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Sirmour News: अदालत 2
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दूसरी पत्नी के रहते पहली पत्नी को 10 हजार
रुपये मासिक भरण-पोषण देने का आदेश
- जेएमएफसी का फैसला, दूसरी शादी और घरेलू हिंसा के आरोप, पत्नी को घर से निकालने का दावा
- जिले के तहसील शिलाई क्षेत्र का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जिले के शिलाई क्षेत्र में घरेलू हिंसा और उपेक्षा के मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए पति को पत्नी को हर महीने 10 हजार रुपये अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर की अदालत ने सुनाया।
यह मामला कांता देवी बनाम बुध राम के बीच का है। पत्नी ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उसकी शादी हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी और चार बच्चे भी हैं, जो अब वयस्क हो चुके हैं। आरोप है कि पति ने वर्ष 2022 में दूसरी शादी कर ली और उसके बाद पत्नी की अनदेखी शुरू कर दी। पीड़िता ने यह भी बताया कि अप्रैल 2025 में पति ने शराब के नशे में उसके साथ मारपीट की और घर से निकाल दिया। इसके बाद वह अपने मायके में रहने को मजबूर हो गई।
वहीं, पति ने अदालत में इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि दूसरी शादी पत्नी की सहमति से हुई थी और वह अब भी उसका पालन-पोषण कर रहा है। उसने अपनी आय करीब 74 हजार रुपये मासिक बताई और विभिन्न ऋणों का हवाला देकर भरण-पोषण देने में असमर्थता जताई।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि पत्नी की ओर से लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया घरेलू हिंसा और उपेक्षा के तत्व नजर आते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरी शादी के बावजूद पत्नी भरण-पोषण की हकदार है। न्यायालय ने आदेश में कहा कि पति की आय और परिस्थितियों को देखते हुए पत्नी को सम्मानजनक जीवन के लिए अंतरिम भरण-पोषण मिलना जरूरी है। इसी आधार पर 10 हजार रुपये प्रतिमाह देने का निर्देश दिया गया है, जो मुख्य याचिका दायर होने की तारीख से लागू होगा।
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रुपये मासिक भरण-पोषण देने का आदेश
- जेएमएफसी का फैसला, दूसरी शादी और घरेलू हिंसा के आरोप, पत्नी को घर से निकालने का दावा
- जिले के तहसील शिलाई क्षेत्र का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जिले के शिलाई क्षेत्र में घरेलू हिंसा और उपेक्षा के मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए पति को पत्नी को हर महीने 10 हजार रुपये अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर की अदालत ने सुनाया।
यह मामला कांता देवी बनाम बुध राम के बीच का है। पत्नी ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उसकी शादी हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी और चार बच्चे भी हैं, जो अब वयस्क हो चुके हैं। आरोप है कि पति ने वर्ष 2022 में दूसरी शादी कर ली और उसके बाद पत्नी की अनदेखी शुरू कर दी। पीड़िता ने यह भी बताया कि अप्रैल 2025 में पति ने शराब के नशे में उसके साथ मारपीट की और घर से निकाल दिया। इसके बाद वह अपने मायके में रहने को मजबूर हो गई।
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वहीं, पति ने अदालत में इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि दूसरी शादी पत्नी की सहमति से हुई थी और वह अब भी उसका पालन-पोषण कर रहा है। उसने अपनी आय करीब 74 हजार रुपये मासिक बताई और विभिन्न ऋणों का हवाला देकर भरण-पोषण देने में असमर्थता जताई।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि पत्नी की ओर से लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया घरेलू हिंसा और उपेक्षा के तत्व नजर आते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरी शादी के बावजूद पत्नी भरण-पोषण की हकदार है। न्यायालय ने आदेश में कहा कि पति की आय और परिस्थितियों को देखते हुए पत्नी को सम्मानजनक जीवन के लिए अंतरिम भरण-पोषण मिलना जरूरी है। इसी आधार पर 10 हजार रुपये प्रतिमाह देने का निर्देश दिया गया है, जो मुख्य याचिका दायर होने की तारीख से लागू होगा।
