वन मित्र भर्ती मामला: हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा- विवाह के बाद स्थिति बदलने पर रद्द नहीं हो सकती उम्मीदवारी
प्रदेश हाईकोर्ट के वन मित्र भर्ती मामले में स्पष्ट किया है कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवार की पात्रता और दस्तावेजों की सत्यता उस तारीख से आंकी जाती है, जो आवेदन की अंतिम तिथि होती है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के वन मित्र भर्ती मामले में स्पष्ट किया है कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवार की पात्रता और दस्तावेजों की सत्यता उस तारीख से आंकी जाती है, जो आवेदन की अंतिम तिथि होती है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान विवाह हो जाने के कारण उम्मीदवार की बीपीएल श्रेणी या स्थानीय निवास का दर्जा रद्द कर उसे नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने विभाग की ओर से याचिकाकर्ता के आवेदन को खारिज करने संबंधी 16 अप्रैल 2025 का पत्र रद्द करते हुए राज्य सरकार और वन विभाग को निर्देश दिया गया कि नीतू कुमारी को द्रंग बीट में वन मित्र के पद पर तत्काल नियुक्त किया जाए। इसके अलावा याचिकाकर्ता की नियुक्ति 15 मार्च 2025 (जब अन्य उम्मीदवारों को नियुक्ति मिली थी) से मानी जाएगी, और उन्हें वरिष्ठता व वास्तविक वित्तीय लाभ प्रदान किए जाएंगे। चूंकि निजी प्रतिवादी की कोई गलती नहीं थी, इसलिए अदालत ने उनकी सेवा समाप्त नहीं की और विभाग को उन्हें उसी या किसी नजदीकी बीट में समायोजित करने का निर्देश दिया।
अदालत ने ये कहा
अदालत ने कहा कि जब विज्ञापन में स्पष्ट रूप से 30 दिसंबर 2023 की समय सीमा तय की गई थी, तो उम्मीदवार की पात्रता उसी तिथि के आधार पर तय की जानी चाहिए। सत्यापन के समय केवल उन्हीं दस्तावेजों की प्रामाणिकता देखी जाती है जो अंतिम तिथि तक जमा किए गए थे। उल्लेखनीय है कि नवंबर 2023 में द्रंग वन परिक्षेत्र के तहत वन मित्र पद के लिए आवेदन मांगे गए थे, जिसकी अंतिम तिथि 30 दिसंबर 2023 तय की गई थी। याचिकाकर्ता नीतू कुमारी ने 14 दिसंबर 2023 को अनुसूचित जाति और बीपीएल श्रेणी के तहत ग्राम पंचायत पाली के निवासी के रूप में आवेदन किया।याचिकाकर्ता ने शारीरिक दक्षता परीक्षा उत्तीर्ण की और सत्यापन सूची में द्रंग बीट के तहत प्रथम स्थान प्राप्त किया।चयन प्रक्रिया में एक वर्ष से अधिक का समय लगा।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए ये कहा
इस बीच, मार्च 2024 में याचिकाकर्ता का विवाह हो गया। जब नवंबर 2024 में दस्तावेजों का सत्यापन हुआ, तो विभाग ने यह कहते हुए याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी और बीपीएल अंक रद्द कर दिए कि विवाह के बाद वह अपने पति के परिवार (जो बीपीएल श्रेणी में नहीं था) के साथ रहने लगी है और ग्राम पंचायत पाली की निवासी नहीं रही हैं। इसके बाद निजी प्रतिवादी को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में ऐसा कोई कानून नहीं है जो यह कहे कि यदि कोई अविवाहित महिला नौकरी के लिए आवेदन करती है, तो वह भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक विवाह न करने के लिए बाध्य है। केवल इसलिए कि विभाग को प्रक्रिया पूरी करने में एक वर्ष लग गया, उम्मीदवार से विवाह टालने की उम्मीद नहीं की जा सकती।