सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   A Unique initiative by Govt, scholarships from small towns to global institutions are giving wings to dreams

एनओएस: भारत सरकार की अनूठी पहल, छोटे शहरों से वैश्विक संस्थानों तक छात्रवृत्तियां दे रहीं सपनों को उड़ान

सुधांश पंत, सचिव, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग Published by: Pavan Updated Fri, 05 Jun 2026 07:40 AM IST
विज्ञापन
सार

छात्रवृत्तियों का महत्व न केवल शिक्षा के लिए धन देने में है, बल्कि उन छात्रों के आसपास स्थिरता का एक ऐसा माहौल बनाने में भी है जो अक्सर पहली बार शैक्षणिक और सामाजिक दुनिया में कदम रख रहे होते हैं।  छात्रवृत्तियां उनके लिए महत्वपूर्ण सहायता प्रणाली के रूप में कार्य करती हैं।

A Unique initiative by Govt, scholarships from small towns to global institutions are giving wings to dreams
सुधांश पंत, सचिव, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार

भारत के सुदूर और शांत गांवों से लेकर ऑक्सफोर्ड के ऐतिहासिक मैदानों और जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय की आधुनिक प्रयोगशालाओं तक, एक मूक क्रांति आकार ले रही है। यह एक ऐसी क्रांति है जो किसी विशेषाधिकार या पारिवारिक संपत्ति के बल पर नहीं, बल्कि छात्रों की शैक्षणिक दृढ़ता और सरकार के दूरदर्शिता के दम पर आगे बढ़ रही है। इस बड़े बदलाव के केंद्र में है राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति (एनओएस) योजना। भारत सरकार की यह अनूठी पहल आज उन भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक दीवारों को चुपचाप ढहा रही है, जिन्होंने सदियों से हाशिए के समुदायों को विश्व स्तरीय शिक्षा से दूर रखा था। 


त्रिपुरा के एक वंचित और दूरदराज के गांव से आने वाले दिपायन भौमिक की कहानी को ही लीजिए। अंतरराष्ट्रीय अवसरों से कोसों दूर रहने के बावजूद दिपायन ने आर्किटेक्ट बनने का सपना देखा। एनओएस छात्रवृत्ति के रूप में मिले जीवनदान के सहारे उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई पूरी की, बल्कि स्टटगार्ट विश्वविद्यालय, जर्मनी से आर्किटेक्चर और अर्बन डिजाइन में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की। आज वे भारत में अपनी खुद की फर्म चला रहे हैं और जर्मन व भारतीय निर्माण शैलियों के मेल से देश के सतत विकास में योगदान दे रहे हैं। इसी तरह, एक दैनिक वेतन भोगी मजदूर के बेटे डॉ. वैथिलिंगम राजेंद्रन ने बचपन की तमाम आर्थिक तंगहाली को पीछे छोड़ते हुए ओक्लाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी (अमेरिका) से रसायन विज्ञान में पीएचडी की और वैज्ञानिक जगत में एक सम्मानित मुकाम हासिल किया।  
विज्ञापन
विज्ञापन


ये छात्र अपने साथ वापस केवल एक डिग्री या ऊंची सैलरी वाली नौकरी नहीं लाते, बल्कि वे अपने समुदाय के लोगों के लिए उम्मीदें, अनगिनत अवसर और आकांक्षाएं लेकर आते हैं। ये उन सैकड़ों अनुसूचित जाति (एससी) के छात्रों में से एक हैं जिनके जीवन की दिशा एनओएस के कारण पूरी तरह से बदल गई है। साल 2014 से एनओएस योजना ने उन परिवारों के छात्रों को सहायता प्रदान की है जिनकी वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है, और उन्हें ब्रिटेन, जर्मनी, यूएस से लेकर ऑस्ट्रेलिया जैसे 21 देशों के विश्वविद्यालयों तक पहुंचाया है। इनमें से कई परिवारों के लिए, किसी विदेशी विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन करने तक के लिए भी पास के किसी साइबर कैफे में जाने की आवश्यकता होती थी।  
विज्ञापन
Trending Videos


12 वर्षों में 764 छात्र हुए लाभान्वित
पिछले 12 वर्षों में, 764 छात्रों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कॉलेजों में प्रवेश लेने के लिए चुना गया है। कई मायनों में, एनओएस योजना प्रत्येक छात्र को दी जाने वाली सहायता के कारण विशिष्ट है। एक अग्रणी वैश्विक विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले एक अकेले छात्र के लिए, ट्यूशन फीस, रहने का खर्च, हवाई किराया, बीमा और पाठ्यक्रम की अवधि के दौरान अन्य शैक्षणिक लागतों को मिलाकर कुल वित्तीय सहायता अक्सर 1 करोड़ रुपये से अधिक हो जाती है और कभी-कभी 2 करोड़ रुपये तक भी पहुंच सकती है।

एनओएस: भारत सरकार की अनूठी पहल
एनओएस योजना सरकार की एक अनूठी पहल है, जो शीर्ष विदेशी विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर और पीएचडी की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह योजना ट्यूशन फीस, यात्रा, रहने का खर्च और अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि किसी विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय में प्रवेश पाना छात्र के परिवार की आर्थिक स्थिति पर निर्भर न हो। ऐसी सैकड़ों कहानियां हैं जहां परिवारों ने पहली बार पासपोर्ट देखा है, और ऐसे कई माता-पिता के उदाहरण हैं जिन्होंने अपने बच्चों को दूर देशों में पढ़ने भेजा है, जबकि वे खुद देश के भीतर कभी कॉलेजों में भी नहीं गए हैं।

दुनिया में एनओएस योजना गिनी-चुनी
दुनिया में ऐसे बहुत कम सार्वजनिक छात्रवृत्ति कार्यक्रम हैं जो सामाजिक रूप से पिछड़े पृष्ठभूमि के किसी व्यक्तिगत छात्र पर इतना बड़ा निवेश करते हैं। इस सहायता का महत्व न केवल प्रदान की गई वित्तीय मदद में है, बल्कि इसके उद्देश्य में भी है। यह योना यह सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता की कल्पना करती है कि वित्तीय परिस्थितियां कुछ विशेष समुदायों के छात्रों के लिए अवसरों को सीमित न करें। कई गांवों और छोटे शहरों में, एक अकेले छात्र की सफलता पूरी पीढ़ी की सोच को बदल देती है। एक पूरा गांव अंतरराष्ट्रीय शिक्षा को एक असंभव सपना नहीं, बल्कि एक सुलभ मंजिल के रूप में देखने लगता है। ऑक्सफोर्ड, एमआईटी या कोलंबिया की कक्षाएं भौगोलिक रूप से भारत के गांवों और छोटे शहरों से दूर लग सकती हैं, फिर भी, राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से ये दूरियां धीरे-धीरे कम हो रही हैं। राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति के लिए आवेदनों का प्रबंधन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से किया जाता है। पात्र उम्मीदवार राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed