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Rampur Bushahar News: स्पीति में 21 युवाओं ने जाना सैनिकों का जीवन और कर्तव्य
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स्पीति में विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत हथियारों की जानकारी लेते युवा। संवाद
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स्पीति में 21 युवाओं ने जाना सैनिकों का जीवन और कर्तव्य. वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत स्पीति घाटी के सीमावर्ती गांवों का किया भ्रमण
संवाद न्यूज एजेंसी
काजा (लाहौल-स्पीति)।
भारत सरकार के विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत देशभर के 21 युवाओं ने स्पीति घाटी के सीमावर्ती गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों के जीवन और कर्तव्यों को करीब से जाना। काजा स्थित आईटीबीपी बेस कैंप में युवाओं को सीमा सुरक्षा में तैनात जवानों की चुनौतियों की जानकारी मिली। आईटीबीपी अधिकारियों ने हथियारों का प्रदर्शन किया, जिससे सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली समझ में आई। प्रतिभागियों और जवानों के बीच एक मैत्रीपूर्ण वॉलीबॉल मैच भी हुआ। इस मैच ने आपसी सहयोग और टीम भावना को बढ़ावा दिया। युवाओं ने डीएफओ गोल्डी छाबड़ा से स्पीति की वनस्पतियों और जीव-जंतुओं पर संवाद किया। उन्हें जैव विविधता संरक्षण और सतत पर्यावरणीय प्रथाओं का महत्व समझाया गया। यह दल स्पीति के गियु, हुरलिंग, लालुंग और काजा खास जैसे सीमावर्ती गांवों का भी भ्रमण करेगा। युवाओं ने प्रसिद्ध कीह मॉनेस्ट्री का भी भ्रमण किया। यह स्पीति क्षेत्र के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में से एक है। इस भ्रमण से उन्हें घाटी की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत जानने का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने एशिया के सबसे ऊंचे सस्पेंशन पुल, चिचम पुल का दौरा किया। पर्वतों के मनमोहक दृश्यों ने युवाओं में रोमांच और उत्साह भर दिया।
संवाद न्यूज एजेंसी
काजा (लाहौल-स्पीति)।
भारत सरकार के विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत देशभर के 21 युवाओं ने स्पीति घाटी के सीमावर्ती गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों के जीवन और कर्तव्यों को करीब से जाना। काजा स्थित आईटीबीपी बेस कैंप में युवाओं को सीमा सुरक्षा में तैनात जवानों की चुनौतियों की जानकारी मिली। आईटीबीपी अधिकारियों ने हथियारों का प्रदर्शन किया, जिससे सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली समझ में आई। प्रतिभागियों और जवानों के बीच एक मैत्रीपूर्ण वॉलीबॉल मैच भी हुआ। इस मैच ने आपसी सहयोग और टीम भावना को बढ़ावा दिया। युवाओं ने डीएफओ गोल्डी छाबड़ा से स्पीति की वनस्पतियों और जीव-जंतुओं पर संवाद किया। उन्हें जैव विविधता संरक्षण और सतत पर्यावरणीय प्रथाओं का महत्व समझाया गया। यह दल स्पीति के गियु, हुरलिंग, लालुंग और काजा खास जैसे सीमावर्ती गांवों का भी भ्रमण करेगा। युवाओं ने प्रसिद्ध कीह मॉनेस्ट्री का भी भ्रमण किया। यह स्पीति क्षेत्र के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में से एक है। इस भ्रमण से उन्हें घाटी की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत जानने का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने एशिया के सबसे ऊंचे सस्पेंशन पुल, चिचम पुल का दौरा किया। पर्वतों के मनमोहक दृश्यों ने युवाओं में रोमांच और उत्साह भर दिया।