भारत में 50 करोड़ लोगों को पौष्टिक भोजन नसीब नहीं: चीन का क्या है आंकड़ा? पाकिस्तान में हालात भयावह
संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2025 तक करीब 49.5 करोड़ लोग पौष्टिक भोजन खरीदने में सक्षम नहीं हैं। हालांकि 2017 की तुलना में 32 करोड़ लोगों की स्थिति में सुधार हुआ है, फिर भी भारत दुनिया के सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। रिपोर्ट में महंगाई, कमजोर सप्लाई सिस्टम और जलवायु परिवर्तन को प्रमुख कारण बताते हुए सरकारों को पौष्टिक भोजन सस्ता और सुलभ बनाने की सलाह दी गई है।
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देश के करीब 50 करोड़ लोग आज भी ऐसे हैं, जो रोजाना पौष्टिक भोजन खरीदने में सक्षम नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत की 35.5% आबादी यानी लगभग 49.5 करोड़ लोग पौष्टिक आहार खरीदने में असमर्थ हैं। हालांकि, भारत में लोगों की आय बढ़ने और सरकारी योजनाओं के प्रभाव से पहले की तुलना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2017 में ऐसे लोगों की संख्या 81 करोड़ थी, जिनकी पहुंच पौष्टिक आहार तक नहीं थी। यानी पिछले आठ वर्षों में करीब 32 करोड़ लोग इस स्थिति से बाहर निकले हैं। इसके बावजूद बड़ी आबादी के कारण भारत अब भी दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां सबसे अधिक लोग पौष्टिक भोजन खरीद पाने में सक्षम नहीं हैं।
दुनिया के दूसरे देशों की स्थिति क्या कहती है?
रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया में 269 करोड़ लोग ऐसा भोजन नहीं खरीद सकते, जिससे शरीर को आवश्यक पोषण मिल सके। हालांकि कुछ वर्ष पहले यह संख्या 313 करोड़ से अधिक थी, यानी वैश्विक स्तर पर हालात में सुधार हुआ है, लेकिन चुनौती अभी भी बनी हुई है। चीन में केवल 11% लोग पौष्टिक आहार खरीदने में दिक्कत महसूस करते हैं, जबकि मलेशिया में यह आंकड़ा महज 1.4% है। फिलीपींस में 45% लोग पौष्टिक भोजन नहीं खरीद पाते। इंडोनेशिया की स्थिति भारत से भी खराब है, जहां 69% आबादी पौष्टिक आहार खरीदने में सक्षम नहीं है। अफ्रीका सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है, जहां हर तीन में से दो लोग पौष्टिक भोजन नहीं खरीद सकते। वहीं, पड़ोसी देश नेपाल की स्थिति भारत की तुलना में काफी बेहतर बताई गई है।
पौष्टिक भोजन महंगा क्यों होता जा रहा है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल अनाज का उत्पादन बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। लोगों की थाली में फल, सब्जियां, दाल, दूध, अंडे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी होने चाहिए। लेकिन इनकी कीमतें कई कारणों से लगातार बढ़ रही हैं। खेत से बाजार तक पहुंचाने की अधिक लागत, कोल्ड स्टोरेज और बेहतर भंडारण सुविधाओं की कमी, परिवहन के दौरान फल और सब्जियों का खराब होना, डीजल, बिजली, मजदूरी और परिवहन खर्च में वृद्धि, साथ ही बाढ़, सूखा और जलवायु परिवर्तन जैसे कारकों का भी खाद्य पदार्थों की कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है।
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यूएन ने सरकारों को क्या सलाह दी है?
यूएन की रिपोर्ट के अनुसार, समस्या सिर्फ भूख की नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन तक पहुंच की भी है। कई परिवारों का पेट तो भर जाता है, लेकिन उनकी थाली में रोजाना फल, दूध, दाल, अंडा, हरी सब्जियां और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ नहीं पहुंच पाते। इसका असर बच्चों में कुपोषण और वयस्कों में विभिन्न बीमारियों के बढ़ते खतरे के रूप में सामने आता है। रिपोर्ट में दुनियाभर की सरकारों को सलाह दी गई है कि वे फल और सब्जियों का उत्पादन बढ़ाएं, कोल्ड स्टोरेज और सप्लाई सिस्टम को मजबूत करें, खेत से बाजार तक होने वाले नुकसान को कम करें और ऐसी व्यवस्था विकसित करें, जिससे पौष्टिक भोजन आम लोगों की पहुंच और उनकी जेब, दोनों के अनुकूल हो सके।