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डुमैहर वार्ड में सुविधाओं की कमी: न खेल मैदान, न ही सड़कों पर रोशनी

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2026 12:23 AM IST
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Lack of amenities in Dumahar ward: no playground, no street lighting
खेल मैदान न होने के कारण घासनी में क्रिकेट खेलते युवक। संवाद।मुद्दा
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प्रशासन की अनदेखी से ग्रामीणों में रोष, अंधेरा होते ही बढ़ता है जंगली जानवरों का खौफ
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एक दर्जन से अधिक पंचायतों में एक भी खेल मैदान नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
अर्की (सोलन)। जिला परिषद डुमैहर वार्ड के तहत आने वाली पंचायतों में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव देखने को मिल रहा है। क्षेत्र के युवाओं के लिए न तो खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं और न ही ग्रामीण रास्तों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की इस अनदेखी के कारण स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं में गहरा रोष पनप रहा है।
वार्ड की 20 से अधिक ऐसी पंचायतें हैं, जहां युवाओं के लिए एक भी खेल मैदान उपलब्ध नहीं है। खेलकूद की सुविधाएं न होने के कारण युवाओं की ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग नहीं हो पा रहा है। आज के समय में जब सरकारें युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, वहीं धरातल पर खेल मैदान जैसी बुनियादी जरूरत भी पूरी नहीं की जा रही है। खेल सुविधाएं न होने के कारण युवाओं के सामने खाली समय काटने का कोई जरिया नहीं है, जिससे उनके गलत रास्तों और नशे की लत की ओर आकर्षित होने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। समस्या सिर्फ खेल मैदानों तक ही सीमित नहीं है। डुमैहर वार्ड की ग्रामीण सड़कों और संपर्क रास्तों की हालत भी दयनीय है। इन रास्तों पर स्ट्रीट लाइटों की कोई व्यवस्था नहीं है। शाम ढलते ही पूरा क्षेत्र घने अंधेरे में डूब जाता है। अंधेरे का फायदा उठाकर क्षेत्र में जंगली जानवरों का आतंक बढ़ गया है। देर शाम या सुबह के समय राहगीरों, महिलाओं और स्कूली बच्चों का सड़कों पर चलना खतरे से खाली नहीं रह गया है। स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन से स्ट्रीट लाइटें लगाने की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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बजट के अभाव में दम तोड़ती खेल अधोसंरचना
क्षेत्र में जिन इक्का-दुक्का जगहों पर खेल मैदान बने भी हुए हैं, उनकी स्थिति बेहद जर्जर हो चुकी है। मैदानों के रखरखाव और मरम्मत के लिए लंबे समय से कोई बजट जारी नहीं किया गया है। बजट के अभाव में ये मैदान अब झाड़ियों और गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि हर चुनाव में युवाओं के लिए खेल मैदान और स्टेडियम बनाने के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही यह सपना सिर्फ कागजी मुद्दा बनकर रह जाता है।
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