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अखिलेश का वार: धोखे से लागू करना चाहते हैं आरक्षण, शाह का पलटवार- आपका बस चले तो घरों की भी जाति तय कर दें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Thu, 16 Apr 2026 11:58 AM IST
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सार

परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। अखिलेश यादव ने सरकार पर जनगणना टालने और जाति गणना से बचने का आरोप लगाया, जबकि अमित शाह ने कहा कि जनगणना प्रक्रिया जारी है और इसमें जाति गणना भी शामिल होगी।

Akhilesh Yadav's attack, They want to implement reservation fraudulently. Shah's counter-attack
अखिलेश यादव और अमित शाह - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

महिला आरक्षण विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर संसद में सियासी टकराव तेज हो गया है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। गुरुवार से शुरू हुए संसद के विस्तारित सत्र में इस पर जोरदार बहस देखने को मिल रही है। सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा कि महिला विधेयक के पक्ष में हैं हम। आपको जल्दीबाजी क्यों है? आप जनगणना क्यों नहीं कराना चाहते? सेंसस ये इसलिए नहीं करना चाहते हैं कि जैसे ही जनगणना होगी, हम सब लोग जाति गणना मांगेंगे, जाति की गिनती के बाद हम आरक्षण मांगेंगे। इसलिए धोखा देकर लाना चाहते हैं।

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सपा का बस चले तो घरों की जाती तय कर दे- शाह

वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मैं देश की जनता को बताना चाहता हूं कि देश में जनगणना का काम जारी है। सरकार जाति गणना का निर्णय भी ले चुकी है... अभी घरों की गिनती हो रही है। घरों की कोई जाति नहीं होती। समाजवादी पार्टी की चले तो घरों की भी जाति तय कर दे। जब नागरिकों की जनगणना होगी तब उसमें जाति का कॉलम रखा है। ये मेरा विभाग है। मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि ये जनगणना जाति के साथ ही होने वाली है।

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तीन विधेयक हुए पेश 

लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन से जुड़े तीन विधेयक पेश किए गए, जिनको लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने इन प्रस्तावित विधेयकों को असंवैधानिक करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और अमित ने ये विधेयक पेश किए। 

क्या है यह विधेयक?

प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है, ताकि महिला आरक्षण को लागू किया जा सके। इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटों में बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया है। विधेयक में यह भी कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर तय की जाएंगी।


इस बीच, कई विपक्षी दलों ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे परिसीमन से जुड़े प्रावधानों का संयुक्त रूप से विरोध करेंगे, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे विधायी निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ नहीं हैं।


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