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बीएसएफ: रोजगार मेले में पीएम मोदी से नियुक्ति पत्र पाने वाले 400 जवान हुए नौकरी से बाहर, करेंगे भूख हड़ताल
Wed, 30 Sep 2026 06:03 PM IST
अमन मौर्या
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन मौर्या
Updated Wed, 30 Sep 2026 06:03 PM IST
सार
रोजगार मेले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नियुक्ति पत्र पाने वाले बीएसएफ के 400 ट्रेड्समैन जवानों को फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी से बाहर कर दिया गया है। जवानों ने भूख हड़ताल और कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
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रोजगार मेले में पीएम मोदी से नियुक्ति पत्र पाने वाले 400 जवान हुए नौकरी से बाहर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
बीएसएफ के उन 400 जवानों (ट्रेड्समैन) को अब भूख हड़ताल करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिन्हें रोजगार मेले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा नियुक्ति पत्र मिला था। फर्जी सर्टिफिकेट के चलते 'सीमा सुरक्षा बल' में नौकरी पाए ये जवान अब दोबारा से बेरोजगारों की कतार में खड़े हो गए हैं। 'अलॉयंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' ने इन पूर्व जवानों के समर्थन में बुधवार को 'प्रेस कलब ऑफ इंडिया' में एक प्रेसवार्ता की। एसोसिएशन के चेयरमैन एचआर सिंह ने कहा, सरकार को इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप करना चाहिए। इन युवाओं का देश सेवा का सपना यूं नहीं तोड़ना चाहिए। इन्हें दोबारा से बीएसएफ में नियुक्ति प्रदान की जाए।
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आरटीआई में क्या जवाब मिला?
एसोसिएशन के चेयरमैन एचआर सिंह और महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, इसमें इन युवाओं का कोई दोष नहीं है। ये साइबर फ्रॉड का शिकार हुए हैं। युवाओं को 'नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' के नाम से जारी प्रमाण पत्र दिया गया था। उसी आधार पर इन्हें बीएसएफ में जॉब मिल गई। बाद में पता चला कि वह प्रमाण पत्र फर्जी है। 'नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' ने भी आरटीआई के जवाब में बताया कि यहां से ऐसा कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ है। एचआर सिंह ने कहा कि जब इन युवाओं को नौकरी से निकाला गया, तब जाकर इन्हें अहसास हुआ कि ये साइबर फ्रॉड का शिकार हुए हैं। इसमें युवाओं की कोई गलती नहीं है। प्राइवेट कोचिंग सेंटर वालों ने युवाओं को यह कह कर ट्रेनिंग दी थी कि उन्हें 'नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' का प्रमाण पत्र मिलेगा।
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'अलॉयंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' के चेयरमैन एचआर सिंह और महासचिव रणबीर सिंह
एक-डेढ़ साल नौकरी के बाद हुए बाहर
जब इन युवाओं ने एक डेढ़ साल की नौकरी कर ली, तब एकाएक इन्हें बाहर कर दिया गया। एनएसडीसी ने भी कह दिया कि उनके यहां से 2015 से 2023 के बीच एनएसक्यूएफ लेवल-1 का कोई सर्टिफिकेट जारी ही नहीं किया गया। एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, अब ये युवक बीएसएफ में नौकरी कर चुके हैं। इन्हें अच्छे से अपने काम का अंदाजा है। ऐसे में सरकार को इन्हें दोबारा से सेवा में लेने का आदेश जारी करना चाहिए। गृह राज्य मंत्री को बीएसएफ के इन पूर्व जवानों के मामले से अवगत कराया गया है। बीएसएफ डीजी से भी आग्रह किया गया है कि वे कोई बीच का रास्ता निकालें। अगर कहीं भी सुनवाई नहीं हुई तो ये युवक नई दिल्ली के जंतर मंतर पर अक्तूबर में भूख हड़ताल करेंगे। कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा।
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क्या है मामला?
बीएसएफ में डेढ़ से दो साल की सेवा कर चुके तरूण कुमार, गौरव, दीपक, रिंकू कुमार और मुकेश कुमार ने बताया कि इस मामले में उनकी कोई गलती नहीं है। कोडरमा 'झारखंड' में जिस व्यक्ति ने युवाओं को यह भरोसा दिया था कि ट्रेनिंग के बाद उन्हें एनएसडीसी का प्रमाण पत्र मिलेगा। अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन कोचिंग संस्थानों की बातों पर यकीन कर प्रमाणपत्र ले लिए। बाद में जब मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उस व्यक्ति ने कई राज्यों में ऐसे ही युवाओं को उक्त प्रमाण पत्र देकर ठगा है। युवाओं ने बताया कि अब उनके सामने रोजी रोटी का संकट आ गया है। जवानों की नौकरी छूटने से उनके परिवार भी प्रभावित हो रहे हैं। कई जवानों द्वारा 5-7 लाख रुपए का बैंक लोन भी लिया हुआ है। ऐसे में वे अब लोन कैसे चुका पाएंगे। अनेक जवानों को बढ़िया व स्वादिष्ट खाना बनाने के लिए उच्च अधिकारियों द्वारा नकद पुरस्कार भी मिल चुके हैं। युवाओं का कहना था कि कुछ जवानों को इसी प्रमाण पत्र पर नौकरी में बनाए रखा गया है।
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आरटीआई में क्या जवाब मिला?
एसोसिएशन के चेयरमैन एचआर सिंह और महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, इसमें इन युवाओं का कोई दोष नहीं है। ये साइबर फ्रॉड का शिकार हुए हैं। युवाओं को 'नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' के नाम से जारी प्रमाण पत्र दिया गया था। उसी आधार पर इन्हें बीएसएफ में जॉब मिल गई। बाद में पता चला कि वह प्रमाण पत्र फर्जी है। 'नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' ने भी आरटीआई के जवाब में बताया कि यहां से ऐसा कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ है। एचआर सिंह ने कहा कि जब इन युवाओं को नौकरी से निकाला गया, तब जाकर इन्हें अहसास हुआ कि ये साइबर फ्रॉड का शिकार हुए हैं। इसमें युवाओं की कोई गलती नहीं है। प्राइवेट कोचिंग सेंटर वालों ने युवाओं को यह कह कर ट्रेनिंग दी थी कि उन्हें 'नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' का प्रमाण पत्र मिलेगा।
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'अलॉयंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' के चेयरमैन एचआर सिंह और महासचिव रणबीर सिंह
एक-डेढ़ साल नौकरी के बाद हुए बाहर
जब इन युवाओं ने एक डेढ़ साल की नौकरी कर ली, तब एकाएक इन्हें बाहर कर दिया गया। एनएसडीसी ने भी कह दिया कि उनके यहां से 2015 से 2023 के बीच एनएसक्यूएफ लेवल-1 का कोई सर्टिफिकेट जारी ही नहीं किया गया। एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, अब ये युवक बीएसएफ में नौकरी कर चुके हैं। इन्हें अच्छे से अपने काम का अंदाजा है। ऐसे में सरकार को इन्हें दोबारा से सेवा में लेने का आदेश जारी करना चाहिए। गृह राज्य मंत्री को बीएसएफ के इन पूर्व जवानों के मामले से अवगत कराया गया है। बीएसएफ डीजी से भी आग्रह किया गया है कि वे कोई बीच का रास्ता निकालें। अगर कहीं भी सुनवाई नहीं हुई तो ये युवक नई दिल्ली के जंतर मंतर पर अक्तूबर में भूख हड़ताल करेंगे। कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा।
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क्या है मामला?
बीएसएफ में डेढ़ से दो साल की सेवा कर चुके तरूण कुमार, गौरव, दीपक, रिंकू कुमार और मुकेश कुमार ने बताया कि इस मामले में उनकी कोई गलती नहीं है। कोडरमा 'झारखंड' में जिस व्यक्ति ने युवाओं को यह भरोसा दिया था कि ट्रेनिंग के बाद उन्हें एनएसडीसी का प्रमाण पत्र मिलेगा। अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन कोचिंग संस्थानों की बातों पर यकीन कर प्रमाणपत्र ले लिए। बाद में जब मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उस व्यक्ति ने कई राज्यों में ऐसे ही युवाओं को उक्त प्रमाण पत्र देकर ठगा है। युवाओं ने बताया कि अब उनके सामने रोजी रोटी का संकट आ गया है। जवानों की नौकरी छूटने से उनके परिवार भी प्रभावित हो रहे हैं। कई जवानों द्वारा 5-7 लाख रुपए का बैंक लोन भी लिया हुआ है। ऐसे में वे अब लोन कैसे चुका पाएंगे। अनेक जवानों को बढ़िया व स्वादिष्ट खाना बनाने के लिए उच्च अधिकारियों द्वारा नकद पुरस्कार भी मिल चुके हैं। युवाओं का कहना था कि कुछ जवानों को इसी प्रमाण पत्र पर नौकरी में बनाए रखा गया है।