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कैसे रोकेंगे AI वाले अपराध?: अब एआई बना साइबर अपराधियों का हथियार, संसद में दर्जनों सांसदों ने पूछे सवाल
सार
देश में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को लेकर संसद में सांसदों ने चिंता जताई। 2021 में 50,035 मामलों से बढ़कर 2024 में संख्या 1,01,928 हो गई। AI, डार्कनेट और भ्रामक ऐप से साइबर ठगी के नए तरीके सामने आ रहे हैं। सरकार ने हजारों करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन रोके हैं।
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साइबर अपराध
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराध के मामलों को लेकर दर्जनों सांसदों ने चिंता जताई है। संसद सत्र में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार ने क्या किया, कितने मामले सामने आ रहे हैं, भ्रामक ऐप, डार्कनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए हो रहा साइबर अपराध, सांसदों ने ऐसे कई सवाल पूछे हैं। साइबर अपराधियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को एक हथियार बना लिया है। दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्रालय एवं विभिन्न एजेंसियों द्वारा साइबर क्राइम को रोकने के लिए भी 'एआई' का इस्तेमाल किया जा रहा है।
साइबर क्राइम पर इन सांसदों ने पूछे सवाल ...
सांसद अनुराग शर्मा, हैबी ईडन, ईश्वरस्वामी के., तरूण चुघ, अखिलेश प्रसाद सिंह, जीसी चंद्रशेखर, जोस के. मणि, डॉ. दिनेश शर्मा, बाबूभाई जेसंगभाई देसाई, डॉ. सैयद नसीर हुसैन, डॉ. राजकुमार चब्बेवाल, बाल्या मामा सुरेश गोपीनाथ म्हात्रे, महुआ मोइत्रा, नारायण तातू राणे, डॉ. थोल तिरूमावलवन, सतीश कुमार गौतम, सांसद एडवोकेट गोवाल कागडा, विशाल दादा प्रकाशबाबू पाटिल, डॉ. बच्छाव शोभा दिनेश, सुखविंद्र सिंह रंधावा, डॉ. रवि कुमार, राजीव प्रताप रूडी, कीर्ति आजाद, नीरज डांगी, चमाला किरण कुमार रेड्डी, इटेला राजेंद्र, विनोद श्रीधर तावड़े, रामवीर सिंह बिधुड़ी और पीसी मोहन आदि सांसदों ने साइबर क्राइम से जुड़े सवाल पूछे हैं।
सांसदों के सवाल:
साइबर क्राइम को रोकने वाली एजेंसियां, सीमा पार से साइबर खतरा, एआई आधारित साइबर अपराध निवारण, नागरिकों की डिजिटल पहचान की सुरक्षा, साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार ने क्या किया, कितने मामले, भ्रामक ऐप, साइबर शोषण, वित्तीय नुकसान और फ्रीज की गई राशि आदि सवाल पूछे गए। सरकार ने डार्क नेट, डिजिटल तकनीक एन्क्रिप्टेड संचार एप्लीकेशन पर भी सवाल किए। साइबर थ्रेट अर्ली वार्निंग सिस्टम, ई चालान भेजकर बैंक खाते खाली करना और सरकार द्वारा पीड़ितों को किस तरह की राहत दी जा रही है, संसद सत्र में ऐसे कई सवाल पूछे गए हैं।
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क्या कहते हैं साइबर एक्सपर्ट ...
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और साइबर मामलों एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञ डॉ. पवन दुग्गल कहते हैं कि सांसदों की चिंता बिल्कुल जायज है। मौजूदा समय में साइबर अपराधियों ने एआई को अपना हथियार बना लिया है। साइबर अपराधी एआई की मदद से ऑर्डर बुक कर रहे हैं। डार्कनेट पर साइबर क्राइम के इस नए ट्रेंड को तकनीकी भाषा में 'साइबर क्राइम एज ए सर्विस' कहा जाता है। इसमें कोई भी अपराधी बिना किसी तकनीकी ज्ञान के, पैसे देकर किसी भी प्रकार के साइबर हमले को ऑनलाइन ऑर्डर कर सकता है। दुग्गल बताते हैं कि एआई से साइबर अपराध होगा तो जांच एवं सुरक्षा एजेंसियां, असल अपराधी की पहचान कैसे करेंगी। एआई से अपराध, इस बाबत कई बातें, भारतीय कानून के दायरे में नहीं हैं।
साइबर अपराध को रोकने के लिए भी 'एआई' ...
'इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम', लगातार साइबर खतरों (जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके किए गए खतरनाक हमले भी शामिल हैं) और कंप्यूटर, नेटवर्क एवं डेटा की सुरक्षा के उपायों के बारे में अलर्ट और सलाह जारी करता है। यह टीम, नेशनल साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर के अलावा साइबर सुरक्षा खतरे का पता लगाने के लिए साइबरस्पेस की निगरानी भी करती है। खतरनाक डोमेन और फिशिंग गतिविधियों का पता लगाने एवं निवारण के लिए यह टीम एआई आधारित सिचुएशनल अवेयरनेस सिस्टम का इस्तेमाल करती है। यह रिस्पांस टीम, ऑटोमेटेड साइबर थ्रेट एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के जरिए साइबर खतरे की जानकारी जुटाती है और उसका विश्लेषण करती है। राज्य सरकारों व अलग-अलग सेक्टर के संगठनों के साथ खास अलर्ट साझा करती है, ताकि साइबर हमलों को रोकने के लिए पहले से ही कदम उठाया जा सके।
साइबर अपराध पर कार्रवाई...
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साइबर क्राइम पर इन सांसदों ने पूछे सवाल ...
सांसद अनुराग शर्मा, हैबी ईडन, ईश्वरस्वामी के., तरूण चुघ, अखिलेश प्रसाद सिंह, जीसी चंद्रशेखर, जोस के. मणि, डॉ. दिनेश शर्मा, बाबूभाई जेसंगभाई देसाई, डॉ. सैयद नसीर हुसैन, डॉ. राजकुमार चब्बेवाल, बाल्या मामा सुरेश गोपीनाथ म्हात्रे, महुआ मोइत्रा, नारायण तातू राणे, डॉ. थोल तिरूमावलवन, सतीश कुमार गौतम, सांसद एडवोकेट गोवाल कागडा, विशाल दादा प्रकाशबाबू पाटिल, डॉ. बच्छाव शोभा दिनेश, सुखविंद्र सिंह रंधावा, डॉ. रवि कुमार, राजीव प्रताप रूडी, कीर्ति आजाद, नीरज डांगी, चमाला किरण कुमार रेड्डी, इटेला राजेंद्र, विनोद श्रीधर तावड़े, रामवीर सिंह बिधुड़ी और पीसी मोहन आदि सांसदों ने साइबर क्राइम से जुड़े सवाल पूछे हैं।
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सांसदों के सवाल:
साइबर क्राइम को रोकने वाली एजेंसियां, सीमा पार से साइबर खतरा, एआई आधारित साइबर अपराध निवारण, नागरिकों की डिजिटल पहचान की सुरक्षा, साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार ने क्या किया, कितने मामले, भ्रामक ऐप, साइबर शोषण, वित्तीय नुकसान और फ्रीज की गई राशि आदि सवाल पूछे गए। सरकार ने डार्क नेट, डिजिटल तकनीक एन्क्रिप्टेड संचार एप्लीकेशन पर भी सवाल किए। साइबर थ्रेट अर्ली वार्निंग सिस्टम, ई चालान भेजकर बैंक खाते खाली करना और सरकार द्वारा पीड़ितों को किस तरह की राहत दी जा रही है, संसद सत्र में ऐसे कई सवाल पूछे गए हैं।
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क्या कहते हैं साइबर एक्सपर्ट ...
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और साइबर मामलों एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञ डॉ. पवन दुग्गल कहते हैं कि सांसदों की चिंता बिल्कुल जायज है। मौजूदा समय में साइबर अपराधियों ने एआई को अपना हथियार बना लिया है। साइबर अपराधी एआई की मदद से ऑर्डर बुक कर रहे हैं। डार्कनेट पर साइबर क्राइम के इस नए ट्रेंड को तकनीकी भाषा में 'साइबर क्राइम एज ए सर्विस' कहा जाता है। इसमें कोई भी अपराधी बिना किसी तकनीकी ज्ञान के, पैसे देकर किसी भी प्रकार के साइबर हमले को ऑनलाइन ऑर्डर कर सकता है। दुग्गल बताते हैं कि एआई से साइबर अपराध होगा तो जांच एवं सुरक्षा एजेंसियां, असल अपराधी की पहचान कैसे करेंगी। एआई से अपराध, इस बाबत कई बातें, भारतीय कानून के दायरे में नहीं हैं।
साइबर अपराध को रोकने के लिए भी 'एआई' ...
'इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम', लगातार साइबर खतरों (जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके किए गए खतरनाक हमले भी शामिल हैं) और कंप्यूटर, नेटवर्क एवं डेटा की सुरक्षा के उपायों के बारे में अलर्ट और सलाह जारी करता है। यह टीम, नेशनल साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर के अलावा साइबर सुरक्षा खतरे का पता लगाने के लिए साइबरस्पेस की निगरानी भी करती है। खतरनाक डोमेन और फिशिंग गतिविधियों का पता लगाने एवं निवारण के लिए यह टीम एआई आधारित सिचुएशनल अवेयरनेस सिस्टम का इस्तेमाल करती है। यह रिस्पांस टीम, ऑटोमेटेड साइबर थ्रेट एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के जरिए साइबर खतरे की जानकारी जुटाती है और उसका विश्लेषण करती है। राज्य सरकारों व अलग-अलग सेक्टर के संगठनों के साथ खास अलर्ट साझा करती है, ताकि साइबर हमलों को रोकने के लिए पहले से ही कदम उठाया जा सके।
साइबर अपराध पर कार्रवाई...
- साइबर अपराधियों की पहचान वाली 'सस्पेक्ट रजिस्ट्री'
- बैंकों के साथ साझा किया 30.48 लाख से ज्यादा संदिग्धों का डेटा
- 32.08 लाख 'लेयर 1 म्यूल अकाउंट्स' की जानकारी
- 25,698 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन रोके गए
- 32.80 लाख शिकायतों में 11158 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई गई
- 2021 में साइबर क्राइम के 50035 केस दर्ज तो 2024 में यह संख्या 101928 पर पहुंच गई