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महिला आरक्षण और परिसीमन पर बिल एक साथ क्यों?: गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में दिया जवाब, विरोध में क्या तर्क?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Thu, 16 Apr 2026 12:27 PM IST
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सार

संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को एक साथ लाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकार का कहना है कि 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन जरूरी है, इसलिए दोनों बिल साथ लाए गए। वहीं विपक्ष, खासकर केसी वेणुगोपाल, इसे संसदीय नियमों के खिलाफ बताते हुए विरोध कर रहे हैं। इस मुद्दे पर सदन में तीखी बहस जारी है।

Women Reservation along with Delimitation Home Minister Shah Explains in Lok Sabha know Arguments in detail
अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

संसद में आज आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर जोरदार राजनीतिक बहस चल रही है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सरकार इन दोनों अहम मुद्दों को एक साथ क्यों आगे बढ़ा रही है? अब इसी पर जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में साफ कहा कि दोनों विधेयकों को साथ लाने का उद्देश्य महिला आरक्षण को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना है। यह बयान उन्होंने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल की आपत्ति के जवाब में दिया, जिसमें उन्होंने कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव का विरोध किया था।

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सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन जरूरी प्रक्रिया है। इसी वजह से दोनों विधेयकों को एक साथ पेश किया गया है, ताकि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को सही तरीके से लागू किया जा सके और लोकसभा व विधानसभा में सीटों का पुनर्गठन किया जा सके।
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केसी वेणुगोपाल ने किया विधेयक का विरोध
बता दें कि अमित शाह का ये जवाब कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के जवाब में आया है। उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक और अन्य विधेयकों को एक साथ लाना सही संसदीय प्रक्रिया नहीं है और यह नियमों के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा करना ठीक नहीं होगा और इसके परिणाम भी हो सकते हैं।

अमित शाह ने दिया करारा जवाब
इस पर जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित साह ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन और सामान्य विधेयकों पर मतदान की प्रक्रिया अलग होती है, इसलिए दोनों को साथ लाने में कोई दिक्कत नहीं है। अमित शाह ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण को पूरी तरह लागू करने के लिए इन सभी विधेयकों को एक साथ लाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि इनका विषय एक ही है, इसलिए इन्हें साथ में चर्चा के लिए लाया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पहले भी ऐसे उदाहरण रहे हैं, जब एक साथ कई विधेयकों पर चर्चा हुई है, जैसे 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समय हुआ था।

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विपक्ष का विरोध क्यों?

दूसरी ओर विपक्ष का आरोप है कि इन दोनों विधेयकों को एक साथ लाकर राजनीतिक और चुनावी संतुलन में बदलाव करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को पहले अलग-अलग तरीके से चर्चा करनी चाहिए थी। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। सरकार इसे सुधार प्रक्रिया बता रही है, जबकि विपक्ष इसे असंतुलन पैदा करने वाला कदम मान रहा है।

 

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