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Gujarat Riots: सीतलवाड़-श्रीकुमार ने खटखटाया HC का दरवाजा, सत्र अदालत से नहीं मिली थी राहत
Tue, 02 Aug 2022 11:01 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 02 Aug 2022 11:01 PM IST
सार
जून में गुजरात पुलिस की एसआईटी द्वारा गिरफ्तार किए गए सीतलवाड़ और श्रीकुमार ने सोमवार को मामले में नियमित जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनके वकीलों ने पुष्टि की कि उनके मुवक्किलों ने हाईकोर्ट के समक्ष जमानत याचिका दायर की है और आने वाले दिनों में याचिकाओं पर सुनवाई होगी।
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सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्वी आईपीएस आरबी श्रीकुमार
- फोटो : सोशल मीडिया (फाइल)
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विस्तार
गुजरात दंगा 2002 के मामले में एक सत्र अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के कुछ दिनों बाद सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आरबी श्रीकुमार ने राहत के लिए गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वकीलों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
जून में गुजरात पुलिस की एसआईटी द्वारा गिरफ्तार किए गए सीतलवाड़ और श्रीकुमार ने सोमवार को मामले में नियमित जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनके वकीलों ने पुष्टि की कि उनके मुवक्किलों ने हाईकोर्ट के समक्ष जमानत याचिका दायर की है और आने वाले दिनों में याचिकाओं पर सुनवाई होगी।
एक सत्र अदालत ने 30 जुलाई को उनके आवेदनों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि अगर उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाता है तो यह गलत काम करने वालों को संदेश होगा कि एक व्यक्ति बिना किसी दंड के आरोप लगा सकता है।
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सत्र न्यायालय ने राहत देने से किया था इनकार
अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश डी. डी. ठक्कर ने राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि आरोपियों ने स्पष्ट रूप से गुजरात सरकार को अस्थिर करने और अपने गलत उद्देश्यों के लिए राज्य को बदनाम करने का लक्ष्य रखा था।
सत्र अदालत ने नोट किया था कि दोनों आरोपी 'गुजरात राज्य को उनके गोपनीय उद्देश्यों के साथ-साथ राजनीतिक आकांक्षाओं के लिए बदनाम करने में सक्रिय रूप से रुचि रखते थे और उन्होंने एक राजनीतिक गुट के साथ-साथ अन्य देशों से मौद्रिक लाभ प्राप्त करने के लिए ऐसा किया।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद गिरफ्तार किए गए थे सीतलवाड़ और श्रीकुमार
सीतलवाड़ और श्रीकुमार को अहमदाबाद शहर की अपराध शाखा ने जून में तब गिरफ्तार किया था जब उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी करना) और 194 (झूठे सबूत गढ़ना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
पहले से अन्य आपराधिक मामले में सजा काट रहे संजीव भट्ट
मामले में तीसरे आरोपी पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने जमानत के लिए आवेदन नहीं किया था। भट्ट पहले से ही एक अन्य आपराधिक मामले में जेल में हैं।
एसआईटी ने किया था दावा- तत्कालीन भाजपा सरकार को अस्थिरर करने की साजिश का हिस्सा थे आरोपी
मामले में जांच कर रही एसआईटी ने सत्र अदालत के समक्ष जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए एक गवाह के बयान का हवाला देकर आरोप लगाया था कि आरोपी दिवंगत कांग्रेस नेता अहमद पटेल के इशारे पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार को अस्थिर करने की साजिश का हिस्सा थे।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी जाकिया जाफरी की याचिका
सीतलवाड़ और श्रीकुमार को 24 जून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी की याचिका खारिज किए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था। एहसान जाफरी गोधरा कांड के बाद हुए दंगों में अहमदाबाद में मारे गए थे।
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जून में गुजरात पुलिस की एसआईटी द्वारा गिरफ्तार किए गए सीतलवाड़ और श्रीकुमार ने सोमवार को मामले में नियमित जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनके वकीलों ने पुष्टि की कि उनके मुवक्किलों ने हाईकोर्ट के समक्ष जमानत याचिका दायर की है और आने वाले दिनों में याचिकाओं पर सुनवाई होगी।
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एक सत्र अदालत ने 30 जुलाई को उनके आवेदनों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि अगर उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाता है तो यह गलत काम करने वालों को संदेश होगा कि एक व्यक्ति बिना किसी दंड के आरोप लगा सकता है।
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सत्र न्यायालय ने राहत देने से किया था इनकार
अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश डी. डी. ठक्कर ने राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि आरोपियों ने स्पष्ट रूप से गुजरात सरकार को अस्थिर करने और अपने गलत उद्देश्यों के लिए राज्य को बदनाम करने का लक्ष्य रखा था।
सत्र अदालत ने नोट किया था कि दोनों आरोपी 'गुजरात राज्य को उनके गोपनीय उद्देश्यों के साथ-साथ राजनीतिक आकांक्षाओं के लिए बदनाम करने में सक्रिय रूप से रुचि रखते थे और उन्होंने एक राजनीतिक गुट के साथ-साथ अन्य देशों से मौद्रिक लाभ प्राप्त करने के लिए ऐसा किया।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद गिरफ्तार किए गए थे सीतलवाड़ और श्रीकुमार
सीतलवाड़ और श्रीकुमार को अहमदाबाद शहर की अपराध शाखा ने जून में तब गिरफ्तार किया था जब उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी करना) और 194 (झूठे सबूत गढ़ना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
पहले से अन्य आपराधिक मामले में सजा काट रहे संजीव भट्ट
मामले में तीसरे आरोपी पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने जमानत के लिए आवेदन नहीं किया था। भट्ट पहले से ही एक अन्य आपराधिक मामले में जेल में हैं।
एसआईटी ने किया था दावा- तत्कालीन भाजपा सरकार को अस्थिरर करने की साजिश का हिस्सा थे आरोपी
मामले में जांच कर रही एसआईटी ने सत्र अदालत के समक्ष जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए एक गवाह के बयान का हवाला देकर आरोप लगाया था कि आरोपी दिवंगत कांग्रेस नेता अहमद पटेल के इशारे पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार को अस्थिर करने की साजिश का हिस्सा थे।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी जाकिया जाफरी की याचिका
सीतलवाड़ और श्रीकुमार को 24 जून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी की याचिका खारिज किए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था। एहसान जाफरी गोधरा कांड के बाद हुए दंगों में अहमदाबाद में मारे गए थे।