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'2031 में ढहा देंगे बंगाल में BJP के सभी कार्यालय': अभिषेक बनर्जी ने दी चेतावनी, किस बात पर भड़के TMC सांसद?
Sat, 18 Jul 2026 09:55 PM IST
Devesh Tripathi
आईएएनएस, कोलकाता
आईएएनएस, कोलकाता
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 18 Jul 2026 09:55 PM IST
सार
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आमतला स्थित पार्टी कार्यालय पर हुई कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस मामले में पहले कलकत्ता हाईकोर्ट और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। उन्होंने दावा किया कि यदि 2031 में तृणमूल कांग्रेस दोबारा सत्ता में आती है तो भाजपा के सभी पार्टी कार्यालयों पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।
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टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को कहा कि अगर उनकी पार्टी 2031 में पश्चिम बंगाल में फिर से सत्ता में आती है तो राज्य में भाजपा के सभी पार्टी कार्यालयों को ध्वस्त कर दिया जाएगा। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि यह ध्वस्तीकरण उसी तरह किया जाएगा, जिस तरह शनिवार को दक्षिण 24 परगना जिले के आमतला स्थित तृणमूल कांग्रेस कार्यालय को गिराया गया।
अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा, "हमने आज हुई कार्रवाई के सभी वीडियो कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के ओएसडी को ईमेल कर दिए हैं। इस मामले में जल्द से जल्द कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। जरूरत पड़ी तो हम सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे। साथ ही मैं कह रहा हूं कि 2031 में जब तृणमूल कांग्रेस फिर से सत्ता में आएगी, तब भाजपा के सभी पार्टी कार्यालयों को भी उसी तरह और उसी कानून के तहत गिराया जाएगा, जिसके तहत आज आमतला स्थित हमारे कार्यालय को गिराया गया।"
टीएमसी कार्यालय तोड़ने पर उठाए सवाल
अभिषेक बनर्जी ने अपने पार्टी कार्यालय को लेकर लगाए गए बूथ कैप्चरिंग के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि अगर कार्यालय का इस्तेमाल चुनाव में गड़बड़ी के लिए होता तो 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग इसे साबित करता।
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उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यालय को राजनीतिक बदले की भावना से गिराया गया। उनके अनुसार कार्रवाई के दौरान भाजपा के झंडे और भगवा गमछे लिए लोग परिसर में घुसे और वहां रखे फर्नीचर व अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा, 'हम पूरे मामले को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे, ताकि कार्रवाई के दौरान कानून का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सके'।
अभिषेक बनर्जी ने बागी नेताओं को दी क्या चुनौती?
इस दौरान अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के बागी नेताओं, विधायकों और लोकसभा सांसदों को भी खुली चुनौती दी। उन्होंने विशेष रूप से उन विधायकों का जिक्र किया जिन्होंने अलग बागी गुट बनाया है और उन सांसदों का भी, जो नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो चुके हैं।
उन्होंने कहा, "मैं उन्हें खुली चुनौती देता हूं कि यदि उनमें से कोई भी वापस पार्टी में लौट आए तो मैं एक घंटे के भीतर अपने पद से इस्तीफा दे दूंगा। लेकिन मुझे पता है कि उनमें से कोई वापस नहीं आएगा। सौदा साफ है। पार्टी छोड़ो, मुझे गालियां दो और बदले में पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां तुम्हें हाथ नहीं लगाएंगी।"
टीएमसी सांसद बोले- पिछले चुनाव में जीत का श्रेय भी मुझे दें
अभिषेक बनर्जी ने कहा, "पार्टी छोड़ने के बाद उन्होंने मेरी आलोचना की और हाल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया। अगर इस बार हार का ठीकरा मेरे सिर फोड़ा जा रहा है, तो पिछले लगातार चुनावों में पार्टी की जीत का श्रेय भी मुझे ही मिलना चाहिए।"
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अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा, "हमने आज हुई कार्रवाई के सभी वीडियो कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के ओएसडी को ईमेल कर दिए हैं। इस मामले में जल्द से जल्द कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। जरूरत पड़ी तो हम सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे। साथ ही मैं कह रहा हूं कि 2031 में जब तृणमूल कांग्रेस फिर से सत्ता में आएगी, तब भाजपा के सभी पार्टी कार्यालयों को भी उसी तरह और उसी कानून के तहत गिराया जाएगा, जिसके तहत आज आमतला स्थित हमारे कार्यालय को गिराया गया।"
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टीएमसी कार्यालय तोड़ने पर उठाए सवाल
अभिषेक बनर्जी ने अपने पार्टी कार्यालय को लेकर लगाए गए बूथ कैप्चरिंग के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि अगर कार्यालय का इस्तेमाल चुनाव में गड़बड़ी के लिए होता तो 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग इसे साबित करता।
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उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यालय को राजनीतिक बदले की भावना से गिराया गया। उनके अनुसार कार्रवाई के दौरान भाजपा के झंडे और भगवा गमछे लिए लोग परिसर में घुसे और वहां रखे फर्नीचर व अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा, 'हम पूरे मामले को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे, ताकि कार्रवाई के दौरान कानून का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सके'।
अभिषेक बनर्जी ने बागी नेताओं को दी क्या चुनौती?
इस दौरान अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के बागी नेताओं, विधायकों और लोकसभा सांसदों को भी खुली चुनौती दी। उन्होंने विशेष रूप से उन विधायकों का जिक्र किया जिन्होंने अलग बागी गुट बनाया है और उन सांसदों का भी, जो नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो चुके हैं।
उन्होंने कहा, "मैं उन्हें खुली चुनौती देता हूं कि यदि उनमें से कोई भी वापस पार्टी में लौट आए तो मैं एक घंटे के भीतर अपने पद से इस्तीफा दे दूंगा। लेकिन मुझे पता है कि उनमें से कोई वापस नहीं आएगा। सौदा साफ है। पार्टी छोड़ो, मुझे गालियां दो और बदले में पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां तुम्हें हाथ नहीं लगाएंगी।"
टीएमसी सांसद बोले- पिछले चुनाव में जीत का श्रेय भी मुझे दें
अभिषेक बनर्जी ने कहा, "पार्टी छोड़ने के बाद उन्होंने मेरी आलोचना की और हाल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया। अगर इस बार हार का ठीकरा मेरे सिर फोड़ा जा रहा है, तो पिछले लगातार चुनावों में पार्टी की जीत का श्रेय भी मुझे ही मिलना चाहिए।"