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Mandi News: श्मशान घाट न बनने से ग्रामीणों की बढ़ीं मुश्किलें
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फोरलेन निर्माण में हटाया गया पुराना मोक्षधाम
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। बल्ह क्षेत्र की ग्राम पंचायत भड़याल, टिक्कर और चंडयाल के ग्रामीण श्मशानघाट के अभाव से गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। सुकेत खड्ड के किनारे स्थित पारंपरिक मोक्षधाम को एनएचएआई की ओर से फोरलेन सड़क निर्माण के दौरान हटा दिया गया था, लेकिन इसके पुनर्निर्माण की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर एडीसी को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। स्थानीय प्रतिनिधि रवि सिंह चंदेल ने बताया कि फोरलेन निर्माण के समय संबंधित अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद मोक्षधाम का पुनर्निर्माण किया जाएगा, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
रवि सिंह चंदेल ने यह भी बताया कि यह मुद्दा पहले भी राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आयोजित शिकायत निवारण समिति की बैठक में उठाया गया था, जहां पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया गया था। बावजूद इसके, आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। मोक्षधाम के अभाव में ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए दूर-दराज के स्थानों पर जाना पड़ता है और विशेषकर बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर रूप ले लेती है। ग्रामीण प्रशासन से इस गंभीर समस्या के शीघ्र समाधान की मांग कर रहे हैं।
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मंडी। बल्ह क्षेत्र की ग्राम पंचायत भड़याल, टिक्कर और चंडयाल के ग्रामीण श्मशानघाट के अभाव से गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। सुकेत खड्ड के किनारे स्थित पारंपरिक मोक्षधाम को एनएचएआई की ओर से फोरलेन सड़क निर्माण के दौरान हटा दिया गया था, लेकिन इसके पुनर्निर्माण की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर एडीसी को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। स्थानीय प्रतिनिधि रवि सिंह चंदेल ने बताया कि फोरलेन निर्माण के समय संबंधित अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद मोक्षधाम का पुनर्निर्माण किया जाएगा, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
रवि सिंह चंदेल ने यह भी बताया कि यह मुद्दा पहले भी राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में आयोजित शिकायत निवारण समिति की बैठक में उठाया गया था, जहां पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया गया था। बावजूद इसके, आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। मोक्षधाम के अभाव में ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए दूर-दराज के स्थानों पर जाना पड़ता है और विशेषकर बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर रूप ले लेती है। ग्रामीण प्रशासन से इस गंभीर समस्या के शीघ्र समाधान की मांग कर रहे हैं।
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