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Himachal: चार नए मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ चिकित्सकों का अब कॉमन काडर, सरकार ने लागू की नई व्यवस्था

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 01 Apr 2026 05:00 AM IST
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सार

सभी नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों जैसे डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन, नेरचौक, हमीरपुर और चंबा मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की तैनाती एक समान नीति के तहत होगी।

Recruitment for Professors and Associate Professors in Medical Colleges Will Now Be Conducted Through a Common
मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भर्ती। - फोटो : Freepik
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विस्तार

हिमाचल सरकार ने प्रदेश के चार नए मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ चिकित्सकों का अब कॉमन काडर बनाने का फैसला लिया है। नाहन, नेरचौक, हमीरपुर और चंबा मेडिकल कॉलेज के लिए की यह नई व्यवस्था की गई है। इन कॉलेजों में नियुक्त प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर अब इन चार कॉलेजों में ट्रांसफर हो सकेंगे। कॉमन काडर सिस्टम के तहत ही चिकित्सकों की नई भर्ती भी होगी। आईजीएमसी, एम्स चमियाना और टांडा मेडिकल कॉलेज में इनके तबादले नहीं होंगे। राज्य सरकार ने मंगलवार को मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा शर्तों में एकरूपता लाने के लिए कॉमन काडर सिस्टम लागू करने की अधिसूचना जारी की है।

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चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने प्रदेश के नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए यह फैसला लिया है। अधिसूचना के अनुसार प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों को मिलाकर एक कॉमन कैडर बनाया गया है। भविष्य में इन कॉलेजों में होने वाली सभी नियुक्तियां और पदोन्नतियां इसी प्रणाली के तहत होंगी। सरकार ने पहले से कार्यरत फैकल्टी को राहत देते हुए उनके पदोन्नति अधिकार सुरक्षित रखे हैं। मौजूदा स्टाफ अपने-अपने संस्थान के कैडर में ही पदोन्नति प्राप्त करेगा, बशर्ते रिक्तियां उपलब्ध हों। वहीं, नई भर्ती और पदोन्नति कोटा से आने वाले सभी कर्मियों पर कॉमन कैडर सिस्टम पूरी तरह लागू रहेगा। विशेषज्ञ मेडिकल अधिकारियों को दो महीने के भीतर अपना विकल्प देना होगा।

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वे चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर बनना चाहते हैं या स्वास्थ्य सेवा निदेशालय में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्य करना चाहते हैं, इसका चयन करना होगा। एक बार दिया गया विकल्प अंतिम और बाध्यकारी होगा। रिक्तियों की गणना के लिए हर वर्ष 1 जनवरी को कट-ऑफ तिथि तय की गई है। भविष्य में आईजीएमसी शिमला, टांडा और चमियाना की रिक्तियों को भी नए मेडिकल कॉलेजों के साथ जोड़कर भर्ती प्रक्रिया चलाई जाएगी। इसके अलावा सभी आवेदन केवल उचित माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। भविष्य की नियुक्तियां हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जाएंगी। मेडिकल ऑफिसर (स्पेशलिस्ट) जिनके पास पीजी डिग्री व तीन वर्ष का शिक्षण अनुभव है, उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नति के लिए विकल्प देने होंगे। यह विकल्प डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) या डीएचएस काडर में शामिल होने के लिए होगा। एक बार दिया गया विकल्प अंतिम माना जाएगा।

पदोन्नति के बाद खाली रहने वाले पद सीधी भर्ती से भरेंगे
- प्रदेश सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो पद खाली रह जाएंगे, उन्हें ट्रांसफर, डेपुटेशन या सीधी भर्ती के माध्यम से भरा जाएगा। आईजीएमसी शिमला, चमियाना और टांडा मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों के मौजूदा फैकल्टी सदस्यों के पदोन्नति अधिकार उनके वर्तमान काडर में सुरक्षित रहेंगे।

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