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Sirmour News: अदालत 5
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चेक बाउंस मामले में कर्मचारी दोषी करार
6 माह कैद की सजा, 10 लाख का जुर्माना
- साल 2022 का मामला, दोषी ने घरेलू जरूरतों के लिए शिकायतकर्ता से उधार लिए थे 6 लाख रुपये
- मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उपासना शर्मा ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस के एक मामले में अदालत ने तहसील राजगढ़ निवासी जगदीश कुमार को दोषी ठहराते हुए छह महीने के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़ित को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उपासना शर्मा ने यह फैसला सुनाया। मुआवजा न देने की स्थिति में दोषी को 15 दिनों का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोषी व्यक्ति एक सरकारी विभाग में तैनात है।
यह मामला साल 2022 का है। तहसील संगड़ाह निवासी शिकायतकर्ता मस्त राम ने अदालत को बताया कि जगदीश कुमार ने अक्तूबर महीने में घरेलू जरूरतों के लिए 6 लाख रुपये उधार लिए थे। आरोपी ने दो महीने में रकम लौटाने का वचन दिया था, लेकिन आरोपी राशि का भुगतान करने में विफल रहा। दिसंबर 2022 में आरोपी ने उक्त राशि चुकाने के लिए एक चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर हस्ताक्षर भिन्न होने के कारण बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस देने के बावजूद आरोपी ने न तो रकम लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई। अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपी अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा और शिकायतकर्ता ने मामले को संदेह से परे सिद्ध किया।
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- साल 2022 का मामला, दोषी ने घरेलू जरूरतों के लिए शिकायतकर्ता से उधार लिए थे 6 लाख रुपये
- मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उपासना शर्मा ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस के एक मामले में अदालत ने तहसील राजगढ़ निवासी जगदीश कुमार को दोषी ठहराते हुए छह महीने के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़ित को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उपासना शर्मा ने यह फैसला सुनाया। मुआवजा न देने की स्थिति में दोषी को 15 दिनों का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोषी व्यक्ति एक सरकारी विभाग में तैनात है।
यह मामला साल 2022 का है। तहसील संगड़ाह निवासी शिकायतकर्ता मस्त राम ने अदालत को बताया कि जगदीश कुमार ने अक्तूबर महीने में घरेलू जरूरतों के लिए 6 लाख रुपये उधार लिए थे। आरोपी ने दो महीने में रकम लौटाने का वचन दिया था, लेकिन आरोपी राशि का भुगतान करने में विफल रहा। दिसंबर 2022 में आरोपी ने उक्त राशि चुकाने के लिए एक चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर हस्ताक्षर भिन्न होने के कारण बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस देने के बावजूद आरोपी ने न तो रकम लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया।
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इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई। अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपी अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा और शिकायतकर्ता ने मामले को संदेह से परे सिद्ध किया।

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