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Una News: चिंतपूर्णी मंदिर में छिन्नमस्तिका जयंती पर उमड़ा आस्था का सैलाब
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 01 May 2026 12:20 AM IST
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भरवाईं (ऊना)। शक्तिपीठ माता चिंतपूर्णी मंदिर में वीरवार को छिन्नमस्तिका जयंती का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में हाजिरी लगाकर विशेष पूजा-अर्चना की। पुजारी परिवार द्वारा मंदिर के हवन कुंड में 24 घंटे का अखंड हवन संपन्न किया गया। इसकी पूर्णाहुति वीरवार सुबह मंत्रोच्चारण के साथ डाली गई।
इस बार मंदिर परिसर को थाईलैंड, हॉलैंड और बेंगलुरु से मंगवाए गए फूलों से सजाया गया था। दिल्ली के एक श्रद्धालु ने सजावट का पूरा खर्च उठाया। मंदिर कांप्लेक्स में बनाए गए जय माता दी सेल्फी पॉइंट पर फोटो खिंचवाने के लिए युवाओं में काफी होड़ रही। जानकारी के अनुसार बुधवार रात से ही बाबा माईदास सदन में श्री दुर्गा स्तुति पाठ और भजन-कीर्तन का दौर शुरू हो गया। देर रात तक श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे। ढोल-नगाड़ों और जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा। वीरवार सुबह से ही जयंती को लेकर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हवन कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज करवाई। हवन संपन्न होने के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें दोपहर तक करीब आठ हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
मंदिर अधिकारी संजीव प्रभाकर ने बताया कि जयंती को लेकर सभी तैयारियां पहले से पूरी थीं। उन्होंने कहा कि छिन्नमस्तिका माता 10 महाविद्याओं में छठी देवी हैं। मान्यता है कि इनकी पूजा से शत्रुओं पर विजय, आत्मबल में वृद्धि और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। यह दिन तीव्र आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वहीं मंदिर में तैनात सुरक्षा कर्मी भी व्यवस्था बनाने को लेकर अपनी ड्यूटी देते नजर आए।
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इस बार मंदिर परिसर को थाईलैंड, हॉलैंड और बेंगलुरु से मंगवाए गए फूलों से सजाया गया था। दिल्ली के एक श्रद्धालु ने सजावट का पूरा खर्च उठाया। मंदिर कांप्लेक्स में बनाए गए जय माता दी सेल्फी पॉइंट पर फोटो खिंचवाने के लिए युवाओं में काफी होड़ रही। जानकारी के अनुसार बुधवार रात से ही बाबा माईदास सदन में श्री दुर्गा स्तुति पाठ और भजन-कीर्तन का दौर शुरू हो गया। देर रात तक श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे। ढोल-नगाड़ों और जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा। वीरवार सुबह से ही जयंती को लेकर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हवन कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज करवाई। हवन संपन्न होने के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें दोपहर तक करीब आठ हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
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मंदिर अधिकारी संजीव प्रभाकर ने बताया कि जयंती को लेकर सभी तैयारियां पहले से पूरी थीं। उन्होंने कहा कि छिन्नमस्तिका माता 10 महाविद्याओं में छठी देवी हैं। मान्यता है कि इनकी पूजा से शत्रुओं पर विजय, आत्मबल में वृद्धि और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। यह दिन तीव्र आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वहीं मंदिर में तैनात सुरक्षा कर्मी भी व्यवस्था बनाने को लेकर अपनी ड्यूटी देते नजर आए।
