का आनंद लेंगे जैसी भ्रामक और अतिरंजित खबरें प्रसारित की गईं, जिनका प्रशासन ने स्पष्ट खंडन किया है। ये सूचनाएं पूरी तरह गलत हैं और लोगों को भ्रमित कर रही हैं।
एसडीएम थुनाग संजीत शर्मा ने आम जनमानस और श्रद्धालुओं से विनम्र अपील की है कि उप मंडल थुनाग के अंतर्गत शिकारी माता एवं अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार बर्फबारी हो रही है। ऐसी स्थिति में कोई भी व्यक्ति इन स्थानों पर जाने से पूर्णतया परहेज करें। प्रशासन की ओर से आगामी सूचना तक शिकारी माता एवं अन्य ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने का जोखिम न लें।
उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में दूरभाष नंबर 9317207038 पर संपर्क करें। प्रशासन, मंदिर समिति और लोक निर्माण विभाग ने सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यात्रा पर पूरी रोक लगाई है। सर्दियों (नवंबर से मार्च तक) में मंदिर आमतौर पर बंद रहता है और इस वर्ष भी भारी बर्फबारी के कारण यही स्थिति बनी हुई है। एसडीएम ने कहा कि भ्रामक खबरें श्रद्धालुओं की जान को खतरे में डाल सकती हैं। श्रद्धालु अपनी और दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। फिलहाल शिकारी देवी की यात्रा टालें।