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हिमाचल: राज्य में भांग की नियंत्रित खेती का रास्ता साफ, औषधीय और वैज्ञानिक उपयोग के लिए लागू होंगे नए नियम

Mon, 20 Jul 2026 10:25 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 20 Jul 2026 10:25 PM IST
सार

प्रदेश सरकार ने औषधीय, वैज्ञानिक और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए नियंत्रित तरीके से भांग की खेती को विनियमित करने का फैसला लिया है।  नए नियमों के तहत खेती से लेकर बीजों की खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण, निगरानी और विपणन तक की पूरी व्यवस्था तय कर दी गई है। 

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Path cleared for controlled cannabis cultivation in Himachal for medicinal and scientific use
भांग की खेती(सांकेतिक)। - फोटो : संवाद

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश सरकार ने औषधीय, वैज्ञानिक और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए नियंत्रित तरीके से भांग की खेती को विनियमित करने का फैसला लिया है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने हिमाचल प्रदेश नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। नए नियमों के तहत खेती से लेकर बीजों की खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण, निगरानी और विपणन तक की पूरी व्यवस्था तय कर दी गई है। वैज्ञानिक ढंग से भांग की खेती राज्य में किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन सकती है, वहीं औषधीय और शोध कार्यों को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, नियमों में सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही के कड़े प्रावधान रखे गए हैं ताकि अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।

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भांग की खेती के लिए ये रहेंगे नियम
नए नियमों के अनुसार औषधीय और वैज्ञानिक उपयोग के लिए खेती केवल सरकार की ओर से अधिसूचित क्षेत्रों में ही की जा सकेगी। व्यक्तिगत अथवा सामूहिक रूप से खेती करने के लिए कम से कम तीन एकड़ का भौगोलिक रूप से जुड़ा हुआ क्षेत्र होना अनिवार्य होगा। हालांकि, सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों को इस शर्त से छूट दी गई है। खेती के इच्छुक किसानों को लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा। इसके साथ किसी लाइसेंसधारी निर्माता के साथ खरीद समझौता भी प्रस्तुत करना होगा, ताकि फसल की खरीद सुनिश्चित हो सके। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना खरीद व्यवस्था के किसी भी किसान को स्वतंत्र रूप से खेती का लाइसेंस नहीं दिया जाएगा।

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अधिकृत बीज आपूर्तिकर्ता ही बेच सकेंगे बीज
 संशोधित नियमों में पहली बार अधिकृत बीज आपूर्तिकर्ता की व्यवस्था की गई है। केवल लाइसेंसधारी आपूर्तिकर्ता ही किसानों को भांग के बीज बेच सकेंगे। बीजों की गुणवत्ता और उनमें मौजूद कैनाबिनॉइड्स की मात्रा का प्रमाणित लैब परीक्षण अनिवार्य होगा। बीजों को उनके उपयोग और प्रकृति के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में सुरक्षित रखना होगा। बीज विक्रेताओं को खरीद, बिक्री और स्टॉक का पूरा रिकॉर्ड भी रखना पड़ेगा।

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खेती से कटाई तक रहेगी डिजिटल निगरानी
सरकार ने खेती की निगरानी के लिए कई कड़े प्रावधान किए हैं। खेती क्षेत्र, गोदाम और अन्य निर्धारित परिसरों में सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा व्यवस्था और रिकॉर्ड संधारण अनिवार्य रहेगा। फसल कटाई से कम से कम 21 दिन पहले संबंधित अधिकारियों को सूचना देनी होगी। कटाई के दौरान हरे और सूखे वनस्पति पदार्थ का अलग-अलग वजन दर्ज किया जाएगा। किसानों को प्रतिदिन पौधों की संख्या, उत्पादन और भंडारण का रिकॉर्ड रखना होगा, जिसे निरीक्षण के समय अधिकारियों को दिखाना पड़ेगा। विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, अस्पतालों और उद्योगों को भी निर्धारित शर्तों के तहत अनुसंधान की अनुमति दी जाएगी।

जीपीएस आधारित होगी निगरानी, जियो टैगिंग भी होगी
भांग की खेती की निगरानी जीपीएस आधारित होगी। इसकी जियो टैगिंग भी होगी। भांग की खेती केवल सरकार की ओर से अधिसूचित क्षेत्रों में ही की जा सकेगी। खुले खेतों में इसकी खेती की अनुमति नहीं होगी। खेती बंद एवं सुरक्षित परिसर, ग्रीन हाउस या पॉलीहाउस के भीतर ही करनी होगी। खेती स्थल का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा ताकि हर चरण की निगरानी की जा सके। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे, चारदीवारी, प्रवेश और निकास का रिकॉर्ड तथा प्रत्येक गतिविधि का दस्तावेजीकरण भी जरूरी होगा। खेती के लिए आवेदन कृषि विभाग के जिला नोडल अधिकारी के माध्यम से किया जाएगा, जबकि लाइसेंस जारी करने की जिम्मेदारी आबकारी विभाग की होगी। 

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