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Sirmour News: खारा और सिंबलवाड़ा के जंगल में नजर आए बाघ अलग-अलग
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(खास खबर)
वन विभाग को मिले कई साक्ष्य, पंजों के निशान और मल के नमूने जांच के लिए भेजे जाएंगे लैब
प्रदेश के इस घने जंगल क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए बाघ का नया गलियारा बनना अच्छे संकेत
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। खारा के घने जंगल में ट्रैप कैमरे में बाघ की मौजूदगी दर्ज होने के बाद वन विभाग अलर्ट मोड पर है। पिछले तीन दिन से वन विभाग की टीम नए बने बाघ गलियारे के चप्पे-चप्पे पर नजर रख रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वर्ष 2023 में सिंबलवाड़ा नेशनल पार्क में दिखाई दिया बाघ और अब खारा जंगल में नजर आया बाघ अलग-अलग हैं। विभागीय अधिकारियों ने क्षेत्र में दो बाघ होने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया है।
वन विभाग की टीम ने बाघ के पदचिह्न, मल के नमूने, पेड़ों पर चिपके बाल और अन्य साक्ष्य जुटाए हैं। इन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट से बाघ की उम्र, लिंग और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिल सकेगी। पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व से हाथियों के झुंड पहले भी पांवटा साहिब क्षेत्र में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाते रहे हैं। जनवरी 2023 में पहली बार ट्रैप कैमरे में सिंबलवाड़ा राष्ट्रीय उद्यान में बाघ की तस्वीर कैद हुई थी। अब खारा के जंगल में फिर बाघ की मौजूदगी मिलने से वन विभाग की गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदेश में अब तक केवल पांवटा साहिब के साल के घने जंगलों में ही बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में बाघ का नया गलियारा विकसित हो रहा है।
आरओ पांवटा सुरेंद्र शर्मा की टीम लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही है। विभाग ने दोनों ट्रैप कैमरों में कैद तस्वीरों का तुलनात्मक अध्ययन किया है, जिसमें दोनों बाघों के शरीर की धारियों और रंग में अंतर पाया गया है। वन विभाग अब बाघों की वास्तविक संख्या और उनकी आवाजाही का पता लगाने के लिए निगरानी बढ़ा रहा है। वन अधिकारियों को जंगल के आसपास रहने वाले घुमंतू गुज्जर परिवारों और स्थानीय लोगों से पहले भी खारा के जंगल में दो बाघों की मौजूदगी की जानकारी मिलती रही है। अब ट्रैप कैमरे में मिले फुटेज और अन्य साक्ष्यों से इस संभावना को बल मिला है।
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डीएफओ वेद प्रकाश ने बताया कि टीम ने पदचिह्न, मल के नमूने, जमीन पर बाघ के पंजों के निशान और पेड़ों पर घर्षण के दौरान चिपके बाल के नमूने एकत्र किए हैं। इनकी लैब में जांच से बाघ की उम्र, लिंग और स्वास्थ्य की स्थिति का पता लगाया जा सकेगा।
मानव-बाघ संघर्ष की बढ़ी आशंका
खारा का जंगल अवैध शराब माफिया की गतिविधियों के कारण पहले भी चर्चा में रहा है। जंगल में घुमंतू गुज्जर परिवार और जिले के कुछ अन्य परिवार मवेशियों के साथ मौसमी डेरे लगाकर रहते हैं। ऐसे में बाघ की मौजूदगी के बाद मानव-बाघ संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। पिछले चार वर्षों में हाथियों के हमले में एक महिला समेत दो लोगों की जान जा चुकी है।
गलियारे में अपने निशान छोड़ जाते हैं बाघ
वन विभाग को नए बने बाघ गलियारे में कई अहम साक्ष्य मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बाघ अपने क्षेत्र को चिह्नित करने के लिए पेड़ों पर शरीर रगड़ते हैं और पंजों के निशान छोड़ जाते हैं। खारा जंगल में पुराने और नए दोनों प्रकार के पदचिह्न मिले हैं, जिससे आशंका जताई जा रही है कि बाघ पिछले कुछ वर्षों से इसी क्षेत्र में विचरण कर रहा है।
वन विभाग को मिले कई साक्ष्य, पंजों के निशान और मल के नमूने जांच के लिए भेजे जाएंगे लैब
प्रदेश के इस घने जंगल क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए बाघ का नया गलियारा बनना अच्छे संकेत
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। खारा के घने जंगल में ट्रैप कैमरे में बाघ की मौजूदगी दर्ज होने के बाद वन विभाग अलर्ट मोड पर है। पिछले तीन दिन से वन विभाग की टीम नए बने बाघ गलियारे के चप्पे-चप्पे पर नजर रख रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वर्ष 2023 में सिंबलवाड़ा नेशनल पार्क में दिखाई दिया बाघ और अब खारा जंगल में नजर आया बाघ अलग-अलग हैं। विभागीय अधिकारियों ने क्षेत्र में दो बाघ होने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया है।
वन विभाग की टीम ने बाघ के पदचिह्न, मल के नमूने, पेड़ों पर चिपके बाल और अन्य साक्ष्य जुटाए हैं। इन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट से बाघ की उम्र, लिंग और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिल सकेगी। पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व से हाथियों के झुंड पहले भी पांवटा साहिब क्षेत्र में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाते रहे हैं। जनवरी 2023 में पहली बार ट्रैप कैमरे में सिंबलवाड़ा राष्ट्रीय उद्यान में बाघ की तस्वीर कैद हुई थी। अब खारा के जंगल में फिर बाघ की मौजूदगी मिलने से वन विभाग की गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदेश में अब तक केवल पांवटा साहिब के साल के घने जंगलों में ही बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में बाघ का नया गलियारा विकसित हो रहा है।
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आरओ पांवटा सुरेंद्र शर्मा की टीम लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही है। विभाग ने दोनों ट्रैप कैमरों में कैद तस्वीरों का तुलनात्मक अध्ययन किया है, जिसमें दोनों बाघों के शरीर की धारियों और रंग में अंतर पाया गया है। वन विभाग अब बाघों की वास्तविक संख्या और उनकी आवाजाही का पता लगाने के लिए निगरानी बढ़ा रहा है। वन अधिकारियों को जंगल के आसपास रहने वाले घुमंतू गुज्जर परिवारों और स्थानीय लोगों से पहले भी खारा के जंगल में दो बाघों की मौजूदगी की जानकारी मिलती रही है। अब ट्रैप कैमरे में मिले फुटेज और अन्य साक्ष्यों से इस संभावना को बल मिला है।
डीएफओ वेद प्रकाश ने बताया कि टीम ने पदचिह्न, मल के नमूने, जमीन पर बाघ के पंजों के निशान और पेड़ों पर घर्षण के दौरान चिपके बाल के नमूने एकत्र किए हैं। इनकी लैब में जांच से बाघ की उम्र, लिंग और स्वास्थ्य की स्थिति का पता लगाया जा सकेगा।
मानव-बाघ संघर्ष की बढ़ी आशंका
खारा का जंगल अवैध शराब माफिया की गतिविधियों के कारण पहले भी चर्चा में रहा है। जंगल में घुमंतू गुज्जर परिवार और जिले के कुछ अन्य परिवार मवेशियों के साथ मौसमी डेरे लगाकर रहते हैं। ऐसे में बाघ की मौजूदगी के बाद मानव-बाघ संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। पिछले चार वर्षों में हाथियों के हमले में एक महिला समेत दो लोगों की जान जा चुकी है।
गलियारे में अपने निशान छोड़ जाते हैं बाघ
वन विभाग को नए बने बाघ गलियारे में कई अहम साक्ष्य मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बाघ अपने क्षेत्र को चिह्नित करने के लिए पेड़ों पर शरीर रगड़ते हैं और पंजों के निशान छोड़ जाते हैं। खारा जंगल में पुराने और नए दोनों प्रकार के पदचिह्न मिले हैं, जिससे आशंका जताई जा रही है कि बाघ पिछले कुछ वर्षों से इसी क्षेत्र में विचरण कर रहा है।