संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन ने आरोप लगाया कि ड्यूटी के दौरान मंडी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मौत और महीनों से उनका रुका वेतन सरकार की लापरवाही है। सीटू से संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने इसके विरोध में चिड़गांव में रोष प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान सीटू जिला शिमला के उपाध्यक्ष सुनील मेहता और राज्य उपाध्यक्ष अजय दुलटा ने कहा कि मंडी के टारना वृत्त में 22 दिसंबर को पल्स पोलियो अभियान की ड्यूटी के दौरान गिरने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हर्षा की मौत हुई। आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन (संबद्ध सीटू) ने इस घटना को सरकार की असंवेदनशीलता, विभागीय लापरवाही बताया। कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से अत्यंत कम मानदेय पर पल्स पोलियो, बीएलओ ड्यूटी, फेस ट्रैकिंग, हाउस-टू-हाउस सर्वे जैसे जोखिमपूर्ण कार्य करवाए जाते हैं, लेकिन दुर्घटना या मृत्यु होने पर सरकार जिम्मेदारी लेने से बचती है। साथ ही कहा कि पिछले चार महीनों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का लंबित केंद्र का वेतन और दिसंबर का राज्य का वेतन तुरंत जारी किया जाए। भविष्य में वेतन एकमुश्त और समय पर दिया जाए। सुनील मेहता ने बताया कि 12 फरवरी को प्रस्तावित अखिल भारतीय आम हड़ताल के तहत प्रदेशभर में आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। 19 जनवरी को जिला शिमला में होने वाले किसान-मजदूर संयुक्त प्रदर्शन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भाग लेंगी। यदि सरकार ने इन मांगों पर तुरंत निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेश भर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आंदोलन तेज करेंगी। इस दौरान चिड़गांव सर्कल की महासचिव राजकुमारी, धमवाड़ी सर्किल की प्रधान कैलाश, सदासु सर्किल की महासचिव रंजीत, मिनी आंगनबाड़ी की प्रधान गीता और प्रोजेक्ट छौहारा की प्रधान रमिता मेहता ने भाग लिया।

चिड़गांव में विरोध प्रर्दशन के बाद ज्ञापन सौंपते आंगनबाड़ी कार्यकर्ता। संवाद