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Una News: सात समंदर पार भी गूंज रही मां चिंतपूर्णी की महिमा
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 25 May 2026 11:01 AM IST
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ऊना। आस्था की न कोई सीमा होती है, न दूरी और न ही देश की सरहदें उसे रोक पाती हैं। श्री माता चिंतपूर्णी मंदिर में चढ़ रही विदेशी मुद्रा इसी अटूट विश्वास की कहानी बयां कर रही है। विदेशों में बसे श्रद्धालु भी मां के दरबार से खुद को उतना ही जुड़ा हुआ महसूस करते हैं, जितना कोई स्थानीय भक्त।
मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार बीते तीन वर्षों में करीब तीन करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा चढ़ावे के रूप में मंदिर पहुंची है। यह केवल धनराशि नहीं बल्कि उन भावनाओं और श्रद्धा का प्रतीक है, जो हजारों मील दूर बैठे भक्तों को भी मां के चरणों तक खींच लाती हैं।
कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और खाड़ी देशों में बसे पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के लोग जब भी अपने वतन लौटते हैं तो मां चिंतपूर्णी के दरबार में माथा टेकना नहीं भूलते। कई श्रद्धालु विदेश में रहते हुए भी अपने परिजनों के हाथों चढ़ावा भेजते हैं। नवरात्र और विशेष धार्मिक आयोजनों के दौरान विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या में खासा इजाफा देखने को मिलता है।
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मंदिर प्रशासन विदेशी मुद्रा के लेखांकन और विनिमय की पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से अपनाता है। रोजाना आने वाली विदेशी मुद्रा का रिकॉर्ड रखा जाता है और बाद में बैंक में जमा कर भारतीय मुद्रा में परिवर्तित किया जाता है।
मंदिर परिसर में अकसर अलग-अलग देशों की भाषाएं सुनाई देती हैं लेकिन ‘जय माता दी’ का उद्घोष सभी को एक सूत्र में बांध देता है। कोई अपनी सफलता की खुशी लेकर पहुंचता है तो कोई मनोकामना पूरी होने पर धन्यवाद अर्पित करने आता है।
धार्मिक पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल के मंदिर अब केवल आस्था के केंद्र नहीं रहे, बल्कि वैश्विक पहचान भी बना रहे हैं और श्री माता चिंतपूर्णी मंदिर इसका जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।
श्री माता चिंतपूर्णी मंदिर में विदेशी मुद्रा माता को चढ़ावे के रूप में आती है, जिसे बाद में बैंक में जमा करवाया जाता है। -पारस अग्रवाल, एसडीएम अंब
मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार बीते तीन वर्षों में करीब तीन करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा चढ़ावे के रूप में मंदिर पहुंची है। यह केवल धनराशि नहीं बल्कि उन भावनाओं और श्रद्धा का प्रतीक है, जो हजारों मील दूर बैठे भक्तों को भी मां के चरणों तक खींच लाती हैं।
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कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और खाड़ी देशों में बसे पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के लोग जब भी अपने वतन लौटते हैं तो मां चिंतपूर्णी के दरबार में माथा टेकना नहीं भूलते। कई श्रद्धालु विदेश में रहते हुए भी अपने परिजनों के हाथों चढ़ावा भेजते हैं। नवरात्र और विशेष धार्मिक आयोजनों के दौरान विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या में खासा इजाफा देखने को मिलता है।
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मंदिर परिसर में अकसर अलग-अलग देशों की भाषाएं सुनाई देती हैं लेकिन ‘जय माता दी’ का उद्घोष सभी को एक सूत्र में बांध देता है। कोई अपनी सफलता की खुशी लेकर पहुंचता है तो कोई मनोकामना पूरी होने पर धन्यवाद अर्पित करने आता है।
धार्मिक पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल के मंदिर अब केवल आस्था के केंद्र नहीं रहे, बल्कि वैश्विक पहचान भी बना रहे हैं और श्री माता चिंतपूर्णी मंदिर इसका जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।
श्री माता चिंतपूर्णी मंदिर में विदेशी मुद्रा माता को चढ़ावे के रूप में आती है, जिसे बाद में बैंक में जमा करवाया जाता है। -पारस अग्रवाल, एसडीएम अंब