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ED: 19425 खरीदारों को घर का सपना दिखा जुटाए 2004 करोड़, फिर चार निदेशक ने किया 467 करोड़ का गबन, अब गिरफ्तार

डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला Published by: Asmita Tripathi Updated Tue, 02 Jun 2026 03:04 PM IST
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सार

ईडी ने गृह खरीदार धोखाधड़ी मामले में मेसर्स अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड के प्रमोटरों/निदेशकों को गिरफ्तार किया है। विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने चारों आरोपियों को ईडी की पांच दिन की हिरासत में भेज दिया है।

9,425 homebuyers were duped of Rs 2,004 crore by promising assured returns, and four directors were arrested.
ईडी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

ईडी ने गृह खरीदार धोखाधड़ी मामले में मेसर्स अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड के प्रमोटरों/निदेशकों को गिरफ्तार किया है। इनमें अवधेश कुमार गोयल, रजनीश मित्तल, अतुल गुप्ता और विकास गुप्ता शामिल हैं। विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने चारों आरोपियों को ईडी की पांच दिन की हिरासत में भेज दिया है। आरोप है कि इन्होंने 19425 घर खरीदारों से सुनिश्चित रिटर्न का वादा कर 2004 करोड़ रुपये जुटाए थे। बाद में निवेशकों/खरीदारों को समय पर न तो घर मिला और न उनका पैसा वापस किया गया। जांच पड़ताल में लगभग 467 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया है। 



प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने मेसर्स अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड (ईआईएल) और उसकी समूह संस्थाओं के खिलाफ चल रही जांच के सिलसिले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत उक्त गिरफ्तारियां की हैं। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा मेसर्स अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड, उसके निदेशकों और संबंधित संस्थाओं के खिलाफ आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई पांच एफआईआर के आधार पर ईडी ने इस केस की जांच शुरू की है। इसके अलावा, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने भी अर्थ ग्रुप के प्रवर्तकों/निदेशकों के खिलाफ कंपनी अधिनियम की धारा 447 के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज की है। 
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समूह ने आवासीय/व्यावसायिक इकाइयों की समय पर डिलीवरी और सुनिश्चित रिटर्न का वादा करके 19,425 से अधिक घर खरीदारों और निवेशकों से लगभग 2,004 करोड़ रुपये एकत्र किए। जांच में यह भी पता चला कि लगभग 467 करोड़ रुपये समूह की विभिन्न संस्थाओं और संबंधित कंपनियों/व्यक्तियों के माध्यम से गबन किए गए। हालांकि, खरीदारों/निवेशकों से पर्याप्त धनराशि प्राप्त करने के बावजूद, परियोजनाएं या तो अधूरी छोड़ दी गईं या इकाइयों का कब्ज़ा नहीं सौंपा गया। इससे घर खरीदारों और निवेशकों को अनुचित नुकसान हुआ। जांच में यह भी पता चला है कि अनुसूचित अपराधों से प्राप्त अपराध की आय का एक हिस्सा समूह के प्रवर्तकों/निदेशकों से जुड़े विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों के नाम पर चल और अचल संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए उपयोग किया गया था।
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इससे पहले, अप्रैल 2026 में ईडी ने पीएमएलए के प्रावधानों के तहत दिल्ली-एनसीआर में अर्थ ग्रुप से जुड़े विभिन्न परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। इसमें लगभग 6.30 करोड़ रुपये नकद, 8.78 करोड़ रुपये के आभूषण और 100 करोड़ रुपये से अधिक के अनुमानित मूल्य वाली 100 से अधिक अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए थे।

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