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Sirmour News: मेडिकल कॉलेज खुद बीमार, त्वचा रोग विभाग में मरीजों को लंबा इंतजार
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एक एसोसिएट प्रोफेसर के भरोसे चल रहीं स्वास्थ्य सेवाएं
अवकाश, कोर्ट एविडेंस और अन्य आपात स्थितियों में प्रशिक्षु चिकित्सकों का सहारा
प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर का एक-एक पद, सीनियर रेजीडेंट के दो और जूनियर रेजीडेंट के तीन पद रिक्त
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी के चलते मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग में सात पद रिक्त होने के कारण संपूर्ण व्यवस्था केवल एक एसोसिएट प्रोफेसर के भरोसे चल रही है। ऐसे में बढ़ते मरीजों और कार्यभार का सीधा असर उपचार सेवाओं पर पड़ रहा है।
दरअसल, विभाग में प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर का एक-एक पद, सीनियर रेजीडेंट के दो और जूनियर रेजीडेंट के तीन पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसके चलते मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते विभाग पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थिति यह है कि यदि एकमात्र एसोसिएट प्रोफेसर अवकाश पर हों, कोर्ट एविडेंस के लिए बाहर गए हों या किसी अन्य प्रशासनिक एवं आपात कार्य में व्यस्त हों, तो विभाग प्रशिक्षु चिकित्सकों के सहारे संचालित करना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभाग में रोजाना औसतन 60 से 90 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। गर्मी के मौसम में फंगल इंफेक्शन, एलर्जी और अन्य त्वचा रोगों के मामलों में वृद्धि होने से मरीजों की संख्या में और इजाफा हो गया है। वहीं जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों में त्वचा रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण भी अधिकांश मरीज मेडिकल कॉलेज का रुख करते हैं। विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को परामर्श और उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल आने वाले मरीजों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थान में पर्याप्त चिकित्सकों की तैनाती होना आवश्यक है, ताकि उन्हें समय पर उपचार मिल सके।
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लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों के रिक्त पद न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. संगीत ढिल्लों ने बताया कि त्वचा रोग विभाग में रिक्त पदों के संबंध में रिपोर्ट सरकार और उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और रिक्त पदों को भरने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। संवाद
अवकाश, कोर्ट एविडेंस और अन्य आपात स्थितियों में प्रशिक्षु चिकित्सकों का सहारा
प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर का एक-एक पद, सीनियर रेजीडेंट के दो और जूनियर रेजीडेंट के तीन पद रिक्त
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी के चलते मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग में सात पद रिक्त होने के कारण संपूर्ण व्यवस्था केवल एक एसोसिएट प्रोफेसर के भरोसे चल रही है। ऐसे में बढ़ते मरीजों और कार्यभार का सीधा असर उपचार सेवाओं पर पड़ रहा है।
दरअसल, विभाग में प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर का एक-एक पद, सीनियर रेजीडेंट के दो और जूनियर रेजीडेंट के तीन पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसके चलते मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते विभाग पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थिति यह है कि यदि एकमात्र एसोसिएट प्रोफेसर अवकाश पर हों, कोर्ट एविडेंस के लिए बाहर गए हों या किसी अन्य प्रशासनिक एवं आपात कार्य में व्यस्त हों, तो विभाग प्रशिक्षु चिकित्सकों के सहारे संचालित करना पड़ रहा है।
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मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभाग में रोजाना औसतन 60 से 90 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। गर्मी के मौसम में फंगल इंफेक्शन, एलर्जी और अन्य त्वचा रोगों के मामलों में वृद्धि होने से मरीजों की संख्या में और इजाफा हो गया है। वहीं जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों में त्वचा रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण भी अधिकांश मरीज मेडिकल कॉलेज का रुख करते हैं। विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को परामर्श और उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल आने वाले मरीजों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थान में पर्याप्त चिकित्सकों की तैनाती होना आवश्यक है, ताकि उन्हें समय पर उपचार मिल सके।
लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों के रिक्त पद न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. संगीत ढिल्लों ने बताया कि त्वचा रोग विभाग में रिक्त पदों के संबंध में रिपोर्ट सरकार और उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और रिक्त पदों को भरने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। संवाद