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Rampur Bushahar News: कांग्रेस खींच ले गई सत्ता के घोड़े की लगाम, फीकी पड़ी भाजपा की धाम
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पंचायत समिति चिड़गांव : आठ समर्थित सदस्य होने के बाद भी भाजपा नहीं बना पाई अपना अध्यक्ष
. भाजपा के किले में कांग्रेस की सेंध, रातभर चली काली भेड़ की तलाश
. भाजपा को था जीत का भरोसा, समर्थकों के लिए कर रात्रि भोज इंतजाम
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू।
कांग्रेस खींच ले गई सत्ता के घोड़े की लगाम, फीकी पड़ी भाजपा की धाम। ऐसा सियासी खेल पंचायत समिति चिड़गांव में हुआ। पंचायत समिति चिड़गांव के अध्यक्ष पद के चुनाव में एक वोट ने ऐसा राजनीतिक खेल कर दिया कि जीत का जश्न मनाने की तैयारी कर चुकी भाजपा के अरमान धरे के धरे रह गए। जिस जीत को भाजपा पक्का मानकर चल रही थी, वहीं कांग्रेस ने पंचायत समिति के उसके अभेद्य माने जा रहे वोट बैंक में सेंध लगाकर अध्यक्ष पद पर कब्जा जमा लिया। नतीजों के बाद भाजपा खेमे में मायूसी छा गई, जबकि संख्या बल में कमजोर होने के बावजूद कांग्रेस समर्थक देर रात तक जीत का जश्न मनाते रहे। वीरवार को पंचायत समिति के 15 सदस्यों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए मतदान किया। अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने दलीप सिंह नेगी पर दांव खेला था, जबकि कांग्रेस समर्थित उत्तम ठाकुर मैदान में थे। मतगणना के दौरान जैसे ही परिणाम सामने आए, राजनीतिक समीकरण उलट गए। उत्तम ठाकुर को आठ मत मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार दलीप सिंह नेगी सात वोटों पर ही सिमट गए। इसके साथ ही उत्तम ठाकुर पंचायत समिति चिड़गांव के अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किए गए। उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा ने वापसी करते हुए अपनी उम्मीदवार निशा देवी को जीत दिलाई। निशा देवी को आठ और कांग्रेस समर्थित रेणु को सात मत मिले। इस तरह उपाध्यक्ष पद भाजपा के खाते में गया। दिलचस्प बात यह है कि पंचायत समिति में भाजपा समर्थक आठ सदस्य चुने गए थे, जबकि कांग्रेस के पास केवल चार सदस्य थे। ऐसे में भाजपा को दोनों पदों पर जीत का पूरा भरोसा था। जीत की खुशी में समर्थकों के लिए मांदली के एक रेस्तरां में रात्रि भोज तक का इंतजाम कर लिया गया था, लेकिन परिणामों ने सारा गणित बिगाड़ दिया। अध्यक्ष पद पर मिली अप्रत्याशित हार के बाद भाजपा खेमे में देर रात तक आत्ममंथन चलता रहा। सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि आठ सदस्यों के बावजूद एक वोट आखिर किस ओर चला गया। पार्टी के भीतर काली भेड़ की तलाश और क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। उधर, कम संख्या में होने के बावजूद अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने से उत्साहित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे रणनीति और एकजुटता की जीत बताते हुए जमकर जश्न मनाया। चिड़गांव पंचायत समिति का यह चुनाव अब पूरे क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का सबसे गर्म विषय बन गया है।
. भाजपा के किले में कांग्रेस की सेंध, रातभर चली काली भेड़ की तलाश
. भाजपा को था जीत का भरोसा, समर्थकों के लिए कर रात्रि भोज इंतजाम
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू।
कांग्रेस खींच ले गई सत्ता के घोड़े की लगाम, फीकी पड़ी भाजपा की धाम। ऐसा सियासी खेल पंचायत समिति चिड़गांव में हुआ। पंचायत समिति चिड़गांव के अध्यक्ष पद के चुनाव में एक वोट ने ऐसा राजनीतिक खेल कर दिया कि जीत का जश्न मनाने की तैयारी कर चुकी भाजपा के अरमान धरे के धरे रह गए। जिस जीत को भाजपा पक्का मानकर चल रही थी, वहीं कांग्रेस ने पंचायत समिति के उसके अभेद्य माने जा रहे वोट बैंक में सेंध लगाकर अध्यक्ष पद पर कब्जा जमा लिया। नतीजों के बाद भाजपा खेमे में मायूसी छा गई, जबकि संख्या बल में कमजोर होने के बावजूद कांग्रेस समर्थक देर रात तक जीत का जश्न मनाते रहे। वीरवार को पंचायत समिति के 15 सदस्यों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए मतदान किया। अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने दलीप सिंह नेगी पर दांव खेला था, जबकि कांग्रेस समर्थित उत्तम ठाकुर मैदान में थे। मतगणना के दौरान जैसे ही परिणाम सामने आए, राजनीतिक समीकरण उलट गए। उत्तम ठाकुर को आठ मत मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार दलीप सिंह नेगी सात वोटों पर ही सिमट गए। इसके साथ ही उत्तम ठाकुर पंचायत समिति चिड़गांव के अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किए गए। उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा ने वापसी करते हुए अपनी उम्मीदवार निशा देवी को जीत दिलाई। निशा देवी को आठ और कांग्रेस समर्थित रेणु को सात मत मिले। इस तरह उपाध्यक्ष पद भाजपा के खाते में गया। दिलचस्प बात यह है कि पंचायत समिति में भाजपा समर्थक आठ सदस्य चुने गए थे, जबकि कांग्रेस के पास केवल चार सदस्य थे। ऐसे में भाजपा को दोनों पदों पर जीत का पूरा भरोसा था। जीत की खुशी में समर्थकों के लिए मांदली के एक रेस्तरां में रात्रि भोज तक का इंतजाम कर लिया गया था, लेकिन परिणामों ने सारा गणित बिगाड़ दिया। अध्यक्ष पद पर मिली अप्रत्याशित हार के बाद भाजपा खेमे में देर रात तक आत्ममंथन चलता रहा। सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि आठ सदस्यों के बावजूद एक वोट आखिर किस ओर चला गया। पार्टी के भीतर काली भेड़ की तलाश और क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। उधर, कम संख्या में होने के बावजूद अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाने से उत्साहित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे रणनीति और एकजुटता की जीत बताते हुए जमकर जश्न मनाया। चिड़गांव पंचायत समिति का यह चुनाव अब पूरे क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का सबसे गर्म विषय बन गया है।