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Una News: जिला आयुर्वेद अस्पताल में पंचकर्म के लिए थेरेपिस्ट की तैनाती
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अब सुचारु रूप से मिल पाएगी पंचकर्म की सुविधा
गठिया, त्वचा रोगों सहित कई पुरानी बीमारियों में लाभकारी है पंचकर्म पद्धति
काफी समय से खाली चल रहा था पद
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में पंचकर्म उपचार के लिए लंबे इंतजार के बाद थेरेपिस्ट की तैनाती कर दी गई है। विभाग की ओर से प्रतिनियुक्ति के आधार पर यह नियुक्ति की गई है। अब अस्पताल में पंचकर्म सहित अन्य आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियां सुचारू रूप से संचालित हो सकेंगी।
थेरेपिस्ट का पद लंबे समय से खाली होने के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। दूरदराज से आने वाले कई मरीजों को या तो निराश होकर लौटना पड़ता था या फिर निजी आयुर्वेदिक केंद्रों में महंगे उपचार का सहारा लेना पड़ता था। पंचकर्म आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण चिकित्सा पद्धति है, जो गठिया, त्वचा रोगों सहित कई पुरानी बीमारियों में लाभकारी मानी जाती है।
अब प्रशिक्षित थेरेपिस्ट की तैनाती से मरीजों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण पंचकर्म उपचार मिल सकेगा। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में विभिन्न उपमंडलों से बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं और चिकित्सकों की ओर से कई मरीजों को पंचकर्म कराने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा कपिंग थेरेपी सहित अन्य उपचार पद्धतियों के लिए भी थेरेपिस्ट की आवश्यकता रहती है।
थेरेपिस्ट के अभाव में कई बार चिकित्सकों को स्वयं यह जिम्मेदारी निभानी पड़ती थी, जिससे ओपीडी सेवाएं भी प्रभावित होती थीं। अब थेरेपिस्ट की तैनाती से इन समस्याओं का समाधान हो गया है और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
कोट्स
जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में डेपुटेशन पर थेरेपिस्ट की तैनाती कर दी गई है। इससे अब मरीजों को पंचकर्म सहित अन्य उपचार सुविधाओं का सुचारु रूप से लाभ मिलेगा। -डॉ. विनय जसवाल, प्रभारी जिला आयुर्वेदिक अस्पताल, ऊना
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गठिया, त्वचा रोगों सहित कई पुरानी बीमारियों में लाभकारी है पंचकर्म पद्धति
काफी समय से खाली चल रहा था पद
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में पंचकर्म उपचार के लिए लंबे इंतजार के बाद थेरेपिस्ट की तैनाती कर दी गई है। विभाग की ओर से प्रतिनियुक्ति के आधार पर यह नियुक्ति की गई है। अब अस्पताल में पंचकर्म सहित अन्य आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियां सुचारू रूप से संचालित हो सकेंगी।
थेरेपिस्ट का पद लंबे समय से खाली होने के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। दूरदराज से आने वाले कई मरीजों को या तो निराश होकर लौटना पड़ता था या फिर निजी आयुर्वेदिक केंद्रों में महंगे उपचार का सहारा लेना पड़ता था। पंचकर्म आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण चिकित्सा पद्धति है, जो गठिया, त्वचा रोगों सहित कई पुरानी बीमारियों में लाभकारी मानी जाती है।
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अब प्रशिक्षित थेरेपिस्ट की तैनाती से मरीजों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण पंचकर्म उपचार मिल सकेगा। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में विभिन्न उपमंडलों से बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं और चिकित्सकों की ओर से कई मरीजों को पंचकर्म कराने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा कपिंग थेरेपी सहित अन्य उपचार पद्धतियों के लिए भी थेरेपिस्ट की आवश्यकता रहती है।
थेरेपिस्ट के अभाव में कई बार चिकित्सकों को स्वयं यह जिम्मेदारी निभानी पड़ती थी, जिससे ओपीडी सेवाएं भी प्रभावित होती थीं। अब थेरेपिस्ट की तैनाती से इन समस्याओं का समाधान हो गया है और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
कोट्स
जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में डेपुटेशन पर थेरेपिस्ट की तैनाती कर दी गई है। इससे अब मरीजों को पंचकर्म सहित अन्य उपचार सुविधाओं का सुचारु रूप से लाभ मिलेगा। -डॉ. विनय जसवाल, प्रभारी जिला आयुर्वेदिक अस्पताल, ऊना