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Rampur Bushahar News: दीवारों के अंदर योजना हवा, धरातल पर नहीं फल मंडी

Sun, 02 Aug 2026 11:49 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Aug 2026 11:49 PM IST
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Construction of the Ani fruit and vegetable market building has been stalled for five years
आनी के किरण बाजार में 10 बीघा भूमि पर प्रस्तावित है सब्जी मंडी का निर्माण। संवाद
नींव से आगे लटकी योजना, धरातल पर नहीं उतरी फल मंडी
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आनी फल एवं सब्जी मंडी के भवन का निर्माण पांच साल से अधर में
करोड़ों की योजना पर नहीं बढ़े एपीएमसी के कदम, नींव बनाने तक सिमटा कार्य
किरण बाजार में 10 बीघा भूमि पर मंडी के निर्माण को 6 करोड़ रुपये प्रस्तावित
हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)। उपमंडल मुख्यालय आनी में प्रस्तावित आधुनिक फल एवं सब्जी मंडी भवन का निर्माण पिछले पांच साल से अधर में है। करोड़ों रुपये की इस योजना के लिए भूमि, बजट और प्रारंभिक विकास कार्य पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद मंडी के नाम पर खड्ड के किनारे केवल चारों तरफ सुरक्षा दीवारों का ही निर्माण हुआ है। इसके आगे योजना लटक गई है। आज दिन तक फल मंडी के धरातल पर नहीं उतरने से दीवारों के अंदर योजना हवा होती दिखाई दे रही है। वहीं, भवन का निर्माण शुरू न होने से क्षेत्र के किसान और बागवान निराश हैं। किरण बाजार क्षेत्र में लगभग 10 बीघा भूमि एपीएमसी के नाम दर्ज हो चुकी है। इस आधुनिक मंडी परिसर के निर्माण पर करीब 6 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। योजना के तहत भूमि समतलीकरण, चारदीवारी और अन्य प्रारंभिक आधारभूत कार्यों के लिए करीब एक करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था। यह कार्य भी पूरा हो चुका है। इसके बावजूद सब्जी मंडी भवन का निर्माण आज तक शुरू नहीं हो पाया है। किसानों को वर्षों से इस मंडी का इंतजार है। इस देरी से स्थानीय कृषि उत्पादों के विपणन पर भी असर पड़ रहा है। पूर्व एपीएमसी अध्यक्ष अमर ठाकुर ने बताया कि उनके कार्यकाल में वन विभाग से भूमि संबंधी मंजूरियां हासिल करने के काफी प्रयास किए गए थे। इस मंडी का निर्माण किसानों को आधुनिक विपणन सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से किया जा रहा था। इसका लक्ष्य था कि उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए दूर की मंडियों पर निर्भर न रहना पड़े। प्रस्तावित परिसर में किसान भवन, सामुदायिक हॉल, व्यापारिक दुकानें और गेस्ट हाउस जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जानी थीं। यह मंडी सेब सहित अन्य फल एवं कृषि उत्पादों के विपणन का भी प्रमुख केंद्र बन सकती थी।

बागवानों को अतिरिक्त परिवहन खर्च उठाना पड़ रहा

आनी क्षेत्र हिमाचल के प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यहां से हर वर्ष सेब की लाखों पेटियों सहित अन्य कृषि उत्पाद विभिन्न मंडियों में भेजे जाते हैं। स्थानीय मंडी सुविधा उपलब्ध न होने के कारण किसानों-बागवानों को अतिरिक्त परिवहन खर्च उठाना पड़ता है। विपणन में भी कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वर्षों से घर द्वार पर सब्जी मंडी की सुविधा मिलने के इंतजार में बैठे किसान मायूस हैं। इस परियोजना से आनी के अलावा मंडी और शिमला जिलों के किसानों-बागवानों को भी सीधा लाभ मिलना था।
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सरकार के बदली, योजना बढ़ी धीमी

कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति के पूर्व एपीएमसी अध्यक्ष अमर ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार के बदलने के बाद इस परियोजना की गति थम गई है। यदि निर्माण कार्य समय पर आगे बढ़ता, तो अभी तक मंडी भवन बनकर तैयार हो चुका होता।
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आनी में फल एवं सब्जी मंडी के लिए करीब 10 बीघा भूमि विभाग के नाम दर्ज हो चुकी है। यहां सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त स्थायी मंडी परिसर विकसित किया जाएगा। इसके लिए विस्तृत प्राक्कलन तैयार कर हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। -- दीक्षित, सचिव, एपीएमसी कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति

आनी के किरण बाजार में 10 बीघा भूमि पर प्रस्तावित है सब्जी मंडी का निर्माण। संवाद

आनी के किरण बाजार में 10 बीघा भूमि पर प्रस्तावित है सब्जी मंडी का निर्माण। संवाद

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