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Bengal Election: चुनाव आयोग के बयान पर तृणमूल कांग्रेस का पलटवार, जानें बैठक में क्या हुआ और क्यों बढ़ा विवाद
आईएएनएस, कोलकाता
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Wed, 08 Apr 2026 03:43 PM IST
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सार
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच बयानबाज़ी तेज हो गई है। आयोग ने निष्पक्ष और हिंसामुक्त चुनाव कराने की बात कही, जबकि तृणमूल ने आयोग पर पक्षपात के आरोप लगाए। बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़े हैं। डेरेक ओ’ब्रायन ने आयोग के व्यवहार पर सवाल उठाए, वहीं आयोग ने अनुशासन बनाए रखने की बात कही।
चुनाव आयोग करा रहा एसआईआर।
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विस्तार
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कोलकाता में चुनावी माहौल के बीच बुधवार को सियासी तापमान अचानक बढ़ गया। चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधी बयानबाजी सामने आ गई। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर आयोग की सख्त टिप्पणी और उसके जवाब में तृणमूल की तीखी प्रतिक्रिया ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया। चुनाव से पहले यह टकराव संकेत दे रहा है कि आगे की लड़ाई और ज्यादा आक्रामक हो सकती है।
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने पहुंचा था। पार्टी ने आरोप लगाया कि हाल ही में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर यह बैठक हुई, लेकिन बैठक के तुरंत बाद आयोग ने तृणमूल कांग्रेस से सीधी बात शीर्षक से एक बयान जारी कर दिया, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया।
क्या कहा चुनाव आयोग ने अपने बयान में?
चुनाव आयोग ने अपने बयान में साफ कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव पूरी तरह भयमुक्त, हिंसामुक्त और बिना किसी दबाव या लालच के कराए जाएंगे। आयोग ने यह भी कहा कि छापामारी, बूथ जाम और किसी तरह की गड़बड़ी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग का यह सख्त रुख सीधे तौर पर राज्य की चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने जैसा माना गया।
ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट ने कहा- धर्म में अंधविश्वास क्या है, इसका फैसला करने का हमें अधिकार; सरकार का विरोध
तृणमूल कांग्रेस ने कैसे दिया जवाब?
आयोग के बयान के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस ने भी पलटवार किया। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि चुनाव दिल्ली के नियंत्रण से मुक्त होने चाहिए। साथ ही राजनीतिक पक्षपात, चुनिंदा कार्रवाई और दोहरे मापदंड से भी चुनाव को दूर रखा जाना चाहिए। पार्टी ने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि सभी के साथ समान व्यवहार हो।
क्या आयोग की निष्पक्षता पर उठे सवाल?
तृणमूल कांग्रेस ने एक और बयान जारी कर यह सवाल उठाया कि क्या एक संवैधानिक संस्था को इस तरह की चुनौतीपूर्ण भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। पार्टी ने तीखे शब्दों में कहा कि आयोग को अपनी निष्पक्ष छवि बनाए रखनी चाहिए। तृणमूल ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग का रवैया निष्पक्ष नहीं दिख रहा है, जिससे चुनाव की पारदर्शिता पर असर पड़ सकता है।
बैठक में क्या हुआ, क्यों बढ़ा विवाद?
तृणमूल नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने सहयोग नहीं किया और बातचीत का माहौल ठीक नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें गेट लॉस्ट तक कहा गया। वहीं आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल को कई बार आवाज धीमी रखने और शालीन भाषा के इस्तेमाल की सलाह दी गई थी। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों ने विवाद को और गहरा कर दिया है।
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दरअसल, तृणमूल कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने पहुंचा था। पार्टी ने आरोप लगाया कि हाल ही में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर यह बैठक हुई, लेकिन बैठक के तुरंत बाद आयोग ने तृणमूल कांग्रेस से सीधी बात शीर्षक से एक बयान जारी कर दिया, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया।
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क्या कहा चुनाव आयोग ने अपने बयान में?
चुनाव आयोग ने अपने बयान में साफ कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव पूरी तरह भयमुक्त, हिंसामुक्त और बिना किसी दबाव या लालच के कराए जाएंगे। आयोग ने यह भी कहा कि छापामारी, बूथ जाम और किसी तरह की गड़बड़ी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग का यह सख्त रुख सीधे तौर पर राज्य की चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने जैसा माना गया।
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तृणमूल कांग्रेस ने कैसे दिया जवाब?
आयोग के बयान के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस ने भी पलटवार किया। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि चुनाव दिल्ली के नियंत्रण से मुक्त होने चाहिए। साथ ही राजनीतिक पक्षपात, चुनिंदा कार्रवाई और दोहरे मापदंड से भी चुनाव को दूर रखा जाना चाहिए। पार्टी ने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि सभी के साथ समान व्यवहार हो।
क्या आयोग की निष्पक्षता पर उठे सवाल?
तृणमूल कांग्रेस ने एक और बयान जारी कर यह सवाल उठाया कि क्या एक संवैधानिक संस्था को इस तरह की चुनौतीपूर्ण भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। पार्टी ने तीखे शब्दों में कहा कि आयोग को अपनी निष्पक्ष छवि बनाए रखनी चाहिए। तृणमूल ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग का रवैया निष्पक्ष नहीं दिख रहा है, जिससे चुनाव की पारदर्शिता पर असर पड़ सकता है।
बैठक में क्या हुआ, क्यों बढ़ा विवाद?
तृणमूल नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने सहयोग नहीं किया और बातचीत का माहौल ठीक नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें गेट लॉस्ट तक कहा गया। वहीं आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल को कई बार आवाज धीमी रखने और शालीन भाषा के इस्तेमाल की सलाह दी गई थी। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों ने विवाद को और गहरा कर दिया है।
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