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INS Aridaman: भारतीय नौसेना की बढ़ेगी ताकत, रक्षा मंत्री ने स्वदेशी पनडुब्बी पर कहा- 'अरिदमन' शब्द नहीं शक्ति!

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Jyoti Bhaskar Updated Fri, 03 Apr 2026 10:20 AM IST
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सार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज भारत की स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन को भारतीय नौसेना में शामिल करेंगे। इससे भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेंगी। रक्षा मंंत्री ने स्वदेशी पनडुब्बी पर कहा कि यह 'अरिदमन' शब्द नहीं शक्ति।

INS Aridaman Commissioning Updates Indian Navy Defense Minister Indigenous Submarine Not Just Word But Force
राजनाथ सिंह (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज भारत की स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन को भारतीय नौसेना में शामिल करेंगे। यह देश की तीसरी स्वदेश निर्मित परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी है। 
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शब्द नहीं, शक्ति है- रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स के एक पोस्ट में इस घटनाक्रम का संकेत दिया, जिसमें उन्होंने पनडुब्बी को महज एक नाम से कहीं अधिक बताते हुए इसे शक्ति का प्रतीक बताया। पोस्ट में उन्होंने लिखा, ""अरिदमन' सिर्फ एक शब्द नहीं, शक्ति है!" आईएनएस अरिधमन, अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बियों का एक उन्नत संस्करण है, जिसे अगस्त 2024 में आईएनएस अरिघाट और 2016 में आईएनएस अरिहंत जैसी पहले की पनडुब्बियों के बाद शामिल किया गया है। इसका शामिल होना भारत के परमाणु त्रिशूल और समुद्री प्रतिरोध को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है। यह अवसर विशाखापत्तनम में आईएनएस तारागिरी के शामिल होने के साथ भी मेल खाता है, जहां राजनाथ सिंह उपस्थित रहेंगे।

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क्या तारागिरी की खासियत?

तारागिरी को नौसेना में शामिल करना ऐसे समय में हुआ है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्यों में बदलाव और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भागीदारी के कारण भारत के पूर्वी तट का रणनीतिक और समुद्री महत्व लगातार बढ़ रहा है। तारागिरी को शामिल करना नौसेना के महत्वाकांक्षी बेड़ा संवर्धन कार्यक्रम के माध्यम से अपनी युद्ध क्षमता और परिचालन शक्ति को मजबूत करने पर नौसेना के निरंतर ध्यान को दर्शाता है। 

  •  प्रोजेक्ट 17ए श्रेणी के चौथे शक्तिशाली प्लेटफॉर्म के रूप में, तारागिरी महज एक जहाज नहीं है।
  • यह 6,670 टन का एक ऐसा प्रतीक है जो 'मेक इन इंडिया' की भावना और हमारे स्वदेशी शिपयार्डों की परिष्कृत इंजीनियरिंग क्षमताओं को दर्शाता है।

मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल)  की और से निर्मित यह फ्रिगेट अपने पूर्ववर्ती डिजाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत छलांग का प्रतिनिधित्व करता है। इसका  आकार और रडार क्रॉस-सेक्शन में उल्लेखनीय कमी इसे घातक स्टील्थ तकनीक से संचालित करने में सक्षम बनाती है। 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से युक्त यह जहाज घरेलू औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है, जिसमें अब 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) शामिल हैं। 

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