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चिंता: दुनियाभर में 30 करोड़ लोग दुर्लभ रोग से पीड़ित, अब तक 10 हजार से अधिक की पहचान; महंगा उपचार बड़ी चुनौती

अमर उजाला नेटवर्क Published by: Shubham Kumar Updated Tue, 03 Mar 2026 05:11 AM IST
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300 million people worldwide suffer from rare diseases more than 10,000 have been identified so far
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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दुनिया भर में लगभग 30 करोड़ लोग किसी न किसी दुर्लभ रोग से पीड़ित हैं। अब तक 6,000 से 10,000 दुर्लभ रोगों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से करीब 72 प्रतिशत रोग आनुवांशिक कारणों से होते हैं। यह दुर्लभ रोग अब एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बन चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य सभा (डब्ल्यूएचए) ने मई 2025 में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित करते हुए दुर्लभ रोगों को वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकता घोषित किया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य समय पर और सटीक जांच सुनिश्चित करना, उपचार सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाना, अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और विशेष स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है।
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नीति स्तर पर यह स्वीकार किया गया है कि दुर्लभ रोग केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी अंतरराष्ट्रीय रोग वर्गीकरण प्रणाली आईसीडी-11 में लगभग 5,500 दुर्लभ रोगों को शामिल किया गया है।
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मरीजों तक उचित इलाज कब पहुंचेगा?
इस मानकीकृत वर्गीकरण से डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को रोग की पहचान, दस्तावेजीकरण और उपचार योजना बनाने में सुविधा मिलती है। आईसीडी-11 में शामिल किए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डाटा संग्रह, शोध सहयोग और स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में भी सुधार हुआ है। सही और समय पर वर्गीकरण से निदान की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जिससे मरीजों को उचित इलाज तक जल्दी पहुंच मिलती है।

पहचान और निदान में देरी से बढ़ रहा मर्ज
दुर्लभ रोगों के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती समय पर बीमारी की पहचान हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, जांच सुविधाओं का अभाव और आनुवंशिक परीक्षण की सीमित उपलब्धता समस्या को और जटिल बना देती है। इन रोगों का उपचार अक्सर महंगा होता है। इससे प्रभावित परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ जाता है। 30 करोड़ से अधिक लोगों के सामने शारीरिक, मानसिक और आर्थिक चुनौतियां खड़ी होती हैं, जो स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक गंभीर संकेत हैं।

भारत में बढ़ी दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता
भारत में दुर्लभ रोग उन बीमारियों को माना जाता है जो आबादी के बहुत छोटे हिस्से को प्रभावित करती हैं। इन रोगों के लिए विशेष जांच, उन्नत प्रयोगशाला सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता होती है। कई मामलों में मरीजों को सही निदान मिलने में लंबा समय लग जाता है। हालांकि, सरकार और स्वास्थ्य संस्थान अब दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नीतिगत सुधारों पर काम कर रहे हैं, ताकि जांच और उपचार की सुविधा बेहतर बनाई जा सके।
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