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CJI: NLSIU में भी सीजेआई सूर्यकांत और बीसीआई चेयरमैन का विरोध, दीक्षांत समारोह में शामिल होने के खिलाफ छात्र
Sun, 16 Aug 2026 11:42 AM IST
नितिन गौतम
पीटीआई, बंगलूरू
पीटीआई, बंगलूरू
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 16 Aug 2026 11:42 AM IST
सार
नालसर यूनिवर्सिटी के बाद अब बंगलूरू स्थित एनएलएसआईयू में भी सीजेआई और बार काउंसिल के अध्यक्ष का विरोध शुरू हो गया है। छात्रों ने एक बयान जारी कर सीजेआई के दीक्षांत समारोह में शामिल होने का विरोध किया है।
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एनएलएसआईयू के छात्रों का सीजेआई के प्रति विरोध
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बंगलूरू स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) के छात्रों और पूर्व छात्रों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के आगामी दीक्षांत समारोह में शामिल होने का विरोध किया है। 15 अगस्त को जारी एक बयान में छात्रों और पूर्व छात्रों ने नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने वाले बार काउंसिल के आदेश की निंदा की। हालांकि यह आदेश वापस लिया जा चुका है।
NALSAR के छात्रों के समर्थन में फैसला
एनएलएसआईयू के छात्रों ने नालसर के छात्रों के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता के सामने सच बोलने का साहस और नैतिक दृढ़ता का अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। गौरतलब है कि इससे पहले नालसर में भी सीजेआई सूर्यकांत को विरोध का सामना करना पड़ा था।
छात्रों ने जारी बयान में क्या कहा?
2026 बैच के 165 स्नातक छात्रों, 409 मौजूदा छात्रों और 128 पूर्व छात्रों के हस्ताक्षर वाले बयान में कहा गया है, 'हम जानते हैं कि बीसीआई ने नालसर के खिलाफ सभी कार्यवाही बंद कर दी है। हालांकि, किसी सार्वजनिक विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ किसी वैधानिक संस्था द्वारा इस तरह की असंवैधानिक और गैरकानूनी कार्यवाही शुरू किया जाना ही अपने आप में गंभीर है। इससे न तो इन कार्रवाइयों की प्रकृति और व्यापक प्रभाव बदलता है और न ही बीसीआई तथा उसके चेयरमैन की जिम्मेदारी कम होती है।'
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NALSAR के छात्रों के समर्थन में फैसला
एनएलएसआईयू के छात्रों ने नालसर के छात्रों के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता के सामने सच बोलने का साहस और नैतिक दृढ़ता का अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। गौरतलब है कि इससे पहले नालसर में भी सीजेआई सूर्यकांत को विरोध का सामना करना पड़ा था।
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छात्रों ने जारी बयान में क्या कहा?
2026 बैच के 165 स्नातक छात्रों, 409 मौजूदा छात्रों और 128 पूर्व छात्रों के हस्ताक्षर वाले बयान में कहा गया है, 'हम जानते हैं कि बीसीआई ने नालसर के खिलाफ सभी कार्यवाही बंद कर दी है। हालांकि, किसी सार्वजनिक विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ किसी वैधानिक संस्था द्वारा इस तरह की असंवैधानिक और गैरकानूनी कार्यवाही शुरू किया जाना ही अपने आप में गंभीर है। इससे न तो इन कार्रवाइयों की प्रकृति और व्यापक प्रभाव बदलता है और न ही बीसीआई तथा उसके चेयरमैन की जिम्मेदारी कम होती है।'
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छात्रों ने बीसीआई की कार्रवाई को बताया मनमाना
छात्रों और पूर्व छात्रों ने दावा किया कि नामांकन पर रोक और जांच संबंधी आदेश वापस लेने के बाद भी बीसीआई की कार्रवाई मनमानी और गैरकानूनी प्रकृति की थी। छात्रों ने कहा, किसी विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह छात्र के शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अवसर होता है, जिसमें वर्षों की मेहनत और लगन का जश्न मनाया जाता है। ऐसे देश में जहां वर्ग, जाति और लैंगिक असमानता जैसी बाधाओं के साथ-साथ उच्च शिक्षा की प्रवेश परीक्षाओं की खामियां भी विद्यार्थियों की पहुंच को प्रभावित करती हैं, वहां दीक्षांत समारोह परिवारों के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि का प्रतीक होता है।
दीक्षांत समारोह में शामिल होने का सीजेआई का विरोध
बयान में कहा गया, 'ऐसे में उन उच्च पदों पर बैठे लोगों को छात्रों को डिग्री प्रदान करने के लिए आमंत्रित करना, जिन्होंने उन्हीं छात्रों के प्रति सार्वजनिक रूप से अवमानना और उपेक्षा का भाव व्यक्त किया है, आपत्तिजनक, अपमानजनक और छात्रों तथा उनके संघर्ष का मजाक उड़ाने जैसा है।'
छात्रों और पूर्व छात्रों ने कहा, 'हम नालसर के अपने साथी छात्रों के साथ बिना किसी शर्त के एकजुटता के साथ खड़े हैं, जिन्होंने सत्ता के सामने सच बोलने का अनुकरणीय साहस और नैतिक दृढ़ता दिखाई है।' उन्होंने मांग की कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया नालसर के छात्र और शिक्षक समुदाय से, उनके अभिव्यक्ति और स्वतंत्र रूप से बोलने के मौलिक अधिकार में हस्तक्षेप करने की कोशिश के लिए बिना शर्त माफी मांगे।
छात्रों और पूर्व छात्रों ने दावा किया कि नामांकन पर रोक और जांच संबंधी आदेश वापस लेने के बाद भी बीसीआई की कार्रवाई मनमानी और गैरकानूनी प्रकृति की थी। छात्रों ने कहा, किसी विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह छात्र के शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अवसर होता है, जिसमें वर्षों की मेहनत और लगन का जश्न मनाया जाता है। ऐसे देश में जहां वर्ग, जाति और लैंगिक असमानता जैसी बाधाओं के साथ-साथ उच्च शिक्षा की प्रवेश परीक्षाओं की खामियां भी विद्यार्थियों की पहुंच को प्रभावित करती हैं, वहां दीक्षांत समारोह परिवारों के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि का प्रतीक होता है।
दीक्षांत समारोह में शामिल होने का सीजेआई का विरोध
बयान में कहा गया, 'ऐसे में उन उच्च पदों पर बैठे लोगों को छात्रों को डिग्री प्रदान करने के लिए आमंत्रित करना, जिन्होंने उन्हीं छात्रों के प्रति सार्वजनिक रूप से अवमानना और उपेक्षा का भाव व्यक्त किया है, आपत्तिजनक, अपमानजनक और छात्रों तथा उनके संघर्ष का मजाक उड़ाने जैसा है।'
छात्रों और पूर्व छात्रों ने कहा, 'हम नालसर के अपने साथी छात्रों के साथ बिना किसी शर्त के एकजुटता के साथ खड़े हैं, जिन्होंने सत्ता के सामने सच बोलने का अनुकरणीय साहस और नैतिक दृढ़ता दिखाई है।' उन्होंने मांग की कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया नालसर के छात्र और शिक्षक समुदाय से, उनके अभिव्यक्ति और स्वतंत्र रूप से बोलने के मौलिक अधिकार में हस्तक्षेप करने की कोशिश के लिए बिना शर्त माफी मांगे।
नालसर में छात्रों ने किया था सीजेआई का विरोध
छात्रों ने सीजेआई के प्रस्तावित कैंपस दौरे पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद बार काउंसिल ने नालसर यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के स्नातकों को अधिवक्ता के रूप में नामांकित नहीं करने का निर्देश दिया था। हालांकि बाद में विवाद होने पर बार काउंसिल ने इस आदेश को वापस ले लिया था और बार काउंसिल के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने भी माफी मांगी थी। 14 अगस्त को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के उस आदेश पर कड़ी नाराजगी जताई थी, जिसमें हैदराबाद स्थित नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के स्नातकों को अधिवक्ता के रूप में नामांकित नहीं करने का निर्देश दिया गया था।
सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि छात्रों को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। सीजेआई सूर्यकांत ने 14 अगस्त को कहा था, 'यह छात्रों और मेरे बीच का मामला है।' उन्होंने नालसर के छात्रों के विरोध के बाद बीसीआई की ओर से जारी आदेश को लेकर काउंसिल को कड़ी फटकार लगाई थी।
छात्रों ने सीजेआई के प्रस्तावित कैंपस दौरे पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद बार काउंसिल ने नालसर यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के स्नातकों को अधिवक्ता के रूप में नामांकित नहीं करने का निर्देश दिया था। हालांकि बाद में विवाद होने पर बार काउंसिल ने इस आदेश को वापस ले लिया था और बार काउंसिल के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने भी माफी मांगी थी। 14 अगस्त को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के उस आदेश पर कड़ी नाराजगी जताई थी, जिसमें हैदराबाद स्थित नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के स्नातकों को अधिवक्ता के रूप में नामांकित नहीं करने का निर्देश दिया गया था।
सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि छात्रों को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। सीजेआई सूर्यकांत ने 14 अगस्त को कहा था, 'यह छात्रों और मेरे बीच का मामला है।' उन्होंने नालसर के छात्रों के विरोध के बाद बीसीआई की ओर से जारी आदेश को लेकर काउंसिल को कड़ी फटकार लगाई थी।