एमसी शिमला मासिक बैठक: दुकानों के किराए में राहत, नए खेल मैदानों-सड़कों को मंजूरी, कर्मियों को महंगाई भत्ता
महापौर सुरेंद्र चौहान और उपमहापौर उमा कौशल की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई नगर निगम की मासिक बैठक में कई राहत भरे फैसले लिए गए हैं।
विस्तार
दिवाली से पहले नगर निगम ने शहर के युवाओं, कारोबारियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। महापौर सुरेंद्र चौहान और उपमहापौर उमा कौशल की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई नगर निगम की मासिक बैठक में कई राहत भरे फैसले लिए गए हैं। शहर में नगर निगम के सबसे बड़े शॉपिंग मॉल आजीविका भवन के सैकड़ों दुकानदारों को इससे बड़ी राहत मिली है। इनकी दुकानों का किराया अब हर साल की बजाय पांच साल बाद दस फीसदी बढ़ाया जाएगा। इस परिसर में 200 से ज्यादा दुकानें बनी हैं। सदन ने शहर में सात नए खेल मैदान बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। 2.20 करोड़ रुपये से इनका निर्माण किया जाएगा। महापौर ने अन्य वार्डाें के पार्षदों से भी प्रस्ताव मांगें हैं। नगर निगम कर्मचारियों को पांच फीसदी महंगाई भत्ता देने को भी सदन ने मंजूरी दे दी है। यही नहीं निगम कर्मचारियों को दिवाली के उपलक्ष्य पर 30 हजार रुपये एडवांस ऋण की भी सुविधा मिलेगी। यह ऋण बाद में कर्मचारियों की तनख्वाह से किस्तों में काटा जाएगा। पेंशनरों को महंगाई भत्ता 45 से बढ़ाकर 50 फीसदी देने के प्रस्ताव को भी सदन ने मंजूरी दी। इससे हर साल निगम पर 34 लाख रुपये का आर्थिक बोझ पड़ेगा। नगर निगम अपनी खाली जमीनों पर व्यावसायिक परिसर बनाएगा। इससे कमाई होगी। सदन ने इसी कड़ी में कैथू में खाली जमीन पर दुकानें बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पार्षद कांता सुयाल के अनुसार बेकार खाली पड़ी जमीन से निगम को हर साल कमाई होगी।
गरमाने लगा भवनों के नियमितीकरण का मुद्दा, सीएम का आश्वासन जल्द होगी बैठक
राजधानी शिमला समेत प्रदेशभर में बने हजारों अवैध भवनों को वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी के माध्यम से नियमित करने का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। सरकार ने इस मामले में जल्द बैठक बुलाकर लोगों को राहत देने के संकेत दिए हैं। इस मुद्दे को लेकर पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह और महापौर सुरेंद्र चौहान की अगुवाई में शिमला शहर के सैकड़ों लोग शुक्रवार शाम करीब 6:30 बजे प्रदेश सचिवालय पहुंचे। सभी लोग सचिवालय के गेट पर एकत्रित हो गए। सात बजे मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू स्वयं सचिवालय के गेट पर पहुंचकर लोगों से मिले। मंत्री अनिरुद्ध सिंह और महापौर सुरेंद्र चौहान ने मुख्यमंत्री के समक्ष भवनों को नियमित करने और बिजली-पानी के सस्ते कनेक्शन उपलब्ध करवाने के लिए वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी लाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि अकेले शिमला शहर में ही 10 हजार से अधिक ऐसे भवन हैं, जो अवैध श्रेणी में आते हैं। भवन नियमित न होने के कारण लोगों को बिजली और पानी के बिल व्यावसायिक दरों पर चुकाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी के पक्ष में हैं और सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
भवनों में बेसमेंट खोलने की मिले छूट
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार लोगों को राहत दिलाने के लिए प्रयास कर रही है। सरकार पहले ही भवनों की एटिक की ऊंचाई बढ़ाकर उसका आवासीय उपयोग करने की मंजूरी दे चुकी है। इसके अलावा सड़कों से सटे भवनों की बेसमेंट का इस्तेमाल पार्किंग के लिए करने की छूट दी है। अब लोगों की ओर से उठाई जा रही नियमितीकरण की मांग के कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि सड़कों से सटे भवनों में बेसमेंट खोलने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन जिन भवनों को सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं है, उनके मालिकों को भी राहत मिलनी चाहिए। अवैध श्रेणी में आने के कारण हजारों भवनों में बिजली और पानी के बिल व्यावसायिक दरों पर जारी किए जा रहे हैं।
चलौंठी-भट्ठाकुफर ट्विन टनल का निर्माण कार्य न करे सरकार
चलौंठी-भट्ठाकुफर में निर्माणाधीन फोरलेन की ट्विन टनल की प्रभावित संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार देर शाम सचिवालय में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात की। लोगों ने इस मौके पर टनल न बनाने की मांग की। पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह, शांति विहार के पार्षद विनीत शर्मा और भट्ठाकुफर के पार्षद नरेंद्र ठाकुर की अगुवाई में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को मांगपत्र सौंपा। इसमें समिति के सदस्य राजेंद्र चौहान, सतीश शर्मा, राजेंद्र जस्टा, अंशुल चौहान, रमेश चौहान, रमेश ठाकुर, मनोहर वर्मा और एकता शर्मा शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने भवनों में दरारें आने और टनल की एलाइनमेंट की जद में आ रहे करीब 500 भवनों की सुरक्षा को खतरा बताते हुए टनल का निर्माण कार्य जारी न रखने की मांग उठाई। प्रभावितों का कहना है कि टनल निर्माण भविष्य में बड़ी तबाही का कारण बन सकता है। इससे सैकड़ों भवन मालिकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है और हजारों परिवार बेघर हो सकते हैं। उन्होंने मांग की कि फोरलेन का निर्माण पुराने सर्वे के आधार पर ही किया जाए।
इसके अलावा प्रभावित भवन मालिकों ने अब तक हुए नुकसान के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से तत्काल राहत और मुआवजा दिलाने के लिए एक ठोस व्यवस्था बनाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष टनल निर्माण के कारण अब तक 14 से अधिक भवनों में दरारें आने से संबंधित तथ्य भी रखे। भवन मालिकों और जनप्रतिनिधियों ने उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के सिलक्यारा में हुए टनल हादसे के बाद जारी अधिसूचना का हवाला देते हुए इस मामले का समाधान निकालने की मांग की। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं और मांगों को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही पूरे मामले का अध्ययन करवाकर भवन मालिकों की मांगों और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाएगा। इस पर विनीत शर्मा और नरेंद्र ठाकुर ने मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री टनल निर्माण से सैकड़ों भवन मालिकों के घरों पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए उचित फैसला लेकर प्रभावितों को राहत प्रदान करेंगे।