सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   anniversary of Galvan violence: How much has India-China relations changed in three years, what are both the c

गलवां हिंसा की तीसरी बरसी: तीन साल में कितने बदले भारत-चीन के रिश्ते, अब दोनों देश क्या कर रहे? जानें

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Thu, 15 Jun 2023 04:25 PM IST
विज्ञापन
सार

आज हम बात करेंगे गलवां झड़प की। आइए जानते हैं कि इस झड़प के बाद दोनों देशों के बीच अब हालात क्या हैं? क्या दोनों देशों के रिश्तों में कितना बदलाव आया है? विवाद खत्म करने के लिए दोनों देश क्या-क्या कर रहे हैं? आइए जानते हैं....
 

anniversary of Galvan violence: How much has India-China relations changed in three years, what are both the c
गलवां हिंसा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

आज 15 जून है। आज के ही दिन 2020 में लद्दाख के गलवां घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसमें 20 भारतीय जवान शहीद हुए थे, जबकि चीन के 38 से ज्यादा जवान मारे गए थे। इसके बाद करीब एक साल तक दोनों देशों के बीच काफी तनाव की स्थिति रही। सीमा पर हजारों जवान तैनात कर दिए गए।
Trending Videos


इससे पहले 2017 में डोकलाम में भी 73 दिनों तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं। गलवां के बाद पिछले साल यानी 2022 में फिर से चीनी सेना ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में घुसपैठ की। इस दौरान भी दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़पें हुईं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


 आज हम बात करेंगे गलवां झड़प की। आइए जानते हैं कि इस झड़प के बाद दोनों देशों के बीच अब हालात क्या हैं? क्या दोनों देशों के रिश्तों में कितना बदलाव आया है? विवाद खत्म करने के लिए दोनों देश क्या-क्या कर रहे हैं? आइए जानते हैं....
 

पहले जानिए 15 जून 2020 को क्या हुआ था? 
1 मई, 2020 को दोनों देशों के सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर झड़प हो गई थी। उस झड़प में दोनों तरफ के कई सैनिक घायल हो गए थे। यहीं से तनाव की स्थिति बढ़ गई थी। इसके बाद 15 जून की रात गलवां घाटी पर भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने आ गए। 

बताया जाता है कि चीनी सैनिक घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे। भारतीय जवानों ने उन्हें रोका तो वह हिंसा पर उतारू हो गए। इसके बाद विवाद काफी बढ़ गया। इस झड़प में दोनों ओर से खूब पत्थर, रॉड चले थे। इसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे, जबकि चीन के 38 से ज्यादा जवान मारे गए थे। इनमें कई चीनी जवान नदी में बह गए थे। हालांकि, चीन ने केवल चार जवानों के मौत की पुष्टि की। अमेरिका की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, इस झड़प में 45 से ज्यादा चीनी जवान मारे गए थे। 
 

इसके बाद क्या-क्या हुआ? 
15 जून 2020 को सेना के बीच हिंसक झड़प के बाद से सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों के बीच अब तक 18 राउंड की बातचीत हो चुकी है। तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के विदेश मंत्री भी बैठक कर चुके हैं। 

इसके बाद फरवरी 2021 में डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू की गई। सैन्य और कूटनीतिक स्तर की बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने पैंगोंग लेक के उत्तर और दक्षिणी तटों और गोगरा क्षेत्र से सैनिकों को पूरी तरह से हटाने (डिसइंगेजमेंट) की प्रक्रिया पूरी कर ली। 
 

पूरा क्या विवाद है? 
भारत और चीन के बीच लगभग 3,440 किलोमीटर लंबी सीमा है। 1962 की जंग के बाद से ही इसमें से ज्यादातर हिस्सों पर विवाद है। अभी तक हुई बैठकों में दोनों देशों ने स्थिति पर नियंत्रण, शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए समाधान तलाशने की बात पर सहमति जताई है। विवादित क्षेत्रों में यथास्थिति कायम रखने और सेना के डिसइंगेजमेंट को लेकर भी समझौता किया है। 
 

अब दोनों देशों के बीच कैसे रिश्ते हैं? 
 विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल कहते हैं, 'मौजूदा समय भारत और चीन के रिश्ते स्थिर हैं। हालांकि, इन रिश्तों को अच्छा नहीं कहा जा सकता है। सीमा पर तनाव आज भी कायम ही रहता है। चीन बार-बार भारत को उकसाने की कोशिश करता है। कभी एलएसी पर तो कभी अरुणाचल प्रदेश से सटे बॉर्डर पर।'
 
डॉ. पटेल आगे कहते हैं, 'इस साल भारत जी-20 बैठक की अध्यक्षता कर रहा है। अलग-अलग तरह की कई बैठकें हो चुकी हैं। इसमें चीन के प्रतिनिधि और मंत्री भी शामिल हो चुके हैं। हालांकि, दो बैठकों से जरूर चीन ने दूरी बना ली थी। एक बैठक अरुणाचल प्रदेश में हुई थी तो दूसरी जम्मू कश्मीर में। कुल मिलाकर चीन समय-समय पर भारत के साथ तनाव जरूर बढ़ाते रहता है।' 
 
डॉ. पटेल के मुताबिक, 'गलवां हिंसा के बाद से भारत ने डिफेंस सेक्टर में निवेश बढ़ा दिया है। बॉर्डर सिक्योरिटी, रक्षा उत्पादों को मजबूत करना शुरू कर दिया है। एलएसी पर अभी भी दोनों तरफ 50-50 हजार से ज्यादा सैनिक तैनात हैं। भारत ने बॉर्डर से लगे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना तेज कर दिया है। एलएसी से सटी 73 स्ट्रैटजिक सड़कें तैयार की जा रहीं हैं। इसी तरह अरुणाचल प्रदेश में भी सरकार ने तेजी से विकास कार्य करने शुरू कर दिए हैं। सरकार ने अरुणाचल में 1430 मील लंबी सड़क तैयार करनी शुरू कर दी है।'

उन्होंने कहा, 'चीन मौका मिलते ही भारत के खिलाफ साजिश करने लगता है। अब भारत भी मुंहतोड़ जवाब देने लगा है। भारत सरकार ने चीन की कई सोशल मीडिया, वीडियो गेम व अन्य एप्स पर बैन लगा दिया है। इसके अलावा भी कई कठोर उठाए गए हैं।'

भारत की आगे क्या रणनीति है?
चीन ने पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश जैसे देशों को कर्ज के जाल में फंसाकर भारत को घेरने की कोशिश की है। हालांकि, भारत के रिश्ते बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी मुल्कों से अभी भी मजबूत हैं। हां, पाकिस्तान जरूर पूरी तरह से चीन के कब्जे में पहुंच चुका है। 

अब भारत ने भी चीन पर पलटवार करना शुरू कर दिया है। चीन के पड़ोसी देशों और खासतौर पर उन देशों को भारत अपने साथ ला रहा है, जिनसे ड्रैगन की नहीं बनती है। दूसरी तरफ भारत ने हिंद प्रशांत क्षेत्र में भी अपना दबदबा बढ़ाना शुरू कर दिया है। पिछले दिनों पीएम मोदी जापान, पापुआ न्यू गिनी और फिर ऑस्ट्रेलिया पहुंचे। इसके जरिए पीएम मोदी ने प्रशांत क्षेत्र में चीन के प्रभाव को कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। भारत इस क्षेत्र में स्थित छोटे और गरीब देशों को अपने साथ लाने की कोशिश में है। इसकी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed