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ED: पश्चिम बंगाल में 25000 सहायक शिक्षकों का भर्ती घोटाला, रिश्वत लेकर जारी किए गए थे नियुक्ति पत्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 21 Jan 2026 05:56 PM IST
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प्रवर्तन निदेशालय
- फोटो : सोशल मीडिया
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पश्चिम बंगाल में 25000 सहायक शिक्षकों के भर्ती घोटाले में रिश्वत लेकर नियुक्ति पत्र जारी किए गए। भर्ती प्रक्रिया समाप्त होने की तय समय सीमा के बाद भी नियुक्ति पत्र देने का काम चलता रहा। ईडी ने इस मामले में अभी तक आरोपियों की 698 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। सर्वोच्च न्यायालय ने गत वर्ष तीन अप्रैल को एसएलपी (सिविल) संख्या 9586/2024 में पश्चिम बंगाल राज्य बनाम बैशाखी भट्टाचार्य (चटर्जी) और अन्य के मामले में अपने फैसले के माध्यम से 25000 से अधिक शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया को दूषित और दागदार बताया था।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने पश्चिम बंगाल केंद्रीय विद्यालय सेवा आयोग (एसएससी) सहायक शिक्षक भर्ती घोटाले (कक्षा 9 से 12) के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत लगभग 57.78 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। जब्त की गई संपत्तियां विधायक जीवन कृष्ण साहा, प्रसन्ना कुमार रॉय और अन्य की हैं। इन संपत्तियों में उत्तर 24 परगना जिले के राजारहाट, न्यू टाउन, पाथरघाटा, गरगरी और अन्य आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ मुर्शिदाबाद और पूर्वी बर्धमान जिलों में स्थित कई आवासीय अपार्टमेंट, विला और भूमि के टुकड़े शामिल हैं। जब्त की गई संपत्तियों में कोलकाता के एचआईडीको द्वारा विकसित क्षेत्र भी शामिल हैं। ये संपत्तियां कक्षा 9 से 12 तक के सहायक शिक्षकों की अवैध नियुक्तियों से प्राप्त अपराध की आय से अधिग्रहित की गई हैं।
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कोलकाता उच्च न्यायालय, के निर्देश पर सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर ईडी ने इस मामले की जांच शुरू की थी। यह जांच, पश्चिम बंगाल केंद्रीय विद्यालय सेवा आयोग द्वारा संचालित भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हुई हेराफेरी से संबंधित है, जिसमें ओएमआर शीट और व्यक्तित्व परीक्षण के अंकों में हेरफेर किया गया था। अयोग्य उम्मीदवारों को अवैध रिश्वत के बदले में नियुक्तियां करने के लिए पैनल की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी नियुक्तियां की गईं। ईडी की जांच में पता चला कि प्रसन्ना कुमार रॉय इस घोटाले में मुख्य बिचौलिए के रूप में शामिल थे। उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अयोग्य उम्मीदवारों से अवैध नियुक्तियां दिलाने के लिए भारी मात्रा में नकदी एकत्र की। करोड़ों रुपये की अपराध से प्राप्त धनराशि को कंपनियों, एलएलपी और बैंक खातों के एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग किया गया। अंततः अचल संपत्तियों के अधिग्रहण में इसका उपयोग किया गया।
ईडी की जांच में पता चला है कि सहायक शिक्षक भर्ती घोटाले में मुख्य आरोपी टीएमसी विधायक जीवन कृष्ण साहा, अयोग्य उम्मीदवारों से ग्रुप सी, डी और सहायक शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति दिलाने के लिए प्राप्त अपराध की धनराशि को इकट्ठा करने और उसके लेन-देन में सक्रिय रूप से शामिल थे। मुर्शिदाबाद स्थित उनके घर पर तलाशी के दौरान भागने की कोशिश करने पर ईडी ने 25 अगस्त 2025 को जीवन कृष्ण साहा को गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह स्थापित हुआ कि इस प्रकार एकत्रित अपराध की धनराशि का उपयोग जीवन कृष्ण साहा और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए किया गया था। ये संपत्तियां, मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और पूर्वी बर्धमान जिलों में स्थित हैं। लगभग 3.01 करोड़ रुपये मूल्य की ये संपत्तियां अवैध भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त धन के शुद्धिकरण से अर्जित की गई थीं।
जांच में यह भी पता चला है कि प्रसन्ना कुमार रॉय की करीबी सहयोगी/पूर्व पत्नी नीलिमा मंगल के नाम पर बड़ी संख्या में संपत्तियां अधिग्रहित की गई थीं। जांच में यह स्थापित हुआ कि इन संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए इस्तेमाल की गई बड़ी धनराशि अवैध भर्ती घोटालों से प्राप्त की गई थी।
इससे पहले, ईडी ने इस मामले में प्रसन्ना कुमार रॉय को गिरफ्तार किया था और माननीय विशेष न्यायालय के समक्ष अभियोग दायर किया था, जिसने धन शोधन के अपराध का संज्ञान लिया है। पश्चिम बंगाल राज्य में ग्रुप सी और डी स्टाफ एसएससी भर्ती घोटाले के मामले में ईडी ने पहले ही 247.2 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। एसएससी सहायक शिक्षक भर्ती घोटाले (9वीं से 12वीं) में ईडी ने पहले ही 238.78 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। पश्चिम बंगाल राज्य में प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले के एक अन्य मामले में, ईडी ने लगभग 154 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त/अटैच की है। इस प्रकार, भर्ती घोटाले के मामलों में ईडी कोलकाता द्वारा की गई कुल जब्ती अब तक 698 करोड़ रुपये हो चुकी है।