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हिमाचल प्रदेश: ट्राले पर ही हांफ गईं करोड़ों की नई इलेक्ट्रिक बसें, सड़कों पर दौड़ेंगी तो क्या होगा हाल?
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन/शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Wed, 13 May 2026 10:25 AM IST
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सार
सोमवार को निर्माण कंपनी के चालक जब बसों को डिपो के रैंप से उतारने पहुंचे, तो बसें बंद होने लगीं। कंपनी ने दावा किया था कि बसों की सभी तकनीकी खामियां दूर कर दी गई हैं और परिचालन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि रैंप से उतारते समय बसों में स्टार्ट-स्टॉप की समस्या सामने आई। पढ़ें पूरी खबर...
सोलन सब्जी मंडी के समीप ट्राले पर लदी नई इलेक्ट्रिक बसें।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश की सड़कों पर दौड़ने वाली करोड़ों की नई इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। सोमवार को निर्माण कंपनी के चालक जब बसों को डिपो के रैंप से उतारने पहुंचे, तो बसें बंद होने लगीं। इससे एचआरटीसी की तैयारियों और कंपनी के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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कंपनी ने दावा किया था कि बसों की सभी तकनीकी खामियां दूर कर दी गई हैं और परिचालन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि रैंप से उतारते समय बसों में स्टार्ट-स्टॉप की समस्या सामने आई। पहले रैंप की व्यवस्था न होने से भी देरी हुई और जब रास्ता साफ हुआ तो तकनीकी खराबी के चलते बसें ट्रालों से नीचे नहीं उतारी सकीं। फिलहाल कंपनी की तकनीकी टीम खराबियों की जांच में जुटी है। सोलन में करीब 11 नई ई-बसें पहुंची हैं और तीन दिन से नहीं उतारी जा सकी हैं।
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गौरतलब है कि हैदराबाद की कंपनी से खरीदी गई ये बसें रविवार को सब्जी मंडी सोलन पहुंची थीं। रैंप की व्यवस्था न होने के कारण बसें ट्रालों पर ही खड़ी रहीं। अब रैंप तैयार होने के बाद भी तकनीकी खराबी के चलते अनलोडिंग नहीं हो सकी। जानकारी के अनुसार इन बसों का ट्रायल सोलन से शिमला, कांगड़ा और हमीरपुर में किया जाना है।
राजधानी में बेकार खड़ी हैं एक दर्जन से अधिक इलेक्ट्रिक बसें
राजधानी शिमला में वर्ष 2018-19 में खरीदी गईं इलेक्ट्रिक बसों को परिवहन निगम ठीक करके दोबारा चलाएगा। कलपुर्जे न होने से यह बसें लंबे अर्से से बेकार खड़ी हैं। पहले चरण में खरीदी गईं इन बसों में करीब एक दर्जन से अधिक ऐसी हैं, जो खराब होने के बाद ठीक नहीं हो पा रही हैं।
अब करोड़ों रुपये की बसों को ठीक करवाने के लिए परिवहन निगम कंपनी के साथ छह साल के लिए करार करने जा रहा है। इसको लेकर कंपनी के साथ बात की जा रही है, जो अंतिम चरणों में बताई जा रही है। इसको लेकर एग्रीमेंट होने पर बसों का छह साल तक कंपनी ही रखरखाव करेगी जिसमें कंपनी के मैकेनिक ही बसों की मरम्मत का कार्य करेेंगे। इसकी एवज में परिवहन निगम एग्रीमेंट के अनुसार भुगतान करेगा। परिवहन निगम के राजधानी शिमला के बेड़े में शुरुआत में 2018-19 में 50 बसें खरीद कर शामिल की गईं थी। इनमें से 25 से 30 ऐसी हैं, जिनमें खराबी आई है।
निगम के वर्कशॉप में जो मरम्मत संभव होती है, उसे ही ठीक कर शहर में चलाया जा रहा है लेकिन 12 चलने की स्थिति में नहीं है। इन बसों की मरम्मत के लिए आवश्यक कलपुर्जे उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इस परेशानी को देखते हुए परिवहन निगम ने करोड़ों की बेकार पड़ी इन बसों को फिर से सड़क पर चलाकर लोगों के लिए उपयोगी बनाने को कंपनी के साथ करार करने की तैयारी कर रहा है। परिवहन निगम के संबंधित अधिकारियों ने माना कि कंपनी के साथ बात चल रही है, इसमें शर्तों और नियमों का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। करार को लेकर सभी आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने पर दोनों पक्षों के बीच वार्षिक मेंटेनेंस कांट्रेक्ट साइन किया जा सकेगा।
राजधानी शिमला में वर्ष 2018-19 में खरीदी गईं इलेक्ट्रिक बसों को परिवहन निगम ठीक करके दोबारा चलाएगा। कलपुर्जे न होने से यह बसें लंबे अर्से से बेकार खड़ी हैं। पहले चरण में खरीदी गईं इन बसों में करीब एक दर्जन से अधिक ऐसी हैं, जो खराब होने के बाद ठीक नहीं हो पा रही हैं।
अब करोड़ों रुपये की बसों को ठीक करवाने के लिए परिवहन निगम कंपनी के साथ छह साल के लिए करार करने जा रहा है। इसको लेकर कंपनी के साथ बात की जा रही है, जो अंतिम चरणों में बताई जा रही है। इसको लेकर एग्रीमेंट होने पर बसों का छह साल तक कंपनी ही रखरखाव करेगी जिसमें कंपनी के मैकेनिक ही बसों की मरम्मत का कार्य करेेंगे। इसकी एवज में परिवहन निगम एग्रीमेंट के अनुसार भुगतान करेगा। परिवहन निगम के राजधानी शिमला के बेड़े में शुरुआत में 2018-19 में 50 बसें खरीद कर शामिल की गईं थी। इनमें से 25 से 30 ऐसी हैं, जिनमें खराबी आई है।
निगम के वर्कशॉप में जो मरम्मत संभव होती है, उसे ही ठीक कर शहर में चलाया जा रहा है लेकिन 12 चलने की स्थिति में नहीं है। इन बसों की मरम्मत के लिए आवश्यक कलपुर्जे उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इस परेशानी को देखते हुए परिवहन निगम ने करोड़ों की बेकार पड़ी इन बसों को फिर से सड़क पर चलाकर लोगों के लिए उपयोगी बनाने को कंपनी के साथ करार करने की तैयारी कर रहा है। परिवहन निगम के संबंधित अधिकारियों ने माना कि कंपनी के साथ बात चल रही है, इसमें शर्तों और नियमों का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। करार को लेकर सभी आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने पर दोनों पक्षों के बीच वार्षिक मेंटेनेंस कांट्रेक्ट साइन किया जा सकेगा।