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Sirmour News: कफोटा आईटीआई भवन 12 साल से अधूरा, छोटे कमरों में पढ़ रहे प्रशिक्षु
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अधर में लटका कफोटा आईटीआई का भवन। संवाद
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सचित्र--
पहले जमीन नहीं मिली, ग्रामीण ने दान दी तो अब बजट नहीं हो रहा जारी
वीरभद्र सरकार के समय खोली गई थी आईटीआई, बिना भवन के संचालित की गईं कक्षाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
कफोटा (सिरमौर)। जिले के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) कफोटा का भवन 12 वर्षों से अधूरा है। भवन पूरा न होने के कारण तकनीकी शिक्षा हासिल कर रहे प्रशिक्षुओं को निजी भवन के छोटे-छोटे कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में स्वीकृत इस आईटीआई को 12 साल बाद भी अपना स्थायी भवन नहीं मिल पाया है। इससे प्रशिक्षुओं और स्थानीय ग्रामीणों में रोष है।
आईटीआई की घोषणा के बाद कई वर्षों तक संस्थान के लिए उपयुक्त सरकारी जमीन नहीं मिल सकी। जमीन की बढ़ती कीमतों के कारण निजी जमीन देने के लिए भी लोग तैयार नहीं थे। करीब चार साल पहले दुगाना गांव के लोगों ने पहल करते हुए शिरगांव के पास अपनी शामलात भूमि में से छह बीघा जमीन संस्थान के लिए दान की। जमीन मिलने के बाद भवन निर्माण का काम शुरू हुआ, लेकिन बजट की कमी के चलते पिछले एक साल से काम पूरी तरह बंद है।
स्थानीय ग्रामीण बलबीर सिंह, सूरत सिंह, रमेश चंद, रंगी लाल, सुरेंद्र सिंह और नरेश कुमार ने बताया कि संस्थान का मुख्य ढांचा लगभग तैयार हो चुका है, लेकिन पिछले एक साल से भवन पर छत नहीं डाली जा सकी है। इसके अलावा अंदरूनी निर्माण कार्य भी अधूरे हैं।
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इस आईटीआई से कफोटा और तिलौरधार विकासखंड की करीब 25 पंचायतों के युवा जुड़े हैं। बाहरी क्षेत्रों से भी विद्यार्थी यहां तकनीकी प्रशिक्षण लेने पहुंचते हैं। पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण प्रशिक्षुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने युवाओं को घर के नजदीक तकनीकी शिक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से आईटीआई खोली, लेकिन 12 साल बाद भी भवन पूरा नहीं हो सका। बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से योजना का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।
जल्द पूरा होगा भवन : हर्षवर्धन चौहान
उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री ठाकुर हर्षवर्धन सिंह चौहान ने कहा कि कफोटा आईटीआई भवन के निर्माण कार्य की पूरी रिपोर्ट विभाग से मांगी गई है। भवन को पूरा करने के लिए आवश्यक धनराशि का आकलन करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही बजट का प्रावधान किया जाएगा और अधूरे भवन को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करवाया जाएगा, ताकि प्रशिक्षुओं को आधुनिक और सुविधाजनक माहौल मिल सके।
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पहले जमीन नहीं मिली, ग्रामीण ने दान दी तो अब बजट नहीं हो रहा जारी
वीरभद्र सरकार के समय खोली गई थी आईटीआई, बिना भवन के संचालित की गईं कक्षाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
कफोटा (सिरमौर)। जिले के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) कफोटा का भवन 12 वर्षों से अधूरा है। भवन पूरा न होने के कारण तकनीकी शिक्षा हासिल कर रहे प्रशिक्षुओं को निजी भवन के छोटे-छोटे कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में स्वीकृत इस आईटीआई को 12 साल बाद भी अपना स्थायी भवन नहीं मिल पाया है। इससे प्रशिक्षुओं और स्थानीय ग्रामीणों में रोष है।
आईटीआई की घोषणा के बाद कई वर्षों तक संस्थान के लिए उपयुक्त सरकारी जमीन नहीं मिल सकी। जमीन की बढ़ती कीमतों के कारण निजी जमीन देने के लिए भी लोग तैयार नहीं थे। करीब चार साल पहले दुगाना गांव के लोगों ने पहल करते हुए शिरगांव के पास अपनी शामलात भूमि में से छह बीघा जमीन संस्थान के लिए दान की। जमीन मिलने के बाद भवन निर्माण का काम शुरू हुआ, लेकिन बजट की कमी के चलते पिछले एक साल से काम पूरी तरह बंद है।
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स्थानीय ग्रामीण बलबीर सिंह, सूरत सिंह, रमेश चंद, रंगी लाल, सुरेंद्र सिंह और नरेश कुमार ने बताया कि संस्थान का मुख्य ढांचा लगभग तैयार हो चुका है, लेकिन पिछले एक साल से भवन पर छत नहीं डाली जा सकी है। इसके अलावा अंदरूनी निर्माण कार्य भी अधूरे हैं।
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इस आईटीआई से कफोटा और तिलौरधार विकासखंड की करीब 25 पंचायतों के युवा जुड़े हैं। बाहरी क्षेत्रों से भी विद्यार्थी यहां तकनीकी प्रशिक्षण लेने पहुंचते हैं। पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण प्रशिक्षुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने युवाओं को घर के नजदीक तकनीकी शिक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से आईटीआई खोली, लेकिन 12 साल बाद भी भवन पूरा नहीं हो सका। बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से योजना का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।
जल्द पूरा होगा भवन : हर्षवर्धन चौहान
उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री ठाकुर हर्षवर्धन सिंह चौहान ने कहा कि कफोटा आईटीआई भवन के निर्माण कार्य की पूरी रिपोर्ट विभाग से मांगी गई है। भवन को पूरा करने के लिए आवश्यक धनराशि का आकलन करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही बजट का प्रावधान किया जाएगा और अधूरे भवन को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करवाया जाएगा, ताकि प्रशिक्षुओं को आधुनिक और सुविधाजनक माहौल मिल सके।