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Train Accidents in India: रेलमंत्री बोले- दस वर्षों में ट्रेन हादसों में आई 90% कमी, अब सिंगल डिजिट का लक्ष्य
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 22 Apr 2026 02:44 PM IST
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सार
नई दिल्ली में आयोजित ट्रैक मेंटेनर्स कॉन्फ्रेंस में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पिछले दस वर्षों में रेल दुर्घटनाओं में 90 प्रतिशत तक कमी आई है। सरकार अब सुरक्षा को और मजबूत करते हुए आधुनिक तकनीक, ड्रोन और नए सिस्टम के जरिए रेलवे को वैश्विक स्तर तक ले जाने की योजना पर काम कर रही है।
अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री
- फोटो : ANI
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विस्तार
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'ऑल इंडिया ट्रैक मेंटेनर्स कॉन्फ्रेंस' में भारतीय रेलवे के भविष्य को लेकर कई बड़ी बातें कहीं। उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में रेल हादसों में करीब 90 फीसदी की कमी आई है। रेल मंत्री ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया, लेकिन साथ ही कहा कि हमें यहीं नहीं रुकना है। अब सरकार का लक्ष्य रेल हादसों की संख्या को घटाकर इकाई (सिंगल डिजिट) में लाना है। उन्होंने कहा सरकार का मुख्य उद्देश्य भारतीय रेलवे के सुरक्षा स्तर को विकसित देशों के बराबर पहुंचाना है।
कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए रेल मंत्री ने पटरियों के आधुनिकीकरण को भी जरूरी बताया। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले दस वर्षों में लगभग 36,000 किलोमीटर नई पटरियां बिछाई गई हैं। पटरियों की बेहतर देखरेख के लिए अभी रेलवे के पास करीब 1,800 ट्रैक मशीनें हैं। सरकार इन मशीनों की संख्या बढ़ाकर 3,000 करना चाहती है। जब मशीनों की संख्या 3,000 के करीब पहुंच जाएगी, तो पटरियों की जांच और मरम्मत से जुड़ी पुरानी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी।
ये भी पढ़ें: West Bengal: केजरीवाल ने ममता बनर्जी से फोन पर की बात, समर्थन जताकर बोले- लोकतंत्र की अहम लड़ाई लड़ रहीं दीदी
रेलवे अब पटरियों की देखरेख के लिए 'रेल-कम-रोड व्हीकल' नाम का नया मॉडल ला रहा है। इस सिस्टम में कर्मचारी अपने सभी औजार और सामान सीधे गाड़ी में लोड कर सकेंगे। सीधे ट्रैक पर जा सकेंगे और आराम से बैठकर पटरियों की जांच कर सकेंगे। इसका पायलट प्रोजेक्ट भावनगर डिवीजन में शुरू किया जा रहा है। वहां कड़ी टेस्टिंग के बाद दो 'रेल-कम-रोड व्हीकल' तैनात किए गए हैं। यह नया तरीका पुराने और कठिन काम करने के ढंग को पूरी तरह बदल देगा। इससे काम करना ज्यादा सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक होगा।
इसके अलावा, पटरियों की जांच में ड्रोन तकनीक और नए तरह के गेज की मदद ली जा रही है। इन नए गेज से पटरियों के मोड़ और क्रॉसिंग की सटीक माप ली जा सकेगी। पहले जो काम अंदाजे से होते थे, अब वे पूरी सटीकता से होंगे। देश भर में अब आधुनिक ट्रैक सिस्टम लगाए जा रहे हैं। इनमें 60 किलो वाली रेल, 90 यूटीएस मजबूती वाली रेल और 207 मीटर लंबे रेल पैनल शामिल हैं। पटरियों के मोड़ पर घर्षण मुक्त स्विच लगाए जा रहे हैं और 'वेल्डेबल सीएमएस' (WCMS) का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इन सभी आधुनिक तकनीकों को पूरे देश में लागू करना है।
रेल मंत्री ने जोर दिया कि रेलवे के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और कर्मचारियों की सुरक्षा दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'रक्षक' नाम का एक सिस्टम लागू किया गया था, जो वीएचएफ (VHF) तकनीक पर आधारित था। हालांकि, इस सिस्टम में कुछ चुनौतियां सामने आईं। कई जगहों पर, जैसे कि घुमावदार पटरियों, पहाड़ी इलाकों या लंबी दूरी पर सिग्नल ठीक से नहीं पहुंच पाते थे। इससे जानकारी मिलने में देरी होती थी और हादसों का खतरा बढ़ जाता था। इसके समाधान के रूप में अब एक नया मोबाइल फोन आधारित सिस्टम तैयार किया गया है, जो अधिक भरोसेमंद है। फिलहाल इसका टेस्ट चल रहा है।
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इसके अलावा, पटरियों की जांच में ड्रोन तकनीक और नए तरह के गेज की मदद ली जा रही है। इन नए गेज से पटरियों के मोड़ और क्रॉसिंग की सटीक माप ली जा सकेगी। पहले जो काम अंदाजे से होते थे, अब वे पूरी सटीकता से होंगे। देश भर में अब आधुनिक ट्रैक सिस्टम लगाए जा रहे हैं। इनमें 60 किलो वाली रेल, 90 यूटीएस मजबूती वाली रेल और 207 मीटर लंबे रेल पैनल शामिल हैं। पटरियों के मोड़ पर घर्षण मुक्त स्विच लगाए जा रहे हैं और 'वेल्डेबल सीएमएस' (WCMS) का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इन सभी आधुनिक तकनीकों को पूरे देश में लागू करना है।
रेल मंत्री ने जोर दिया कि रेलवे के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और कर्मचारियों की सुरक्षा दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'रक्षक' नाम का एक सिस्टम लागू किया गया था, जो वीएचएफ (VHF) तकनीक पर आधारित था। हालांकि, इस सिस्टम में कुछ चुनौतियां सामने आईं। कई जगहों पर, जैसे कि घुमावदार पटरियों, पहाड़ी इलाकों या लंबी दूरी पर सिग्नल ठीक से नहीं पहुंच पाते थे। इससे जानकारी मिलने में देरी होती थी और हादसों का खतरा बढ़ जाता था। इसके समाधान के रूप में अब एक नया मोबाइल फोन आधारित सिस्टम तैयार किया गया है, जो अधिक भरोसेमंद है। फिलहाल इसका टेस्ट चल रहा है।
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