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Una News: नलूट–पनसाई संपर्क मार्ग बदहाल, 200 परिवारों की आवाजाही प्रभावित
Fri, 07 Aug 2026 12:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 07 Aug 2026 12:26 AM IST
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थानाकलां (ऊना)। उपमंडल बंगाणा की बुधान पंचायत के अंतर्गत नलूट से पनसाई को जोड़ने वाला करीब दो किलोमीटर लंबा संपर्क मार्ग खस्ता हाल है। सड़क की जर्जर स्थिति के कारण स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में सड़क पर कीचड़ और गड्ढों की भरमार होने से विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए सफर जोखिम भरा बन गया है। ग्रामीणों के अनुसार इस मार्ग पर कई छोटे-बड़े हादसे भी हो चुके हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब पांच वर्ष पूर्व अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत इस सड़क का एक किलोमीटर हिस्सा पक्का किया गया था लेकिन समय के साथ वह हिस्सा भी बारिश के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं शेष एक किलोमीटर कच्चे मार्ग की हालत लगातार खराब होती जा रही है। बारिश के दौरान सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित रहती है। ध्यान रहे कि यह संपर्क मार्ग बुधान पंचायत के वार्ड-4 और पांच के लगभग 200 परिवारों के लिए जीवन रेखा माना जाता है। साथ ही यह सड़क बुधान और डियूंगली पंचायत के लोगों के लिए हमीरपुर जाने का सुविधाजनक मार्ग भी है। लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता सुरेश शर्मा ने बताया कि संपर्क मार्ग को पक्का करने एवं मरम्मत के लिए 33 लाख रुपये का अनुमान तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया है। राशि स्वीकृत होते ही सड़क के निर्माण एवं मरम्मत का कार्य प्राथमिकता के आधार पर शुरू कर दिया जाएगा।
इस सड़क के निर्माण और मरम्मत के लिए वह कई बार लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। सड़क की खराब हालत के कारण गांव तक निर्माण सामग्री, गैस सिलिंडर और अन्य भारी सामान पहुंचाने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
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-हर्ष, स्थानीय निवासी
सड़क की हालत काफी खराब है। सड़क से गुजरने वालाें को रोजाना दिक्कतें पेश आ रही हैं। विभाग को समय रहते जनहित के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
-जयकिशन, स्थानीय निवासी
सड़क के लिए भूमि भी करवाई उपलब्ध, नहीं मिली सुविधा
ग्रामीणों में प्रेम दास, नंद लाल, रत्न चंद, शीला देवी, अशोक कुमार, देस राज, कमला देवी, सुरजीत सिंह, बलबीर, किशन चंद, प्रमिला देवी, हंस राज, ज्ञान चंद और पवन कुमार ने बताया कि वर्ष 2000 में इसी गांव के वीर सपूत किशन चंद जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में देश की रक्षा करते हुए बलिदान हुए थे। उनके परिवार और गांव को जोड़ने वाली यह एकमात्र सड़क है। सड़क निर्माण के लिए स्थानीय लोगों ने अपनी निजी भूमि भी स्वेच्छा से उपलब्ध कराई थी लेकिन वर्षों बाद भी सड़क का कार्य अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द सड़क की हालत नहीं सुधारी गई तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
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ग्रामीणों ने बताया कि करीब पांच वर्ष पूर्व अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत इस सड़क का एक किलोमीटर हिस्सा पक्का किया गया था लेकिन समय के साथ वह हिस्सा भी बारिश के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं शेष एक किलोमीटर कच्चे मार्ग की हालत लगातार खराब होती जा रही है। बारिश के दौरान सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित रहती है। ध्यान रहे कि यह संपर्क मार्ग बुधान पंचायत के वार्ड-4 और पांच के लगभग 200 परिवारों के लिए जीवन रेखा माना जाता है। साथ ही यह सड़क बुधान और डियूंगली पंचायत के लोगों के लिए हमीरपुर जाने का सुविधाजनक मार्ग भी है। लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता सुरेश शर्मा ने बताया कि संपर्क मार्ग को पक्का करने एवं मरम्मत के लिए 33 लाख रुपये का अनुमान तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया है। राशि स्वीकृत होते ही सड़क के निर्माण एवं मरम्मत का कार्य प्राथमिकता के आधार पर शुरू कर दिया जाएगा।
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इस सड़क के निर्माण और मरम्मत के लिए वह कई बार लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। सड़क की खराब हालत के कारण गांव तक निर्माण सामग्री, गैस सिलिंडर और अन्य भारी सामान पहुंचाने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
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-हर्ष, स्थानीय निवासी
सड़क की हालत काफी खराब है। सड़क से गुजरने वालाें को रोजाना दिक्कतें पेश आ रही हैं। विभाग को समय रहते जनहित के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
-जयकिशन, स्थानीय निवासी
सड़क के लिए भूमि भी करवाई उपलब्ध, नहीं मिली सुविधा
ग्रामीणों में प्रेम दास, नंद लाल, रत्न चंद, शीला देवी, अशोक कुमार, देस राज, कमला देवी, सुरजीत सिंह, बलबीर, किशन चंद, प्रमिला देवी, हंस राज, ज्ञान चंद और पवन कुमार ने बताया कि वर्ष 2000 में इसी गांव के वीर सपूत किशन चंद जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में देश की रक्षा करते हुए बलिदान हुए थे। उनके परिवार और गांव को जोड़ने वाली यह एकमात्र सड़क है। सड़क निर्माण के लिए स्थानीय लोगों ने अपनी निजी भूमि भी स्वेच्छा से उपलब्ध कराई थी लेकिन वर्षों बाद भी सड़क का कार्य अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द सड़क की हालत नहीं सुधारी गई तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।