J&K: जम्मू-कश्मीर में छिपे पाकिस्तान के 50 'ए' ग्रेड दहशतगर्द, ओवर ग्राउंड वर्कर का नेटवर्क तोड़ना बना चुनौती
जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में पड़ोसी मुल्क 'पाकिस्तान' के लगभग 50 'ए' ग्रेड दहशतगर्द छिपे हुए हैं। इनमें से ज्यादातर आतंकियों की ट्रेनिंग 'अफगानिस्तान' फ्रंट पर हुई है। कश्मीर घाटी में इनके अलावा दर्जनभर लोकल आतंकी भी सक्रिय बताए गए हैं। 'ए' ग्रेड पाकिस्तानी दहशतगर्दों को 'ओवर ग्राउंड वर्कर' से भरपूर मदद मिल रही है।
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जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में पड़ोसी मुल्क 'पाकिस्तान' के लगभग 50 'ए' ग्रेड दहशतगर्द छिपे हुए हैं। इनमें से ज्यादातर आतंकियों की ट्रेनिंग 'अफगानिस्तान' फ्रंट पर हुई है। कश्मीर घाटी में इनके अलावा दर्जनभर लोकल आतंकी भी सक्रिय बताए गए हैं। 'ए' ग्रेड पाकिस्तानी दहशतगर्दों को 'ओवर ग्राउंड वर्कर' से भरपूर मदद मिल रही है। इनके नेटवर्क को तोड़ना सुरक्षा बलों के लिए किसी बड़ी 'चुनौती' से कम नहीं है। जेकेपी, सेना और बीएसएफ व सीआरपीएफ द्वारा 'ओवर ग्राउंड वर्कर' तक पहुंचने के लिए लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है। श्रीनगर व दूसरे इलाकों में संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'जैश-ए-मोहम्मद' और 'लश्कर-ए-तैयबा' एवं इनके मुखौटे संगठनों से जुड़े 'ओजीडब्लू' की संख्या दो सौ से ज्यादा बताई जा रही है। ये लोग, आतंकियों को राशन, गैस सिलेंडर और टैंट सप्लाई के अलावा सेना व दूसरे केंद्रीय बलों की मूवमेंट का अलर्ट भी देते हैं।
'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' से मिल रही भरपूर मदद
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के ऊपरी इलाकों में छिपे दहशतगर्दों के खात्मे के लिए सुरक्षा बलों द्वारा सर्च अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। छातरू बेल्ट में मंडराल-सिंहपोरा के पास सोनार गांव में मुठभेड़ के दौरान सेना का एक शहीद हो गया, जबकि सात अन्य घायल बताए गए हैं। सुरक्षा बलों ने उस ठिकाने को ढूंढ लिया, जहां पर आतंकी छिपे थे। हालांकि, सभी आतंकी घने जंगल में भाग गए। यह ठिकाना 12 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर तैयार किया गया था। जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य बताते हैं कि चावल, अंडे, घी व सिलेंडर, आतंकियों के ठिकाने पर मिला ये सामान कहां से आया होगा। जाहिर सी बात है कि ये सामान, पाकिस्तान से तो नहीं आया। इस सामान को किसी ने आतंकियों के ठिकाने तक पहुंचाया भी होगा। मतलब साफ है कि आतंकियों को 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' से भरपूर मदद मिल रही है। सुरक्षा बल, ऐसे ओवर ग्राउंड वर्कर्स की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।
ओजीडब्लू में सरकारी महकमों के कर्मचारी भी
जम्मू-कश्मीर से जुड़े रक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) का कहना है कि अभी तक राज्य में पाकिस्तान से आए अनेक आतंकी छिपे हुए हैं। इन आतंकियों का ठिकाना, पहाड़ियों पर बनी गुफाएं हैं। दहशतगर्दों को अपनी जरुरत का सारा सामान आसानी से मिल जाता है। ओजीडब्लू में सरकारी महकमों के कर्मचारी भी शामिल रहे हैं। जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा अतीत में ऐसे ही आरोपों के चलते दर्जनों कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें वन, शिक्षा और राजस्व से जुड़े कर्मचारी, सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं। ये ओवर ग्राउंड वर्कर ऐसे होते हैं, जिन्हें पब्लिक में एक पहचान प्राप्त होती है। उन पर किसी को शक नहीं होता। वे आसानी से आतंकियों को मदद मुहैया कराते हैं। ये लोग, बिना नेट का मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हैं। बतौर कैप्टन अनिल गौर, इनमें से कुछ लोगों को पैसा भी दिया जाता है, जबकि कई लोग ऐसे होते हैं, जिनका माइंड वॉश कर उन्हें टॉस्क सौंपा जाता है। वे अपनी मर्जी से ओजीडब्लू बन जाते हैं।
नेपाल/बांग्लादेश बॉर्डर से भी आतंकियों की एंट्री
आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने पिछले दिनों बताया था कि जम्मू-कश्मीर में 2025 के दौरान 31 टेररिस्ट मारे गए थे। इनमें 65 फीसदी पाकिस्तानी थे। मौजूदा समय में पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी के दूसरी तरफ करीब आठ आतंकी कैंप एक्टिव हैं। दो आतंकी कैंप आईबी के पास हैं, जबकि छह एलओसी के निकट स्थित हैं। जम्मू कश्मीर में 2014 के दौरान 104 आतंकवादी मारे गए थे। 2015 में 97, 2016 में 140, 2017 में 210, 2018 में 257, 2019 में 157, 2020 में 221, 2021 में 180, 2022 में 187, 2023 में 76 और 2024 में 75 आतंकियों का खात्मा हुआ था। अब जेएंडके में ज्यादातर पाकिस्तानी आतंकवादी मौजूद हैं। लोकल दहशतगर्दों की संख्या अब लगातार कम होती जा रही है। मौजूदा समय में लोकल आतंकियों की संख्या लगभग दस बताई गई है। नेपाल या बांग्लादेश बॉर्डर के रास्ते भी आतंकियों की एंट्री संभव है। पाकिस्तान के लांच पैड पर करीब 120 आतंकियों की मौजूदगी बताई जा रही है।
'अफगानिस्तान' फ्रंट पर हुई दहशतगर्दों की ट्रेनिंग
जम्मू और कश्मीर की सुरक्षा स्थिति पर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सर्दियां में सीमा पार के आतंकवादी, बर्फबारी का फायदा उठाकर घुसपैठ न कर पाएं, इसके लिए हमारे सुरक्षा बल हर तरह से तैयार रहें। 'बीएसएफ' द्वारा बॉर्डर पर सर्विलांस के लिए तकनीकी उपकरणों की मदद ली जा रही है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तानी मूल के अधिकांश दहशतगर्दों की ट्रेनिंग 'अफगानिस्तान' फ्रंट पर हुई है। इन आतंकियों तक पहुंचना, सुरक्षा बलों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ये आतंकी 'ए' ग्रेड वाली श्रेणी में आते हैं। इनके रहते जेएंडके में आतंकी हमले की आशंका, सदैव बनी रहती है। इन आतंकियों को लोकल स्पोर्ट मिल रही है। बीएसएफ के आईजी अशोक कुमार के अनुसार, सीमा पार के लांचिंग पैड पर घुसपैठ के लिए तैयार बैठे आतंकी, बॉर्डर पार करने की कोशिश नहीं करते, ऐसा नहीं है। वे प्रयास तो करते हैं, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिलती। भारतीय सुरक्षा बलों की सतर्कता से उनके मंसूबे नाकाम हो जाते हैं। सर्दियों में घुसपैठ के प्रयासों में वृद्धि होने की संभावना है।
हाई रैंक टेरेरिस्ट बने हैं बड़ा खतरा
पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच कई बड़ी मुठभेड़ हुई हैं। राजौरी के बाजीमाल इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में सेना के कैप्टन एमवी प्रांजल, कैप्टन शुभम और हवलदार माजिद सहित चार शहादत हुई थी। राजौरी मुठभेड़ में जो दो आतंकी मारे गए थे, उनमें से एक पाकिस्तानी आतंकी 'क्वारी' भी था। वह पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर ए तैयबा' का हाई रैंक टेरोरिस्ट था। उसे पाकिस्तान/अफगानिस्तान फ्रंट पर ट्रेंड किया गया था। जेएंडके में जितनी भी बड़ी मुठभेड़ हुई हैं, उनमें ज्यादातर हाई रैंक वाले ट्रेंड आतंकी मारे गए हैं। सितंबर 2023 में अनंतनाग जिले के कोकेरनाग क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल 'आरआर' के कमांडिंग अफसर (कर्नल) मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष और जम्मू कश्मीर पुलिस के डीएसपी हुमायूं भट्ट शहीद हो गए थे। इस मुठभेड़ में दो अन्य जवानों ने भी शहादत दी। 2020 के बाद जम्मू-कश्मीर में यह पहली घटना थी, जिसमें सेना के कमांडिंग अफसर शहीद हुए थे।
मुखबिरों के माध्यम से ही मिल रही सूचना
पाकिस्तान से आए आतंकी, जम्मू कश्मीर के जंगलों या पहाड़ी गुफाओं में छिपे हैं। वे सामान्य फोन से बातचीत नहीं करते। यही वजह है कि उन्हें आसानी से ट्रैक नहीं किया जा सकता। सुरक्षा बलों को ज्यादातर सूचनाएं मुखबिरों के माध्यम से ही मिलती हैं। हालांकि मुखबिरों की सूचना को क्रॉस चैक किया जाता है, लेकिन कई बार इंटेल इनपुट, पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होता। उस स्थिति में जोखिम या नुकसान की संभावना बनी रहती है। अब घाटी में नए आतंकी सामने नहीं आ रहे। उनकी भर्ती पर काफी हद तक नकेल कस चुकी है। अब वहां पर जो आतंकी मौजूद हैं, वही अपने स्लीपर सेल या हाईब्रिड टेरोरिस्ट की मदद से हमलों को अंजाम दे रहे हैं।