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तमिलनाडु चुनाव: रेस से बाहर या बड़ी रणनीति का हिस्सा? उम्मीदवार न बनने पर अन्नामलाई ने तोड़ी चुप्पी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 03 Apr 2026 05:09 PM IST
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सार
तमिलनाडु चुनाव में भाजपा नेता के अन्नामलाई को उम्मीदवार न बनाए जाने पर कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें किनारे कर दिया गया है। लेकिन अन्नामलाई ने साफ किया है कि पार्टी ने उन्हें पूरे तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी में एनडीए उम्मीदवारों के लिए धुआंधार प्रचार करने की बड़ी जिम्मेदारी दी है।
के अन्नामलाई, भाजपा नेता
- फोटो : ANI
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विस्तार
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच भाजपा के कद्दावर नेता पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई का नाम उम्मीदवारों की लिस्ट में न होना चर्चा का विषय बन गया है। चर्चा हो रही है कि क्या पार्टी ने अन्नामलाई को 'साइडलाइन' यानी किनारे कर दिया है। वहीं अब खुद अन्नामलाई ने सामने आकर इन कयासों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने भाजपा के असली प्लान का खुलासा किया है।
भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के अन्नामलाई ने बताया कि वह चुनावी मैदान में क्यों नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह पार्टी का एक सोचा-समझा फैसला है। उन्हें उम्मीदवार बनाने के बजाय एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अन्नामलाई को मिला 'सुपर स्टार प्रचारक' का जिम्मा
अन्नामलाई ने कहा कि इस चुनाव में मेरी भूमिका तमिलनाडु भर में अपने उम्मीदवारों के लिए धुआंधार प्रचार करने की है। फिलहाल, पार्टी ने मुझे 7 तारीख तक पुदुचेरी और केरल में चुनाव प्रचार की कमान सौंपी है। इसके ठीक बाद, यानी 7 अप्रैल से लेकर 23 अप्रैल तक, मैं तमिलनाडु के कोने-कोने में जाकर भाजपा और एनडीए के सभी उम्मीदवारों के लिए वोट मांगूंगा। पार्टी ने मुझे यही बड़ी जिम्मेदारी दी है और मैं इसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा।
यह भी पढ़ें: तमिलनाडु का सियासी रण: कांग्रेस ने जारी की 27 उम्मीदवारों की सूची, प्रदेश अध्यक्ष श्रीपेरंबुदूर से ठोकेंगे ताल
रणनीति या सियासी मजबूरी?
राजनीतिक पंडितों की मानें तो अन्नामलाई को उम्मीदवार न बनाना भाजपा की एक बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। अगर अन्नामलाई खुद किसी एक सीट से चुनाव लड़ते, तो वह अपनी खुद की सीट जीतने में बंध कर रह जाते। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि अन्नामलाई की लोकप्रियता का फायदा पूरे तमिलनाडु में मिले। वह पार्टी के सबसे बड़े 'क्राउड पुलर' यानी भीड़ जुटाने वाले नेता हैं, इसलिए उन्हें एक सीट पर बांधने के बजाय पूरे प्रदेश में खुला छोड़ दिया गया है।
हालांकि, विरोधी खेमा इसे दूसरे चश्मे से देख रहा है। विरोधियों का कहना है कि पार्टी के भीतर खींचतान की वजह से उन्हें चुनावी रेस से दूर रखा गया है। अन्नामलाई ने कहा है कि वह बैकफुट पर नहीं हैं, बल्कि एनडीए की नैया पार लगाने के लिए फ्रंटफुट पर आकर खेलने वाले हैं।
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भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के अन्नामलाई ने बताया कि वह चुनावी मैदान में क्यों नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह पार्टी का एक सोचा-समझा फैसला है। उन्हें उम्मीदवार बनाने के बजाय एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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अन्नामलाई को मिला 'सुपर स्टार प्रचारक' का जिम्मा
अन्नामलाई ने कहा कि इस चुनाव में मेरी भूमिका तमिलनाडु भर में अपने उम्मीदवारों के लिए धुआंधार प्रचार करने की है। फिलहाल, पार्टी ने मुझे 7 तारीख तक पुदुचेरी और केरल में चुनाव प्रचार की कमान सौंपी है। इसके ठीक बाद, यानी 7 अप्रैल से लेकर 23 अप्रैल तक, मैं तमिलनाडु के कोने-कोने में जाकर भाजपा और एनडीए के सभी उम्मीदवारों के लिए वोट मांगूंगा। पार्टी ने मुझे यही बड़ी जिम्मेदारी दी है और मैं इसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा।
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रणनीति या सियासी मजबूरी?
राजनीतिक पंडितों की मानें तो अन्नामलाई को उम्मीदवार न बनाना भाजपा की एक बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। अगर अन्नामलाई खुद किसी एक सीट से चुनाव लड़ते, तो वह अपनी खुद की सीट जीतने में बंध कर रह जाते। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि अन्नामलाई की लोकप्रियता का फायदा पूरे तमिलनाडु में मिले। वह पार्टी के सबसे बड़े 'क्राउड पुलर' यानी भीड़ जुटाने वाले नेता हैं, इसलिए उन्हें एक सीट पर बांधने के बजाय पूरे प्रदेश में खुला छोड़ दिया गया है।
हालांकि, विरोधी खेमा इसे दूसरे चश्मे से देख रहा है। विरोधियों का कहना है कि पार्टी के भीतर खींचतान की वजह से उन्हें चुनावी रेस से दूर रखा गया है। अन्नामलाई ने कहा है कि वह बैकफुट पर नहीं हैं, बल्कि एनडीए की नैया पार लगाने के लिए फ्रंटफुट पर आकर खेलने वाले हैं।
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