{"_id":"6ac2a262fac7536ef900a5cb","slug":"lost-their-mother-and-sister-right-before-their-eyes-the-terrified-children-are-inconsolable-weeping-bitterly-una-news-c-93-1-una1002-208467-2026-10-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: आंखों के सामने मां और बहन को खोया, सहमे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: आंखों के सामने मां और बहन को खोया, सहमे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल
विज्ञापन
टाहलीवाल (ऊना)। बाथड़ी में हुए दर्दनाक हादसे के बाद मृतका रिंकू देवी के बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिन बच्चों की आंखों के सामने कुछ देर पहले तक उनका परिवार था, उन्होंने देखते ही देखते अपनी मां और छोटी बहन को टिप्पर के नीचे दबते देखा।
हादसा इतना अचानक हुआ कि बच्चों को कुछ समझने या संभलने का मौका तक नहीं मिला। हादसे के बाद बच्चे बुरी तरह सहम गए और डर के मारे इधर-उधर भागते रहे। भूखे-प्यासे मासूम बच्चों ने आसपास के दूसरे लोगों के घरों में जाकर आश्रय लिया और वहीं सहमे हुए बैठे रहे।
बच्चों की आंखों के सामने मां और बहन को खोने का दृश्य ऐसा था, जिसे वे शायद जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। हादसे के बाद बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। वे बार-बार अपनी मां और बहन को याद कर रहे थे। परिवार के लिए रोजी-रोटी कमाने वाला पिता राधेश्याम भी इस त्रासदी के बाद पूरी तरह टूट गया है।
विज्ञापन
स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसे के बाद बच्चों के चेहरों पर साफ डर दिखाई दे रहा था। मासूमों को शायद यह भी समझ नहीं आ रहा था कि जिस मां के पास वे हर परेशानी में जाते थे, वह अब उन्हें कभी वापस नहीं मिलेगी।
यह हादसा केवल एक परिवार की दो जिंदगियां नहीं ले गया, बल्कि पीछे रह गए मासूम बच्चों से उनकी मां का सहारा भी छीन गया। अब सवाल यह है कि क्या औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूर परिवारों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार लोग इस दर्दनाक हादसे के बाद जागेंगे?
विज्ञापन
हादसा इतना अचानक हुआ कि बच्चों को कुछ समझने या संभलने का मौका तक नहीं मिला। हादसे के बाद बच्चे बुरी तरह सहम गए और डर के मारे इधर-उधर भागते रहे। भूखे-प्यासे मासूम बच्चों ने आसपास के दूसरे लोगों के घरों में जाकर आश्रय लिया और वहीं सहमे हुए बैठे रहे।
विज्ञापन
बच्चों की आंखों के सामने मां और बहन को खोने का दृश्य ऐसा था, जिसे वे शायद जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। हादसे के बाद बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। वे बार-बार अपनी मां और बहन को याद कर रहे थे। परिवार के लिए रोजी-रोटी कमाने वाला पिता राधेश्याम भी इस त्रासदी के बाद पूरी तरह टूट गया है।
विज्ञापन
स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसे के बाद बच्चों के चेहरों पर साफ डर दिखाई दे रहा था। मासूमों को शायद यह भी समझ नहीं आ रहा था कि जिस मां के पास वे हर परेशानी में जाते थे, वह अब उन्हें कभी वापस नहीं मिलेगी।
यह हादसा केवल एक परिवार की दो जिंदगियां नहीं ले गया, बल्कि पीछे रह गए मासूम बच्चों से उनकी मां का सहारा भी छीन गया। अब सवाल यह है कि क्या औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूर परिवारों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार लोग इस दर्दनाक हादसे के बाद जागेंगे?