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Sirmour News: जिले में 28 पात्र व्यक्तियों को वन अधिकार अधिनियम के तहत मिला लाभ
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। वन क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को उनके अधिकार दिलाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से लागू किए जा रहे वन अधिकार अधिनियम, 2006 का असर अब सिरमौर जिले में साफ दिखाई देने लगा है। जिले में अब तक 28 पात्र व्यक्तियों को वन अधिकार अधिनियम के तहत भूमि एवं अन्य अधिकार प्रदान किए जा चुके हैं। इससे वर्षों से भूमि के कानूनी अधिकार से वंचित परिवारों को न केवल सुरक्षा मिली है, बल्कि उनके जीवन में आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई उम्मीद भी जगी है।
ग्राम कलोग निवासी गुलाब सिंह बताते हैं कि उनका परिवार करीब चार पीढ़ियों से एक ही स्थान पर रह रहा था, लेकिन भूमि पर कानूनी अधिकार नहीं होने से हमेशा बेदखली का डर बना रहता था। उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की भी चिंता सताती थी। अब भूमि का अधिकार मिलने से परिवार को स्थायित्व मिला है। गुलाब सिंह ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2005 से पहले से वन भूमि पर खेती-बाड़ी कर रहे पात्र परिवारों को अधिकार देकर उनके भविष्य को सुरक्षित करने का काम किया है।
शिलाई क्षेत्र की बिनता देवी के परिवार के पास अपनी कोई जमीन नहीं थी। वन अधिकार अधिनियम के तहत उन्हें चार बीघा भूमि का अधिकार मिला है। बिनता देवी कहती हैं कि अब उनका परिवार अपनी जमीन पर खेती कर सकेगा और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा। ग्राम पंचायत नैनीधार के गांव कलोग की मस्तो वर्मा के लिए भूमि का पट्टा जीवन की बड़ी उपलब्धि साबित हुआ है। वह बताती हैं कि अपनी जमीन न होने से हमेशा असुरक्षा की भावना बनी रहती थी और बेटी के भविष्य की चिंता सताती थी। अब भूमि का अधिकार मिलने से परिवार को स्थायी आधार और सुरक्षा का भरोसा मिला है।
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64 वर्षीय तुलसी राम के परिवार के पास पिछले तीन पीढ़ियों से अपनी भूमि नहीं थी। वन अधिकार अधिनियम के तहत उन्हें नौ बीघा भूमि का पट्टा मिला है। तुलसी राम का कहना है कि अब वह अपनी जमीन पर खेती करने के साथ जरूरत पड़ने पर मकान भी बना सकेंगे। इससे परिवार को नई दिशा और भविष्य के प्रति विश्वास मिला है। प्रशासन के अनुसार सरकार की ओर से पात्र व्यक्तियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए जागरूकता गतिविधियां बढ़ाई जा रही हैं और दावों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष बल दिया जा रहा है।
शिलाई (सिरमौर)। वन क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को उनके अधिकार दिलाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से लागू किए जा रहे वन अधिकार अधिनियम, 2006 का असर अब सिरमौर जिले में साफ दिखाई देने लगा है। जिले में अब तक 28 पात्र व्यक्तियों को वन अधिकार अधिनियम के तहत भूमि एवं अन्य अधिकार प्रदान किए जा चुके हैं। इससे वर्षों से भूमि के कानूनी अधिकार से वंचित परिवारों को न केवल सुरक्षा मिली है, बल्कि उनके जीवन में आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई उम्मीद भी जगी है।
ग्राम कलोग निवासी गुलाब सिंह बताते हैं कि उनका परिवार करीब चार पीढ़ियों से एक ही स्थान पर रह रहा था, लेकिन भूमि पर कानूनी अधिकार नहीं होने से हमेशा बेदखली का डर बना रहता था। उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की भी चिंता सताती थी। अब भूमि का अधिकार मिलने से परिवार को स्थायित्व मिला है। गुलाब सिंह ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2005 से पहले से वन भूमि पर खेती-बाड़ी कर रहे पात्र परिवारों को अधिकार देकर उनके भविष्य को सुरक्षित करने का काम किया है।
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शिलाई क्षेत्र की बिनता देवी के परिवार के पास अपनी कोई जमीन नहीं थी। वन अधिकार अधिनियम के तहत उन्हें चार बीघा भूमि का अधिकार मिला है। बिनता देवी कहती हैं कि अब उनका परिवार अपनी जमीन पर खेती कर सकेगा और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा। ग्राम पंचायत नैनीधार के गांव कलोग की मस्तो वर्मा के लिए भूमि का पट्टा जीवन की बड़ी उपलब्धि साबित हुआ है। वह बताती हैं कि अपनी जमीन न होने से हमेशा असुरक्षा की भावना बनी रहती थी और बेटी के भविष्य की चिंता सताती थी। अब भूमि का अधिकार मिलने से परिवार को स्थायी आधार और सुरक्षा का भरोसा मिला है।
64 वर्षीय तुलसी राम के परिवार के पास पिछले तीन पीढ़ियों से अपनी भूमि नहीं थी। वन अधिकार अधिनियम के तहत उन्हें नौ बीघा भूमि का पट्टा मिला है। तुलसी राम का कहना है कि अब वह अपनी जमीन पर खेती करने के साथ जरूरत पड़ने पर मकान भी बना सकेंगे। इससे परिवार को नई दिशा और भविष्य के प्रति विश्वास मिला है। प्रशासन के अनुसार सरकार की ओर से पात्र व्यक्तियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए जागरूकता गतिविधियां बढ़ाई जा रही हैं और दावों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष बल दिया जा रहा है।