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सुप्रीम कोर्ट अपडेट: प्रेस की आजादी पर अदालत पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार; पेटा ने माधुरी हथिनी को लेकर क्या मांग की?

Wed, 30 Sep 2026 05:48 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 30 Sep 2026 05:48 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में आज कई अहम मामलों को लेकर हलचल रही। वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने विधायकों के विशेषाधिकार और प्रेस की आजादी से जुड़े मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं, पेटा इंडिया ने हथिनी माधुरी के पुनर्वास को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। आइए विस्तार से सभी मामलों को जानते हैं...

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Supreme Court Update: Senior Journalist Moves Court Over Press Freedom, What Did PETA Seek for Elephant
सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

वरिष्ठ टीवी पत्रकार अजीत अंजुम ने विधायकों के विधायी विशेषाधिकार की सीमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप करने और अदालत की सहायता करने की अनुमति मांगी है। सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ 6 अक्टूबर से इस मामले पर सुनवाई शुरू करेगी। यह मामला 2003 में पत्रकार एन रवि और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं से जुड़ा है। उस समय तमिलनाडु विधानसभा ने विशेषाधिकार के कथित उल्लंघन के मामले में पत्रकारों को 15 दिन की साधारण कैद की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में छह पत्रकारों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। अंजुम ने अपनी याचिका में कहा है कि मामला केवल संबंधित पक्षों तक सीमित नहीं है, बल्कि विधायिका, न्यायपालिका और स्वतंत्र प्रेस के बीच संवैधानिक संबंधों से जुड़ा है। उन्होंने पूछा है कि विधानसभा की कार्यवाही की आलोचना या उसकी निष्पक्ष रिपोर्टिंग कब विशेषाधिकार का उल्लंघन मानी जा सकती है। मामले में संविधान के अनुच्छेद 194(3), 19(1)(ए) और 21 की व्याख्या भी होगी। पहले अलग-अलग पीठों के फैसलों में इस मुद्दे पर अलग राय सामने आई थी। इसी कारण मामले को सात जजों की पीठ के पास भेजा गया है।

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पेटा ने सुप्रीम कोर्ट से फिर वंतारा भेजने की मांग की
नई दिल्ली, 30 सितंबर। पशु अधिकार संगठन पेटा इंडिया ने हथिनी माधुरी के पुनर्वास को फिर से वंतारा, जामनगर में बहाल करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। संगठन का आरोप है कि माधुरी को 11-12 सितंबर को कोल्हापुर के नंदानी मठ वापस भेजे जाने के बाद फिर जंजीरों में बांधकर अकेले रखा जा रहा है। पेटा इंडिया के मुताबिक, मठ पहुंचने के दौरान माधुरी को पटाखों, भीड़ और तेज हॉर्न का सामना करना पड़ा। संगठन का दावा है कि वंतारा में रहने के दौरान माधुरी को दूसरे हाथियों के साथ रहने, खुले में चलने और विशेष पशु चिकित्सा सुविधा मिलने का अवसर मिला था। संगठन ने कहा कि माधुरी लंबे समय तक मठ में जंजीरों में रही थी और उसे पैरों की गंभीर समस्या, गठिया, फ्रैक्चर और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां थीं। पेटा का कहना है कि विशेषज्ञों की एक समिति ने भी मठ की व्यवस्था को लंबे समय के पुनर्वास के लिए उपयुक्त नहीं माना था। पेटा इंडिया ने दावा किया कि हाई पावर कमेटी ने 9 सितंबर को माधुरी को मठ लौटने की अनुमति दी। इसके बाद संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप की मांग की है। पेटा के अनुसार, इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने माधुरी को वंतारा में दीर्घकालिक देखभाल के निर्देशों को बरकरार रखा था।

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