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Solan News: सोलन में टीबी के 1,000 से अधिक मामले, बीबीएन में 450 मरीज
Sun, 25 Oct 2026 12:01 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:01 AM IST
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चंडी ब्लॉक में स्थिति बेहतर, वर्ष 2030 तक जिले को टीबी मुक्त बनाने का स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी, परवाणू और नालागढ़ में सबसे अधिक मरीज; जिले में जांच अभियान तेज
सोलन। जिले में टीबी के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बद्दी, परवाणू और नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्रों में सबसे अधिक मरीज सामने आए हैं। बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) क्षेत्र में अब तक करीब 450 मरीज मिल चुके हैं। इन क्षेत्रों में प्रदूषण को बीमारी बढ़ने का एक संभावित कारण बताया जा रहा है।
जिले में टीबी के नए मरीजों का आंकड़ा 1,000 के पार पहुंच गया है। इनमें मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी के 32 मरीज शामिल हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में हर साल औसतन 2,000 नए मामले सामने आते हैं। स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य खंड बद्दी और नालागढ़ समेत पूरे जिले में टीबी की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, स्वास्थ्य खंड चंडी में फिलहाल 24 टीबी मरीजों का उपचार चल रहा है। टीबी मुक्त अभियान के तहत अब हर स्वास्थ्य जांच शिविर में टीबी की जांच अनिवार्य कर दी गई है। आयुष्मान भारत के तहत आयोजित शिविरों में भी टीबी की विशेष जांच की जाएगी।
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इनसेट:
हर गांव में लगेंगे टीबी जांच शिविर
स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक स्वास्थ्य खंड में रोजाना एक गांव में विशेष टीबी जांच शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य जिले के हर गांव तक पहुंचकर मरीजों की पहचान करना है। अधिकारियों के अनुसार, इन शिविरों के माध्यम से ऐसे मरीज भी सामने आ रहे हैं, जिन्होंने पहले अस्पताल में जांच नहीं करवाई थी। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, टीबी की पुष्टि जांच के बाद ही होती है। इसलिए लक्षण होने पर लोगों को समय पर अस्पताल या जांच शिविर में पहुंचना चाहिए।
कोट
जिले में टीबी के नए मरीजों का उपचार तुरंत शुरू किया जा रहा है, ताकि बीमारी पर समय रहते काबू पाया जा सके। मरीजों के परिजनों को भी टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (रोकथाम उपचार) दिया जा रहा है, जिससे उनमें संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सके। - डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सोलन
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बद्दी, परवाणू और नालागढ़ में सबसे अधिक मरीज
सोलन। जिले में टीबी के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बद्दी, परवाणू और नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्रों में सबसे अधिक मरीज सामने आए हैं। बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) क्षेत्र में अब तक करीब 450 मरीज मिल चुके हैं। इन क्षेत्रों में प्रदूषण को बीमारी बढ़ने का एक संभावित कारण बताया जा रहा है।
जिले में टीबी के नए मरीजों का आंकड़ा 1,000 के पार पहुंच गया है। इनमें मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी के 32 मरीज शामिल हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में हर साल औसतन 2,000 नए मामले सामने आते हैं। स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य खंड बद्दी और नालागढ़ समेत पूरे जिले में टीबी की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
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वहीं, स्वास्थ्य खंड चंडी में फिलहाल 24 टीबी मरीजों का उपचार चल रहा है। टीबी मुक्त अभियान के तहत अब हर स्वास्थ्य जांच शिविर में टीबी की जांच अनिवार्य कर दी गई है। आयुष्मान भारत के तहत आयोजित शिविरों में भी टीबी की विशेष जांच की जाएगी।
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हर गांव में लगेंगे टीबी जांच शिविर
स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक स्वास्थ्य खंड में रोजाना एक गांव में विशेष टीबी जांच शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य जिले के हर गांव तक पहुंचकर मरीजों की पहचान करना है। अधिकारियों के अनुसार, इन शिविरों के माध्यम से ऐसे मरीज भी सामने आ रहे हैं, जिन्होंने पहले अस्पताल में जांच नहीं करवाई थी। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, टीबी की पुष्टि जांच के बाद ही होती है। इसलिए लक्षण होने पर लोगों को समय पर अस्पताल या जांच शिविर में पहुंचना चाहिए।
कोट
जिले में टीबी के नए मरीजों का उपचार तुरंत शुरू किया जा रहा है, ताकि बीमारी पर समय रहते काबू पाया जा सके। मरीजों के परिजनों को भी टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (रोकथाम उपचार) दिया जा रहा है, जिससे उनमें संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सके। - डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सोलन