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Sirmour News: अदालत 4
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चेक बाउंस का आरोपी दोषी करार, 6
माह सजा और 10 लाख रुपये जुर्माना
साल 2023 का मामला, दोषी ने शिकायतकर्ता से उधार ली थी 8.50 लाख की रकम
मुआवजा अदा न करने पर दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में संगड़ाह निवासी संजय कुमार को दोषी ठहराते हुए छह महीने के कारावास और 10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़ित को मुआवजा अदा न करने पर दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उपासना शर्मा ने यह फैसला सुनाया।
शिकायतकर्ता गुमान सिंह ने अदालत को बताया कि आरोपी से उनके पुराने संबंध थे। इसी विश्वास के आधार पर अगस्त 2019 में आरोपी ने उनसे 8.50 लाख रुपये उधार लिए थे। रकम को दो महीने में लौटाने के लिए आरोपी ने एक चेक दिया था लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर चेक खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया।
कानूनी नोटिस देने के बावजूद आरोपी ने कोई रकम नहीं लौटाई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई। अदालत ने फैसले में कहा कि चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार करने के बाद आरोपी की जिम्मेदारी बनती है कि वह भुगतान करे। बिना ठोस साक्ष्य के दी गई सफाई स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा और शिकायतकर्ता ने मामले को संदेह से परे सिद्ध किया।
संवाद
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साल 2023 का मामला, दोषी ने शिकायतकर्ता से उधार ली थी 8.50 लाख की रकम
मुआवजा अदा न करने पर दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में संगड़ाह निवासी संजय कुमार को दोषी ठहराते हुए छह महीने के कारावास और 10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़ित को मुआवजा अदा न करने पर दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उपासना शर्मा ने यह फैसला सुनाया।
शिकायतकर्ता गुमान सिंह ने अदालत को बताया कि आरोपी से उनके पुराने संबंध थे। इसी विश्वास के आधार पर अगस्त 2019 में आरोपी ने उनसे 8.50 लाख रुपये उधार लिए थे। रकम को दो महीने में लौटाने के लिए आरोपी ने एक चेक दिया था लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर चेक खाते में अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया।
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कानूनी नोटिस देने के बावजूद आरोपी ने कोई रकम नहीं लौटाई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई। अदालत ने फैसले में कहा कि चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार करने के बाद आरोपी की जिम्मेदारी बनती है कि वह भुगतान करे। बिना ठोस साक्ष्य के दी गई सफाई स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा और शिकायतकर्ता ने मामले को संदेह से परे सिद्ध किया।
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