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Drone Tech: 'सेना की मेडिकल सेवा जल्द पहाड़ी इलाकों में ड्रोन से पहुंचाएगी खून-दवाएं', एएफएमएस डीजी का एलान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 12 Jul 2025 10:14 PM IST
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सार
Drone Tech For Healthcare: पहाड़ और दुर्गम इलाकों में सेना के जवानों के इलाज के लिए दवाएं और खून पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी घोषणा करते हुए सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा की डीजी आरती सरीन ने कहा कि गैर-सैन्य संस्थाएं पहले ही इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एआई
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विस्तार
सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (एएफएमएस) अब ड्रोन तकनीक की मदद से खून की थैलियां, दवाइयां और अन्य मेडिकल सामान पहाड़ी और दूर-दराज के इलाकों में पहुंचाने की तैयारी कर रही है। यह जानकारी एएफएमएस की महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन ने शनिवार को दी। पुणे के आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी) में मेडिकल कैडेट्स की कमीशनिंग सेरेमनी के मौके पर बोलते हुए वाइस एडमिरल आरती सरीन ने बताया कि एएफएमएस अब आधुनिक तकनीकों को अपना रही है, जिसमें टेलीमेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), पॉइंट-ऑफ-केयर डिवाइस और ड्रोन शामिल हैं, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर और तेजी से दी जा सकें।
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पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर योजना शुरू करने की तैयारी
उन्होंने कहा, 'हम ड्रोन के जरिए खून की थैलियां, दवाइयां और अन्य जरूरी मेडिकल उपकरण भेजने की योजना बना रहे हैं। हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब मेडिकल इवैक्यूएशन यानी मरीजों को निकालने का काम भी ड्रोन से हो सके।' उन्होंने बताया कि यह योजना फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करने की तैयारी में है, खासकर ऐसे पहाड़ी क्षेत्रों में जहां पहुंचना मुश्किल होता है। वाइस एडमिरल आरती सरीन ने कहा कि गैर-सैन्य संस्थाएं पहले ही इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।
'चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से हो रहे हैं तकनीकी बदलाव'
वहीं इस मौके पर एएफएमसी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल पंकज राव ने भी कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं, और अब हर स्तर पर, रोकथाम से लेकर इलाज तक, नई तकनीकों को अपनाया जा रहा है।
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वाइस एडमिरल आरती सरीन ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के बारे में भी जानकारी दी, जो एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में हैं। उन्होंने बताया कि एएफएमएस मिशन में शामिल सभी चार अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत की जिम्मेदारी संभाल रही है। उन्होंने कहा, 'अमेरिका में इंस्टिट्यूट ऑफ एविएशन मेडिसिन प्राथमिक चिकित्सा देख रहा है, और हमारी एक टीम- जिसमें एक ग्रुप कैप्टन शामिल हैं- ह्यूस्टन, टेक्सास में तैनात है जो मिशन क्रू की सेहत पर नजर रख रही है।'
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पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर योजना शुरू करने की तैयारी
उन्होंने कहा, 'हम ड्रोन के जरिए खून की थैलियां, दवाइयां और अन्य जरूरी मेडिकल उपकरण भेजने की योजना बना रहे हैं। हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब मेडिकल इवैक्यूएशन यानी मरीजों को निकालने का काम भी ड्रोन से हो सके।' उन्होंने बताया कि यह योजना फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करने की तैयारी में है, खासकर ऐसे पहाड़ी क्षेत्रों में जहां पहुंचना मुश्किल होता है। वाइस एडमिरल आरती सरीन ने कहा कि गैर-सैन्य संस्थाएं पहले ही इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।
'चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से हो रहे हैं तकनीकी बदलाव'
वहीं इस मौके पर एएफएमसी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल पंकज राव ने भी कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं, और अब हर स्तर पर, रोकथाम से लेकर इलाज तक, नई तकनीकों को अपनाया जा रहा है।
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वाइस एडमिरल आरती सरीन ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के बारे में भी जानकारी दी, जो एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में हैं। उन्होंने बताया कि एएफएमएस मिशन में शामिल सभी चार अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत की जिम्मेदारी संभाल रही है। उन्होंने कहा, 'अमेरिका में इंस्टिट्यूट ऑफ एविएशन मेडिसिन प्राथमिक चिकित्सा देख रहा है, और हमारी एक टीम- जिसमें एक ग्रुप कैप्टन शामिल हैं- ह्यूस्टन, टेक्सास में तैनात है जो मिशन क्रू की सेहत पर नजर रख रही है।'