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किन्नौर दुर्घटना: दो साल की बच्ची की मौत पर 7.77 लाख रुपये मुआवजे का आदेश
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किन्नौर दुर्घटना: दो साल की बच्ची की मौत पर 7.77 लाख रुपये मुआवजे का आदेश. मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण किन्नौर ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण किन्नौर ने एक सड़क दुर्घटना में दो साल की बच्ची की मौत के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायाधिकरण ने याचिकाकर्ताओं को 7.77 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मुआवजा बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर जमा करना होगा। यह दुर्घटना 11 अगस्त 2021 को राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) -5 पर निगुलसारी के पास हुई थी। इसमें वाहन चालक कमलेश की लापरवाही को मौत का कारण माना गया। चालक ने वाहन को भूस्खलन संभावित क्षेत्र में असुरक्षित रूप से खड़ा किया था। इस दुर्घटना में वंशिका के साथ उसकी दादी और चालक की भी मौत हो गई थी। याचिकाकर्ता माता-पिता ने अपनी बेटी की मौत के लिए मुआवजे की मांग की थी। बीमा कंपनी और चालक के कानूनी वारिसों ने इसे दैवी कृत्य बताया था। हालांकि, न्यायाधिकरण ने चालक की लापरवाही को सिद्ध पाया। न्यायाधिकरण ने पाया कि वाहन दुर्घटना के समय बीमाकृत था और चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था।न्यायाधिकरण ने उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए मुआवजा तय किया। इस आधार पर कुल 7.77 लाख रुपये का मुआवजा तय हुआ। बीमा कंपनी ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाए थे। कंपनी ने दुर्घटना को दैवी कृत्य'' बताया था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि वाहन बीमा पॉलिसी के नियमों का उल्लंघन कर चलाया जा रहा था। हालांकि, न्यायाधिकरण ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। न्यायाधिकरण ने पाया कि वाहन का बीमा वैध था और चालक के पास लाइसेंस भी था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण किन्नौर ने एक सड़क दुर्घटना में दो साल की बच्ची की मौत के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायाधिकरण ने याचिकाकर्ताओं को 7.77 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मुआवजा बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर जमा करना होगा। यह दुर्घटना 11 अगस्त 2021 को राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) -5 पर निगुलसारी के पास हुई थी। इसमें वाहन चालक कमलेश की लापरवाही को मौत का कारण माना गया। चालक ने वाहन को भूस्खलन संभावित क्षेत्र में असुरक्षित रूप से खड़ा किया था। इस दुर्घटना में वंशिका के साथ उसकी दादी और चालक की भी मौत हो गई थी। याचिकाकर्ता माता-पिता ने अपनी बेटी की मौत के लिए मुआवजे की मांग की थी। बीमा कंपनी और चालक के कानूनी वारिसों ने इसे दैवी कृत्य बताया था। हालांकि, न्यायाधिकरण ने चालक की लापरवाही को सिद्ध पाया। न्यायाधिकरण ने पाया कि वाहन दुर्घटना के समय बीमाकृत था और चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था।न्यायाधिकरण ने उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए मुआवजा तय किया। इस आधार पर कुल 7.77 लाख रुपये का मुआवजा तय हुआ। बीमा कंपनी ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाए थे। कंपनी ने दुर्घटना को दैवी कृत्य'' बताया था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि वाहन बीमा पॉलिसी के नियमों का उल्लंघन कर चलाया जा रहा था। हालांकि, न्यायाधिकरण ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। न्यायाधिकरण ने पाया कि वाहन का बीमा वैध था और चालक के पास लाइसेंस भी था।