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Pune Land Deal: पार्थ पवार से जुड़ी 300 करोड़ की डील रद्द, कार्यकर्ता ने उठाए थे सवाल; जानें अब तक क्या हुआ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शिवम गर्ग
Updated Sat, 08 Nov 2025 09:04 AM IST
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सार
पुणे के एक कार्यकर्ता ने अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़े 300 करोड़ रुपये के मुंधवा जमीन सौदे में स्टाम्प शुल्क माफी का पर्दाफाश किया। अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए, लेकिन राजनीतिक तूफ़ान के बीच अब सौदा रद्द कर दिया गया है।
पुणे लैंड डील विवाद
- फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी 300 करोड़ रुपये की मुंधवा जमीन डील पर नया खुलासा हुआ है। इस सौदे में स्टांप ड्यूटी माफ किए जाने की जानकारी एक सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रशासन को दी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब यह मामला राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है और शुक्रवार शाम को यह सौदा रद्द कर दिया गया।
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जानकारी के मुताबिक, पुणे के सामाजिक कार्यकर्ता ‘छावा कामगार यूनियन’ के संस्थापक अध्यक्ष दिनकर कोटकर ने 5 जून को संयुक्त जिला रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर बताया था कि 20 मई को हुए 300 करोड़ रुपये के जमीन सौदे में 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी गलत तरीके से माफ की गई है।
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कोटकर ने आरोप लगाया कि यह छूट नियमों के विपरीत दी गई और सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ। उन्होंने 23 जून को फिर से रिमाइंडर पत्र भेजा, लेकिन विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। कोटकर ने यह भी बताया कि उन्हें मामले से दूर रहने की धमकी दी गई थी। उन्होंने कहा एक व्यक्ति ने मुझे चेतावनी दी कि अगर मैं पीछे नहीं हटा तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
ये भी पढ़ें- अजीत पवार के बेटे पर सरकारी जमीन हड़पने का आरोप: 300 करोड़ रुपये का जमीन सौदा मुश्किल में, तहसीलदार निलंबित
अजीत पवार और उनके बेटे पार्थ (फाइल)
- फोटो : एएनआई
पार्थ पवार से जुड़ी 300 करोड़ की डील रद्द
संयुक्त जिला रजिस्ट्रार संतोष हिंगणे ने इस शिकायत की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई। जांच में पता चला कि जमीन का विक्रय विलेख आधिकारिक रिकॉर्ड में बदलाव कर तैयार किया गया था। संयुक्त IGR राजेंद्र मुत्थे, जो राज्य सरकार के आदेश पर बनी जांच समिति का नेतृत्व कर रहे हैं, ने कहा कि शिकायत के आधार पर पूरी प्रक्रिया की 7 दिनों में रिपोर्ट दी जाएगी। इस बीच, शुक्रवार शाम अजित पवार ने खुद घोषणा की कि मुनधवा जमीन सौदा रद्द कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बेटे पार्थ पवार को इस बात की जानकारी नहीं थी कि जमीन सरकारी है।
जमीन सौदे की रद्दीकरण पर चुकाने होंगे 42 करोड़ रुपये, देना होगा दोगुना स्टांप ड्यूटी
उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी अमाडिया एंटरप्राइजेज को पुणे में प्रमुख जमीन की बिक्री रद्द करने पर अब दोगुनी स्टांप ड्यूटी यानी करीब 42 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। अब पंजीकरण और स्टांप विभाग ने कंपनी को सूचित किया है कि रद्दीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्हें 7 फीसदी अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी देनी होगी। विभाग ने बताया कि कंपनी को पहले दी गई छूट के साथ-साथ अब रद्दीकरण पर कुल 14 फीसदी स्टांप ड्यूटी (5% महाराष्ट्र स्टांप एक्ट, 1% लोकल बॉडी टैक्स, 1% मेट्रो सेस और समान दर रद्दीकरण पर) देनी होगी।
इन तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
रजिस्ट्रार कार्यालय के महानिरीक्षक ने पिंपरी चिंचवाड़ पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई। दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवानी और सब-रजिस्ट्रार आरबी तारू के ख़िलाफ़ कथित गबन और धोखाधड़ी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। शीतल पर पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन के 272 'मालिकों' का प्रतिनिधित्व करने का आरोप है।
संयुक्त जिला रजिस्ट्रार संतोष हिंगणे ने इस शिकायत की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई। जांच में पता चला कि जमीन का विक्रय विलेख आधिकारिक रिकॉर्ड में बदलाव कर तैयार किया गया था। संयुक्त IGR राजेंद्र मुत्थे, जो राज्य सरकार के आदेश पर बनी जांच समिति का नेतृत्व कर रहे हैं, ने कहा कि शिकायत के आधार पर पूरी प्रक्रिया की 7 दिनों में रिपोर्ट दी जाएगी। इस बीच, शुक्रवार शाम अजित पवार ने खुद घोषणा की कि मुनधवा जमीन सौदा रद्द कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बेटे पार्थ पवार को इस बात की जानकारी नहीं थी कि जमीन सरकारी है।
जमीन सौदे की रद्दीकरण पर चुकाने होंगे 42 करोड़ रुपये, देना होगा दोगुना स्टांप ड्यूटी
उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी अमाडिया एंटरप्राइजेज को पुणे में प्रमुख जमीन की बिक्री रद्द करने पर अब दोगुनी स्टांप ड्यूटी यानी करीब 42 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। अब पंजीकरण और स्टांप विभाग ने कंपनी को सूचित किया है कि रद्दीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्हें 7 फीसदी अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी देनी होगी। विभाग ने बताया कि कंपनी को पहले दी गई छूट के साथ-साथ अब रद्दीकरण पर कुल 14 फीसदी स्टांप ड्यूटी (5% महाराष्ट्र स्टांप एक्ट, 1% लोकल बॉडी टैक्स, 1% मेट्रो सेस और समान दर रद्दीकरण पर) देनी होगी।
इन तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
रजिस्ट्रार कार्यालय के महानिरीक्षक ने पिंपरी चिंचवाड़ पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई। दिग्विजय पाटिल, शीतल तेजवानी और सब-रजिस्ट्रार आरबी तारू के ख़िलाफ़ कथित गबन और धोखाधड़ी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। शीतल पर पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन के 272 'मालिकों' का प्रतिनिधित्व करने का आरोप है।
पहले भी बयान दे चुके हैं अजीत, कहा- मुख्यमंत्री को जांच जरूर करानी चाहिए
डिप्टी सीएम अजीत पवार ने इस लेन-देन से किसी भी तरह के संबंध से इनकार करते हुए कहा, इस जमीन सौदे से मेरा दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। मुख्यमंत्री को इसकी जांच जरूर करानी चाहिए। यह उनका अधिकार है।किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बकौल अजीत पवार, 'मैंने कभी किसी अधिकारी को अपने रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं कहा। जब आपके बच्चे बड़े हो जाते हैं, तो वे अपना व्यवसाय करते ही हैं।'
बच्चे बड़े हो सकते हैं, लेकिन आज्ञाकारी रहना चाहिए: नारायण राणे का तंज
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़े विवादित जमीन सौदे को लेकर सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर अजीत पवार के पुराने राजनीतिक विरोधियों को फिर से हमला करने का मौका मिल गया है।
अजीत पवार ने हाल ही में कहा था 'जब बच्चे बड़े हो जाते हैं, तो वे अपना काम खुद करते हैं।' इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी सांसद नारायण राणे ने शनिवार को कहा बच्चे बड़े हो सकते हैं, लेकिन उन्हें आज्ञाकारी भी होना चाहिए। इससे ज्यादा क्या कहूं। राणे ने इस मामले पर आगे कोई टिप्पणी करने से परहेज किया।
वहीं, महाराष्ट्र के मंत्री और बीजेपी नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि अजीत पवार की व्यस्तता की वजह से शायद इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने में देर हुई। उन्होंने कहा अगर अजीत पवार ने पुणे जमीन विवाद की जानकारी मिलते ही कदम उठाया होता, तो यह स्थिति नहीं बनती। गौरतलब है कि विखे पाटिल और पवार परिवार के बीच पश्चिमी महाराष्ट्र की राजनीति में दशकों से प्रतिस्पर्धा रही है।
डिप्टी सीएम अजीत पवार ने इस लेन-देन से किसी भी तरह के संबंध से इनकार करते हुए कहा, इस जमीन सौदे से मेरा दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। मुख्यमंत्री को इसकी जांच जरूर करानी चाहिए। यह उनका अधिकार है।किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बकौल अजीत पवार, 'मैंने कभी किसी अधिकारी को अपने रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं कहा। जब आपके बच्चे बड़े हो जाते हैं, तो वे अपना व्यवसाय करते ही हैं।'
बच्चे बड़े हो सकते हैं, लेकिन आज्ञाकारी रहना चाहिए: नारायण राणे का तंज
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़े विवादित जमीन सौदे को लेकर सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर अजीत पवार के पुराने राजनीतिक विरोधियों को फिर से हमला करने का मौका मिल गया है।
अजीत पवार ने हाल ही में कहा था 'जब बच्चे बड़े हो जाते हैं, तो वे अपना काम खुद करते हैं।' इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी सांसद नारायण राणे ने शनिवार को कहा बच्चे बड़े हो सकते हैं, लेकिन उन्हें आज्ञाकारी भी होना चाहिए। इससे ज्यादा क्या कहूं। राणे ने इस मामले पर आगे कोई टिप्पणी करने से परहेज किया।
वहीं, महाराष्ट्र के मंत्री और बीजेपी नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि अजीत पवार की व्यस्तता की वजह से शायद इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने में देर हुई। उन्होंने कहा अगर अजीत पवार ने पुणे जमीन विवाद की जानकारी मिलते ही कदम उठाया होता, तो यह स्थिति नहीं बनती। गौरतलब है कि विखे पाटिल और पवार परिवार के बीच पश्चिमी महाराष्ट्र की राजनीति में दशकों से प्रतिस्पर्धा रही है।
जमीन सौदे पर शरद पवार बोले- फडणवीस जांच कर सच्चाई सामने लाएं
एनसीपी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने अपने पौत्र पार्थ पवार से जुड़ी विवादित जमीन सौदे की जांच का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अगर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले को गंभीर बताया है, तो उन्हें इसकी जांच कर सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए। जब शरद पवार से पूछा गया कि क्या अजित पवार को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है, तो उन्होंने कहा मुझे इसकी जानकारी नहीं है।
ये भी पढ़ें:- Pune Land Deal Row: कटघरे में पार्थ पवार, विपक्षी दल बोले- जांच कराएं CM फडणवीस; अजीत पवार से इस्तीफे की मांग
300 करोड़ की डील पर मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम अजित पवार क्या सोचते हैं?
खबरों के मुताबिक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस लेन-देन को 'प्रथम दृष्टया गंभीर' माना है। उन्होंने अधिकारियों को सभी विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस हाईप्रोफाइल मामले में उद्योग मंत्री उदय सामंत ने कहा, 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी कथित तौर पर माफ करने से उनके विभाग का सरोकार नहीं है। इससे पहले सामंत ने पहले कहा था कि इस मामले में सभी आरोपों का जवाब खुद पार्थ पवार देंगे। जमीन सरकार की थी या किसी अन्य प्राधिकरण की, इसकी पुष्टि होनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि यह मामला 300 करोड़ रुपये की एक जमीन खरीद से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर पार्थ पवार से जुड़े एक फर्म का नाम भी शामिल है। इस सौदे में अनियमितताओं के आरोप उठे हैं, जिसके चलते सरकार ने एक सब-रजिस्ट्रार को निलंबित किया है और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, लेन-देन से जुड़े तीन लोगों पर एफआईआर भी दर्ज की गई है। एक अधिकारी के अनुसार, पुणे के पॉश इलाके मुंधवा में महार (अनुसूचित जाति) समुदाय की जमीन बेची गई है। एसटी श्रेणी की ये 40 एकड़ 'महार वतन' वंशानुगत भूमि अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को बेची गई। इसका प्रतिनिधित्व उसके साझेदार दिग्विजय अमरसिंह पाटिल करते हैं। डील के दौरान 21 करोड़ रुपये का स्टांप शुल्क माफ किया गया। पार्थ पवार भी इस फर्म में साझेदार हैं।
एनसीपी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने अपने पौत्र पार्थ पवार से जुड़ी विवादित जमीन सौदे की जांच का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अगर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले को गंभीर बताया है, तो उन्हें इसकी जांच कर सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए। जब शरद पवार से पूछा गया कि क्या अजित पवार को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है, तो उन्होंने कहा मुझे इसकी जानकारी नहीं है।
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300 करोड़ की डील पर मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम अजित पवार क्या सोचते हैं?
खबरों के मुताबिक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस लेन-देन को 'प्रथम दृष्टया गंभीर' माना है। उन्होंने अधिकारियों को सभी विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस हाईप्रोफाइल मामले में उद्योग मंत्री उदय सामंत ने कहा, 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी कथित तौर पर माफ करने से उनके विभाग का सरोकार नहीं है। इससे पहले सामंत ने पहले कहा था कि इस मामले में सभी आरोपों का जवाब खुद पार्थ पवार देंगे। जमीन सरकार की थी या किसी अन्य प्राधिकरण की, इसकी पुष्टि होनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि यह मामला 300 करोड़ रुपये की एक जमीन खरीद से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर पार्थ पवार से जुड़े एक फर्म का नाम भी शामिल है। इस सौदे में अनियमितताओं के आरोप उठे हैं, जिसके चलते सरकार ने एक सब-रजिस्ट्रार को निलंबित किया है और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, लेन-देन से जुड़े तीन लोगों पर एफआईआर भी दर्ज की गई है। एक अधिकारी के अनुसार, पुणे के पॉश इलाके मुंधवा में महार (अनुसूचित जाति) समुदाय की जमीन बेची गई है। एसटी श्रेणी की ये 40 एकड़ 'महार वतन' वंशानुगत भूमि अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को बेची गई। इसका प्रतिनिधित्व उसके साझेदार दिग्विजय अमरसिंह पाटिल करते हैं। डील के दौरान 21 करोड़ रुपये का स्टांप शुल्क माफ किया गया। पार्थ पवार भी इस फर्म में साझेदार हैं।