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सोमवार को फारूक अब्दुल्ला बोले, आज चीन बोला, लद्दाख में तनाव के लिए भारत को बताया जिम्मेदार

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 13 Oct 2020 07:03 PM IST
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सार

  • सातवें दौर की बातचीत का नहीं आया सकारात्मक नतीजा
  • चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा, हम लद्दाख को भारत का केंद्र शासित प्रदेश नहीं मानते
  • बातचीत शुरू होने से पहले ही अमेरिका ने नतीजा न आने की जताई थी आशंका
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान को गहराई से समझने की जरूरत

After Farooq Abdullah now China said on tuesday that India responsible for tension in Ladakh
लद्दाख में बोफोर्स तोप - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

भारत और चीन के बीच लद्दाख क्षेत्र में सीमा विवाद का समाधान जल्द हो पाने की संभावनाएं अब क्षीण होने लगी हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को इसका संकेत दे दिया था। रक्षा मंत्री के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केन्द्रीय मंत्री, नेशनल कांफ्रेस के अध्यक्ष और सांसद फारूक अब्दुल्ला का भी बयान आया। फारूक अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 (विशेष राज्य का दर्जा) बहाल कराने चीन की मदद पर भरोसा जताया। मंगलवार को चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर सीमा पर जारी तनाव के लिए भारत को ही जिम्मेदार ठहराया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत के आंतरिक मामले में दखल देते हुए कहा कि वह लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश की मान्यता नहीं देगा।

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क्या हैं चीन के इस वक्तव्य के मायने?

इंडियन पोलो एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह संधू को लग रहा है कि अब पाकिस्तान से लगती नियंत्रण रेखा (एलओसी) की तरह ही चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अब लंबे समय तक दोनों देशों की सैन्य तैनाती बनी रह सकती है। वाइस एयर मार्शल एनबी सिंह भी उनसे सहमत हैं। एनबी सिंह को फिलहाल मुद्दे का समाधान नहीं दिख रहा है। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ, वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार का कहना है कि अब हर दिन वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास 50 हजार सैनिकों की तैनाती और इस पर आने वाले भारी-भरकम खर्च के लिए देश को तैयार रहना होगा। रंजीत कुमार का भी मानना है कि लद्दाख सीमा पर लंबे समय तक तनाव जारी रहने के संकेत हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान का अर्थ भी यही निकाला जा रहा है। रक्षा मंत्री ने सोमवार 12 अक्टूबर को लद्दाख में चीन के साथ जारी तनातनी को केंद्र में रखकर बयान दिया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन दोनों किसी मिशन के तहत सीमा विवाद खड़ा कर रहे हैं।

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कांग्रेस ने भी फारूक के बयान निंदा की

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान पर सफाई दी है। फारुक अब्दुल्ला का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। भाजपा फारूक के सोमवार के वक्तव्य पर तंज कस रही है। वहीं फारूक ने कहा कि उनको देश में कुछ सही नहीं दिखता। ये लोग मुल्क में बर्बादी करना चाहते हैं। उन्होंने गुस्सा प्रकट करते हुए कहा कि उनके कहने का अर्थ गलत निकाला गया। अब्दुल्ला ने कहा कि अनुच्छेद 370 का मामला चीन उठा रहा है। इसलिए इसमें उन्हें बोलने की कोई जरूरत नहीं है। उनके सोमवार को दिए बयान की कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी आलोचना की। सिंघवी ने फारूक अब्दुल्ला के बयान की निंदा करते हुए इसे गैर जिम्मेदाराना बताया है। सिंघवी ने कहा कि राजनीतिक विचारधारा, मतभेद, मनभेद सब अपनी जगह हैं, लेकिन उस वक्त जब चीन हमारी सरहदों पर नापाक इरादों के साथ तैनात है, तब फारूक अब्दुल्ला का चीन के पक्ष में बयान न केवल गैर जिम्मेदाराना, बल्कि निंदनीय भी है।

सबको जोड़कर देखिए चीन की शरारत

लद्दाख सीमा पर चीन के सैनिकों की घुसपैठ, करीब हजार वर्ग किमी क्षेत्र पर कब्जा, 60 हजार सैनिकों की तैनाती, पांच मई 2020 से लेकर अब तक तीन से अधिक बार गोली का चलना, भारतीय सैनिकों से हिंसक झड़प, नेपाल को उकसाना और पाकिस्तान का सरहदी इलाके में भारी गोलीबारी करना सब कुछ एक बड़े षडयंत्र का हिस्सा है। चीन के विदेश मंत्रालय के बयान को जोड़कर देखना चाहिए। इससे साफ है कि लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से ही चीन, भारत को झटका देने की कोशिश पर काम कर रहा था। इसी योजना के तहत तिब्बत में उच्चस्तरीय सैन्य अभ्यास और इस सैन्य अभ्यास के बहाने राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सैन्यबलों के मूवमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। रणनीतिकारों के अनुसार भारत समय पर चीन की इस नापाक चाल को भांपने में नाकाम रहा। इसकी आज हमें कीमत चुकानी पड़ रही है। चीन के मंगलवार के बयान से साफ है कि सातवें दौर की उच्चस्तरीय सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता का कोई खास नतीजा नतीजा नहीं निकल पाया है।

भारत कर रहा है सामानांतर तैयारी

चीन से मिल रहे मौजूदा खतरे और पाकिस्तान के दबाव को भांपकर सीमावर्ती क्षेत्र में भारत ने अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी रणनीति के तहत चीन से लगती समूची सीमा पर पुलों, रास्तों, सड़कों को ठीक किया जा रहा है। उत्तराखंड, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल, लद्दाख, सिक्किम से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक लगातार सैन्य समीक्षा की जा रही है। सैन्य सूत्र बताते हैं कि न केवल सेना, वायुसेना ने भी बाराहोती से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक खुद को उच्चस्तर के सतर्कता मोड पर रखा है। नौसेना और तटरक्षक बल हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागरीय क्षेत्र तक लगातार उच्च स्तर की सतर्कता बरत रहे हैं। फिलहाल भारत चीन के साथ किसी तरह की चिंगारी न भड़कने पर खास ध्यान दे रहा है। चीन के साथ इसी तरह के कूटनीतिक और सैन्य रिश्ते के प्रयासों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सामरिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि समय संवेदनशील है और एक चिंगारी से दोनों देशों में सैन्य टकराव की संभावना भड़क सकती है।

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