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Sirmour News: अदालत 6
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उपभोक्ता आयोग की कार्यवाही जांच
किए बिना नहीं की जा सकती तय : कोर्ट
-अदालत ने बीमा कंपनी की याचिका खारिज, वादी की मुआवजा एवं क्षतिपूर्ति का दावा सुनवाई योग्य माना
- पांवटा साहिब निवासी की आपदा के दौरान उसकी जेसीबी मशीन को गई थी क्षतिग्रस्त
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश में बीमा कंपनी के आवेदन को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि वादी की ओर से दायर क्षतिपूर्ति और हर्जाने के मुकदमे में प्रथम दृष्टया कारण-ए-दावा मौजूद है और इसे प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता आयोग की कार्यवाही बिना जांच के तय नहीं की जा सकती। विवादित तथ्यों का निर्णय मुकदमे की नियमित सुनवाई में ही होगा।
मामला देव राज चौहान बनाम एम/एस कॉन्टिनेंटल जेसीबी कॉन्टिनेंटल और अन्य से जुड़ा है। वादी का आरोप है कि वर्ष 2016 में खरीदी गई जेसीबी मशीन प्राकृतिक आपदा के कारण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। मशीन का बीमा होने के बावजूद उसे पूरी क्षतिपूर्ति नहीं मिली। मामले में नई दिल्ली स्थित एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (बीमा कंपनी) ने अदालत में आवेदन दायर कर कहा था कि इसी विवाद पर पहले उपभोक्ता आयोग में सुनवाई हो चुकी है। इसलिए वर्तमान दीवानी वाद सुनवाई योग्य नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आदेश 7 नियम 11 सीपीसी के तहत केवल वादपत्र के कथनों को देखा जा सकता है।
उपभोक्ता आयोग की कार्यवाही, उसके निष्कर्ष तथा लंबित अपीलों जैसे तथ्यों की जांच किए बिना यह तय नहीं किया जा सकता कि वाद किसी कानूनी बाधा से ग्रस्त है या नहीं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वादी की ओर से प्रतिष्ठा, वित्तीय नुकसान और अन्य क्षतियों के संबंध में लगाए गए आरोपों के परीक्षण के लिए साक्ष्य आवश्यक हैं। ऐसे विवादित तथ्यों का निर्णय मुकदमे की नियमित सुनवाई के दौरान ही किया जा सकता है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कपिल शर्मा ने आदेश में बीमा कंपनी की याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।
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किए बिना नहीं की जा सकती तय : कोर्ट
-अदालत ने बीमा कंपनी की याचिका खारिज, वादी की मुआवजा एवं क्षतिपूर्ति का दावा सुनवाई योग्य माना
- पांवटा साहिब निवासी की आपदा के दौरान उसकी जेसीबी मशीन को गई थी क्षतिग्रस्त
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश में बीमा कंपनी के आवेदन को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि वादी की ओर से दायर क्षतिपूर्ति और हर्जाने के मुकदमे में प्रथम दृष्टया कारण-ए-दावा मौजूद है और इसे प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता आयोग की कार्यवाही बिना जांच के तय नहीं की जा सकती। विवादित तथ्यों का निर्णय मुकदमे की नियमित सुनवाई में ही होगा।
मामला देव राज चौहान बनाम एम/एस कॉन्टिनेंटल जेसीबी कॉन्टिनेंटल और अन्य से जुड़ा है। वादी का आरोप है कि वर्ष 2016 में खरीदी गई जेसीबी मशीन प्राकृतिक आपदा के कारण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। मशीन का बीमा होने के बावजूद उसे पूरी क्षतिपूर्ति नहीं मिली। मामले में नई दिल्ली स्थित एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (बीमा कंपनी) ने अदालत में आवेदन दायर कर कहा था कि इसी विवाद पर पहले उपभोक्ता आयोग में सुनवाई हो चुकी है। इसलिए वर्तमान दीवानी वाद सुनवाई योग्य नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आदेश 7 नियम 11 सीपीसी के तहत केवल वादपत्र के कथनों को देखा जा सकता है।
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उपभोक्ता आयोग की कार्यवाही, उसके निष्कर्ष तथा लंबित अपीलों जैसे तथ्यों की जांच किए बिना यह तय नहीं किया जा सकता कि वाद किसी कानूनी बाधा से ग्रस्त है या नहीं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वादी की ओर से प्रतिष्ठा, वित्तीय नुकसान और अन्य क्षतियों के संबंध में लगाए गए आरोपों के परीक्षण के लिए साक्ष्य आवश्यक हैं। ऐसे विवादित तथ्यों का निर्णय मुकदमे की नियमित सुनवाई के दौरान ही किया जा सकता है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कपिल शर्मा ने आदेश में बीमा कंपनी की याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।