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Sirmour News: अदालत
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जमीन विवाद में उलटफेर : कोर्ट ने स्टेटस-
क्वो आदेश किया रद्द, निर्माण पर रोक नहीं
- पांवटा साहिब में 12 बीघा जमीन से जुड़ा मामला, एडीजे ने फैसले में ट्रायल कोर्ट का अंतरिम आदेश असंवैधानिक ठहराया
- बिना ठोस प्रमाण के किसी सह-स्वामी को अपने हिस्से में निर्माण से रोकना उचित नहीं : कोर्ट
- प्रतिवादियों ने मामले को खत्म होने तक निर्माण कार्य रोकने की उठाई थी मांग
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)।
जमीन विवाद के एक मामले में अदालत ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए बड़ा निर्णय सुनाया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कपिल शर्मा ने ट्रायल कोर्ट की ओर से दिए गए स्टेटस-क्वो आदेश को रद्द कर दिया और रोशनी देवी की अपील को मंजूरी दे दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट का दिया अंतरिम आदेश कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। साथ ही, कहा कि बिना ठोस नुकसान के प्रमाण के किसी सह-स्वामी को अपने हिस्से में निर्माण से नहीं रोका जा सकता।
मामला उपमंडल पांवटा साहिब के गांव कोटड़ी की करीब 12 बीघा जमीन से जुड़ा है। इसमें सभी पक्षकार सह-स्वामी हैं। जमीन के बंटवारे को लेकर पहले ही राजस्व अदालत में आदेश पारित हो चुका है, हालांकि इस पर अपील लंबित है। इसी दौरान निर्माण कार्य को लेकर विवाद बढ़ गया। ट्रायल कोर्ट ने पहले सभी पक्षों को जमीन की स्थिति यथावत बनाए रखने के निर्देश दिए थे, लेकिन अपीलीय अदालत ने इसे गलत ठहराया। अदालत ने कहा कि केवल संयुक्त स्वामित्व के आधार पर किसी सह-स्वामी को निर्माण कार्य से नहीं रोका जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि इससे अन्य पक्ष को वास्तविक और अपूरणीय नुकसान हो रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम रोक लगाने के लिए प्रथम दृष्टया मामला, अपूरणीय क्षति और संतुलन की सुविधा जैसे तीनों आधार जरूरी होते हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता इन शर्तों को साबित करने में असफल रहा।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि रोशनी देवी अपने हिस्से की जमीन में ही निर्माण कर रही हैं और उनका हिस्सा अन्य पक्षकारों से अधिक है। ऐसे में निर्माण पर रोक लगाने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। अदालत ने 8 जनवरी 2026 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए अंतरिम आवेदन खारिज कर दिया है। साथ ही स्पष्ट किया कि यह टिप्पणियां केवल अपील के निपटारे तक सीमित हैं और मुख्य मामले की सुनवाई जारी रहेगी।
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क्वो आदेश किया रद्द, निर्माण पर रोक नहीं
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- बिना ठोस प्रमाण के किसी सह-स्वामी को अपने हिस्से में निर्माण से रोकना उचित नहीं : कोर्ट
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नाहन (सिरमौर)।
जमीन विवाद के एक मामले में अदालत ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए बड़ा निर्णय सुनाया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कपिल शर्मा ने ट्रायल कोर्ट की ओर से दिए गए स्टेटस-क्वो आदेश को रद्द कर दिया और रोशनी देवी की अपील को मंजूरी दे दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट का दिया अंतरिम आदेश कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। साथ ही, कहा कि बिना ठोस नुकसान के प्रमाण के किसी सह-स्वामी को अपने हिस्से में निर्माण से नहीं रोका जा सकता।
मामला उपमंडल पांवटा साहिब के गांव कोटड़ी की करीब 12 बीघा जमीन से जुड़ा है। इसमें सभी पक्षकार सह-स्वामी हैं। जमीन के बंटवारे को लेकर पहले ही राजस्व अदालत में आदेश पारित हो चुका है, हालांकि इस पर अपील लंबित है। इसी दौरान निर्माण कार्य को लेकर विवाद बढ़ गया। ट्रायल कोर्ट ने पहले सभी पक्षों को जमीन की स्थिति यथावत बनाए रखने के निर्देश दिए थे, लेकिन अपीलीय अदालत ने इसे गलत ठहराया। अदालत ने कहा कि केवल संयुक्त स्वामित्व के आधार पर किसी सह-स्वामी को निर्माण कार्य से नहीं रोका जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि इससे अन्य पक्ष को वास्तविक और अपूरणीय नुकसान हो रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरिम रोक लगाने के लिए प्रथम दृष्टया मामला, अपूरणीय क्षति और संतुलन की सुविधा जैसे तीनों आधार जरूरी होते हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता इन शर्तों को साबित करने में असफल रहा।
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सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि रोशनी देवी अपने हिस्से की जमीन में ही निर्माण कर रही हैं और उनका हिस्सा अन्य पक्षकारों से अधिक है। ऐसे में निर्माण पर रोक लगाने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। अदालत ने 8 जनवरी 2026 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए अंतरिम आवेदन खारिज कर दिया है। साथ ही स्पष्ट किया कि यह टिप्पणियां केवल अपील के निपटारे तक सीमित हैं और मुख्य मामले की सुनवाई जारी रहेगी।

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